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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, 91 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

B C KHANDURI: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।

उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा कि अत्यंत दुख के साथ सूचित कर रहा हूं कि मेरे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने उन्हें अपना पिता, मार्गदर्शक और भगवान बताया।

91 वर्षीय बी.सी. खंडूरी पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। सेना से लेकर राजनीति तक अनुशासन, ईमानदारी और सादगी की पहचान रहे खंडूरी के निधन से उत्तराखंड समेत पूरे राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

B C KHANDURI का जीवन

भुवन चंद्र खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था, जो उस समय संयुक्त प्रांत (ब्रिटिश भारत) का हिस्सा था। उनके पिता जय बल्लभ खंडूरी पत्रकार थे, जबकि माता दुर्गा देवी खंडूरी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती थीं।

B C KHANDURI
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उनका परिवार गढ़वाली गौर ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखता था। उन्होंने अपनी शिक्षा देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त की। खंडूरी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स नई दिल्ली और इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट सिकंदराबाद से उच्च शिक्षा हासिल की।

उन्होंने बीएससी, बीई (सिविल) और एमआईई (इंडिया) जैसी डिग्रियां प्राप्त कीं। इसके अलावा डिफेंस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा सहित कई विशेष सैन्य तकनीकी पाठ्यक्रम भी पूरे किए।

भारतीय सेना में शानदार सेवाएं और AVSM सम्मान

भुवन चंद्र खंडूरी ने वर्ष 1954 से 1991 तक भारतीय सेना की प्रतिष्ठित कोर ऑफ इंजीनियर्स शाखा में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने एक रेजिमेंट का नेतृत्व किया और युद्धकालीन इंजीनियरिंग अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेना में वे चीफ इंजीनियर, इंजीनियरिंग ब्रिगेड कमांडर, आर्मी मुख्यालय में एडिशनल मिलिट्री सेक्रेटरी और इंजीनियर-इन-चीफ शाखा में एडिशनल डायरेक्टर जनरल जैसे उच्च पदों पर रहे।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 1982 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया। वे मेजर जनरल के पद तक पहुंचे और 1991 में सेना से सेवानिवृत्त हुए।

राजनीति में प्रवेश 

सेना से रिटायरमेंट के बाद B C KHANDURI ने राजनीति में कदम रखा और 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वे कई बार लोकसभा पहुंचे और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए। उन्होंने पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें 7 नवंबर 2000 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। बाद में 2003 में वे कैबिनेट मंत्री बने।

उनके कार्यकाल में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और उत्तर-दक्षिण एवं पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर जैसी देश की बड़ी सड़क परियोजनाओं को गति मिली।

B C KHANDURI
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री 

वर्ष 2007 में भाजपा की जीत के बाद B C KHANDURI 8 मार्च को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल जून 2009 तक चला। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सरकारी खर्चों में कटौती, नेताओं और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर नियंत्रण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था सीमित की और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग पर भी नियंत्रण लगाया। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों का व्यापक दौरा कर उन्होंने स्थानीय समस्याओं को समझने की कोशिश की।

संसदीय जीवन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक जुड़ाव

वर्ष 2012 में B C KHANDURI कोटद्वार विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन 2014 में फिर गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद बने। संसद में वे लोक लेखा समिति (PAC) और नियम समिति जैसे महत्वपूर्ण संसदीय मंचों से जुड़े रहे। 2019 में बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली।

उनके परिवार में पत्नी अरुणा खंडूरी, पुत्र मनीष खंडूरी और पुत्री ऋतु खंडूरी भूषण शामिल हैं। मनीष खंडूरी ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जबकि ऋतु खंडूरी वर्तमान में उत्तराखंड राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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