Cash Flow Statement किसी कंपनी या बिजनेस का वह हिसाब है, जो बताता है कि एक तय समय में असल नकद पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ। इसे नकदी प्रवाह विवरण भी कहा जाता है।
प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में मुनाफा दिखता है, लेकिन उसमें उधारी पर हुई बिक्री भी जुड़ी होती है। ऐसे में कागज पर अच्छा मुनाफा होने के बावजूद बैंक खाते में पैसा कम हो सकता है।
तो पैसे की असली तस्वीर कैसे देखें? इसका जवाब इसी दस्तावेज में छिपा है, जिसे आज हम आसान भाषा में पढ़ना सीखेंगे।
मुनाफा और नकदी अलग क्यों होते हैं?
मान लीजिए आपने एक महीने में 5 लाख रुपये का माल बेचा, लेकिन ग्राहकों ने अभी सिर्फ 2 लाख चुकाए हैं। अकाउंट की किताब में पूरी बिक्री और उसका मुनाफा दर्ज हो जाएगा, लेकिन हाथ में सिर्फ 2 लाख आए।
इसी तरह मशीन की घिसाई यानी डेप्रिसिएशन मुनाफे को घटाता है, जबकि उस महीने कोई नकद पैसा बाहर नहीं जाता। इन्हीं फर्कों को सुलझाने का काम Cash Flow Statement करता है।
Cash Flow Statement के तीन हिस्से
पहला हिस्सा है ऑपरेटिंग कैश फ्लो, यानी रोजमर्रा के कारोबार से आया और गया पैसा। इसमें ग्राहकों से मिली रकम, सप्लायर को भुगतान, सैलरी और टैक्स शामिल होते हैं।
दूसरा हिस्सा है इन्वेस्टिंग कैश फ्लो। इसमें मशीन, जमीन या दूसरी कंपनियों में किए निवेश की खरीद और बिक्री का पैसा दिखता है।
तीसरा हिस्सा है फाइनेंसिंग कैश फ्लो। इसमें बैंक से लिया लोन, उसकी किस्तें, शेयर जारी करके जुटाया पैसा और शेयरधारकों को दिया गया डिविडेंड आता है।
Cash Flow Statement में इन तीनों का कुल जोड़ बताता है कि साल के अंत में कंपनी के पास शुरुआत के मुकाबले कितनी नकदी बढ़ी या घटी।
एक आसान उदाहरण से समझें
मान लीजिए एक छोटी फैक्ट्री का सालाना शुद्ध मुनाफा 10 लाख रुपये है। इसमें 2 लाख डेप्रिसिएशन वापस जोड़ा जाता है, क्योंकि वह नकद खर्च नहीं था।
अब ग्राहकों पर उधारी 6 लाख बढ़ गई और गोदाम का स्टॉक 3 लाख बढ़ गया, इसलिए ये 9 लाख घटाए जाएंगे। वहीं सप्लायर्स का बकाया 1 लाख बढ़ा, जो नकदी में जुड़ता है।
इस हिसाब से Cash Flow Statement में ऑपरेटिंग कैश फ्लो सिर्फ 4 लाख रुपये दिखेगा, जबकि मुनाफा 10 लाख था। यही वह फर्क है, जो कई कारोबारियों को महीने के अंत में परेशान करता है।
अगर फैक्ट्री ने 5 लाख की नई मशीन खरीदी और बैंक से 3 लाख का लोन लिया, तो साल भर में कुल नकदी सिर्फ 2 लाख रुपये बढ़ी।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट तरीका क्या है?
