ASHLEY J TELLIS: अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और भारतीय मूल के प्रसिद्ध रक्षा रणनीतिकार एश्ले जे. टेलिस को गोपनीय राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेजों को अवैध रूप से रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वर्जीनिया के पूर्वी जिले के यूएस अटॉर्नी कार्यालय ने मंगलवार को इस गिरफ्तारी की पुष्टि की। टेलिस, जो लंबे समय से दक्षिण एशिया नीति के प्रमुख सलाहकार रहे हैं, पर 18 यूएससी § 793(ई) के तहत राष्ट्रीय रक्षा सूचना को अवैध रूप से रोकने का आरोप लगाया गया है। अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल की जेल, 2.5 लाख डॉलर जुर्माना और अन्य सज़ाएं हो सकती हैं।

ASHLEY J TELLIS पर एफबीआई की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
एफबीआई द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, एश्ले टेलिस ने सितंबर और अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्रालय और विदेश विभाग की सुरक्षित सुविधाओं से हजारों पृष्ठों के वर्गीकृत दस्तावेज प्रिंट किए और अपने वाहन में ले जाते हुए देखे गए। 11 अक्टूबर 2025 को उनके वर्जीनिया के वियना स्थित घर पर की गई तलाशी में 1,000 से अधिक पृष्ठों के ‘टॉप सीक्रेट’ और ‘सीक्रेट’ दस्तावेज बरामद हुए। ये दस्तावेज लॉक्ड कैबिनेट, डेस्क और यहां तक कि कचरे के थैलों में छिपाकर रखे गए थे। इनमें यूएस एयर फोर्स की सैन्य क्षमताओं, हथियार तकनीकों और रणनीतिक योजनाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। टेलिस के पास टॉप सीक्रेट सिक्योरिटी क्लीयरेंस थी, जिससे उन्हें अत्यंत गोपनीय सूचनाओं तक पहुंच प्राप्त थी।

चीनी अधिकारियों से गुप्त मुलाकातों का आरोप
अभियोजन पक्ष के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि टेलिस ने 2022 से 2025 के बीच कई बार चीनी सरकारी अधिकारियों से गुप्त मुलाकातें कीं। इनमें से कई मीटिंग्स वर्जीनिया के फेयरफैक्स इलाके के रेस्तरां में हुईं। 11 अप्रैल 2023 की मीटिंग में उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ ईरान-चीन संबंधों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों पर चर्चा की, जिसे आसपास बैठे लोगों ने सुना। इसी तरह, 19 मार्च 2024 और 2 सितंबर 2025 की मुलाकातों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों और अन्य संवेदनशील विषयों पर बातचीत हुई। इन बैठकों में चीनी प्रतिनिधियों ने उन्हें लाल रंग के उपहार बैग भी दिए थे। एफबीआई का मानना है कि ये मुलाकातें संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान की आशंका को मजबूत करती हैं।

एशले टेलिस कौन है?
ASHLEY J TELLIS (उम्र 64 वर्ष) अमेरिकी विदेश नीति के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। वे 2001 से अमेरिकी सरकार से जुड़े हुए हैं और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में वरिष्ठ सलाहकार रह चुके हैं। उन्होंने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों प्रशासनों को भारत-दक्षिण एशिया नीति पर सलाह दी है। वे कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो रहे हैं और पेंटागन के ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट (अब डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के कॉन्ट्रैक्टर के रूप में भी कार्यरत थे। भारत-अमेरिका संबंधों के विशेषज्ञ के रूप में उनकी पहचान थी, लेकिन उनकी गिरफ्तारी से वाशिंगटन डीसी के विदेश नीति सर्कल्स में सनसनी फैल गई है।

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