फरवरी 2026 में अमेरिका के नेब्रास्का में एक वकील को कोर्ट ने बीच बहस में रोक दिया, क्योंकि उसकी दलील में दी गई 63 कानूनी नज़ीरों में से 57 गलत निकलीं, और 20 तो सिरे से मौजूद ही नहीं थीं। वजह थी AI Hallucination यानी AI का पूरे आत्मविश्वास से गलत जानकारी गढ़ना। आइए समझते हैं यह क्यों होता है और इससे कैसे बचा जाए।
AI Hallucination क्या है
AI Hallucination तब होता है जब कोई AI मॉडल कोई तथ्य, आंकड़ा, कोटेशन या रेफरेंस पूरे भरोसे के साथ बना देता है, जबकि वह असल में सही नहीं होता। यह जानबूझकर झूठ बोलना नहीं है, बल्कि मॉडल की भाषा जनरेट करने की प्रोसेस का एक साइड-इफेक्ट है, जिसमें वह हमेशा कोई न कोई जवाब देने की कोशिश करता है, भले ही उसे सही जानकारी न पता हो।
यह क्यों होता है
रिसर्च के मुताबिक ट्रेनिंग डेटा की सीमाएं AI Hallucination की सबसे बड़ी वजह मानी जाती हैं। इसके अलावा एक दिलचस्प बात यह है कि ज्यादा “सोचने” वाले रीजनिंग मॉडल कई बार सामान्य मॉडल से भी ज्यादा गलतियां करते हैं, क्योंकि वे बीच के मिसिंग स्टेप्स को भी अंदाजे से भर देते हैं, जिसे रिसर्चर्स “रीजनिंग टैक्स” कहते हैं।
असली दुनिया के उदाहरण
AI Hallucination के मामले अब सिर्फ थ्योरी नहीं रहे। कोर्ट फाइलिंग में फर्जी केस रेफरेंस देने से लेकर, मेडिकल समरी में गलत जानकारी जुड़ने तक, कई मामले सामने आ चुके हैं। एक स्टडी के मुताबिक बिना किसी सेफगार्ड के मेडिकल केस समरी में हैलुसिनेशन रेट 64% तक देखा गया, जो दिखाता है कि संवेदनशील क्षेत्रों में बिना जांचे AI के आउटपुट पर भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
2026 में हालात कितने गंभीर हैं
अलग-अलग बेंचमार्क और टास्क के हिसाब से AI Hallucination की दर काफी अलग-अलग पाई गई है। डॉक्यूमेंट समरी जैसे सीमित और तथ्यों पर आधारित कामों में टॉप मॉडल की गलती दर 1% से भी कम रह सकती है, जबकि ओपन-एंडेड सवालों या लीगल क्वेरी जैसे जटिल कामों में यह दर कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। यानी हैलुसिनेशन का जोखिम टास्क की प्रकृति पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है, इसलिए किसी एक फिक्स नंबर पर भरोसा करने के बजाय हमेशा टास्क के हिसाब से सतर्क रहना जरूरी है।

AI Hallucination से कैसे बचें
कुछ आसान तरीके इसका जोखिम काफी हद तक कम कर सकते हैं:
जहां संभव हो, वेब सर्च या भरोसेमंद डेटा सोर्स से जुड़े AI टूल का इस्तेमाल करें
महत्वपूर्ण तथ्य, आंकड़े और कोटेशन को हमेशा किसी असली सोर्स से क्रॉस-चेक करें
कानूनी, मेडिकल या फाइनेंशियल जानकारी के लिए AI के जवाब को अंतिम सच न मानें
प्रॉम्प्ट में साफ बताएं कि अगर जानकारी पक्की न हो तो मॉडल “पता नहीं” कहे
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. AI Hallucination क्या है?
यह तब होता है जब AI मॉडल गलत तथ्य, आंकड़ा या रेफरेंस पूरे भरोसे के साथ बना देता है।
2. क्या यह जानबूझकर किया गया झूठ होता है?
नहीं, यह मॉडल के जवाब जनरेट करने की प्रोसेस का साइड-इफेक्ट है, जानबूझकर धोखा देने की कोशिश नहीं।
3. क्या रीजनिंग मॉडल कम हैलुसिनेट करते हैं?
हमेशा नहीं, कई बार गहराई से सोचने वाले मॉडल सामान्य मॉडल से भी ज्यादा गलतियां कर सकते हैं।
4. वेब सर्च से क्या फर्क पड़ता है?
वेब सर्च या भरोसेमंद डेटा सोर्स से जुड़े होने पर हैलुसिनेशन की दर काफी कम हो जाती है।
5. कानूनी या मेडिकल काम में AI पर कितना भरोसा करें?
संवेदनशील क्षेत्रों में AI के जवाब को हमेशा किसी विशेषज्ञ या असली सोर्स से जरूर वेरिफाई करें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