Cash Flow Statement बनाने के दो तरीके होते हैं। डायरेक्ट तरीके में ग्राहकों से मिली और सप्लायर्स को दी गई असल नकदी सीधे लिखी जाती है।
इनडायरेक्ट तरीका शुद्ध मुनाफे से शुरू होता है। फिर उसमें डेप्रिसिएशन जैसे गैर नकद खर्च जोड़े जाते हैं और उधारी व स्टॉक में आए बदलाव को एडजस्ट किया जाता है। ऊपर वाला फैक्ट्री का उदाहरण इसी तरीके पर आधारित है।
भारत में ज्यादातर कंपनियां अपनी सालाना रिपोर्ट में इनडायरेक्ट तरीके से ही Cash Flow Statement पेश करती हैं, इसलिए इसे पढ़ना सीखना सबसे ज्यादा काम आता है।
इसे पढ़ते समय किन बातों पर ध्यान दें?
Cash Flow Statement खोलते ही सबसे पहले ऑपरेटिंग कैश फ्लो देखें। अगर कंपनी मुनाफा दिखा रही है लेकिन यह हिस्सा लगातार कई साल नेगेटिव है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
फिर देखें कि कंपनी का खर्च कहां से चल रहा है। अगर रोज का कारोबार बार बार लोन लेकर चलाया जा रहा है, तो आगे चलकर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
इन्वेस्टिंग वाले हिस्से में ज्यादा खर्च हमेशा बुरा नहीं होता। बढ़ती कंपनी नई मशीनों और विस्तार पर खर्च करती है, जिसका फायदा आगे के सालों में मिलता है।
फ्री कैश फ्लो क्या होता है?
ऑपरेटिंग कैश फ्लो में से मशीन और संपत्ति पर हुए खर्च यानी कैपेक्स को घटाने पर फ्री कैश फ्लो मिलता है। यह वह पैसा है, जो कंपनी कर्ज चुकाने, डिविडेंड देने या नए मौके पकड़ने के लिए खुलकर इस्तेमाल कर सकती है।
लंबे समय के निवेशक इसे बहुत ध्यान से देखते हैं, क्योंकि लगातार अच्छा फ्री कैश फ्लो किसी कंपनी की असली मजबूती दिखाता है।
छोटे कारोबारी इसका इस्तेमाल कैसे करें?
छोटी दुकान या फर्म के लिए भी हर महीने एक साधारण Cash Flow Statement बनाना फायदेमंद है। इसके लिए किसी बड़े सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं, एक सादी एक्सेल शीट भी काफी है।
हर महीने आई और गई नकदी को इन तीन हिस्सों में लिखें। कुछ ही महीनों में साफ दिखने लगेगा कि पैसा कहां अटक रहा है और कौन सा खर्च टाला जा सकता है।
बैंक भी लोन देने से पहले अक्सर यही देखते हैं कि बिजनेस अपने कारोबार से कितनी नकदी कमा रहा है, सिर्फ मुनाफा नहीं।
बिजनेस फाइनेंस से जुड़ी और जानकारी
नकदी की सही प्लानिंग के तरीके जानने के लिए Cash Flow Management की पूरी गाइड पढ़ें। रोजमर्रा के कारोबार के लिए जरूरी पूंजी समझने के लिए Working Capital क्या है देखें। कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई का हिसाब समझने के लिए EBITDA का असली मतलब भी जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Cash Flow Statement और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में क्या फर्क है?
प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट कमाई और खर्च के आधार पर मुनाफा बताता है, चाहे पैसा आया हो या नहीं। नकदी प्रवाह विवरण सिर्फ असल में आए और गए पैसे का हिसाब रखता है।
2. क्या नेगेटिव कैश फ्लो हमेशा बुरा होता है?
नहीं, अगर नकदी नई मशीन या विस्तार में लगने से घटी है तो यह बढ़त का संकेत हो सकता है। लेकिन रोज के कारोबार से लगातार नेगेटिव नकदी चिंता की बात है।
3. किसी कंपनी का Cash Flow Statement कहां मिलता है?
शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की सालाना रिपोर्ट में यह जरूर होता है, जो कंपनी की वेबसाइट और स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर उपलब्ध रहती है।
4. इस विषय पर विस्तार से कहां पढ़ें?
नकदी प्रवाह विवरण के प्रकार और बनाने के तरीकों की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

