केरल के वायनाड जिले में एक बार फिर भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। जिले के कल्लाडी क्षेत्र में सुरंग (टनल) निर्माण परियोजना के पास अचानक भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें खिसकने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के लापता होने की आशंका है।
हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य अग्निशमन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। लगातार हो रही बारिश और अस्थिर पहाड़ी इलाके के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वायनाड में सुरंग निर्माण स्थल पर हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा वायनाड के अनाक्कमपोयिल–कल्लाडी–मेप्पाडी ट्विन टनल रोड परियोजना के निर्माण स्थल पर हुआ। सुबह के समय अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और निर्माण मलबा नीचे आ गिरा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। कई वाहन भी मलबे में दब गए और आसपास का इलाका पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
वायनाड हादसे में तीन की मौत, कई मजदूर अब भी लापता
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। कई मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं और आशंका है कि वे मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। कुछ घायलों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर
हादसे की सूचना मिलते ही NDRF, फायर एंड रेस्क्यू सर्विस, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है। बचाव दल ड्रोन, खोजी उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की सहायता से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि लगातार बारिश और फिसलन के कारण अभियान धीमी गति से चल रहा है।
भारी बारिश बनी बड़ी वजह
मौसम विभाग के अनुसार, वायनाड और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से लगातार भारी वर्षा हो रही है। इससे पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर हो गई थी और भूस्खलन का खतरा पहले से बना हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार वर्षा के कारण ढलानों की स्थिरता प्रभावित हुई, जिससे मलबा खिसकने की घटना हुई।
सरकार ने जताई चिंता
केरल सरकार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की कमी न रहने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा गया है और पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है।
वायनाड में’मानव निर्मित आपदा’ होने का आरोप
राज्य सरकार के कुछ प्रतिनिधियों ने प्रारंभिक तौर पर इस हादसे को “मानव निर्मित आपदा” बताया है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निकाले गए मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, जिससे भारी बारिश के दौरान ढलान अस्थिर हो गई और दुर्घटना हुई। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के संकेत दिए हैं।
2024 की त्रासदी की ताजा हुई यादें
इस हादसे ने वर्ष 2024 में वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन की यादें ताजा कर दी हैं। उस त्रासदी में सैकड़ों लोगों की जान गई थी और हजारों लोग प्रभावित हुए थे। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि पश्चिमी घाट के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।
वायनाड में स्थानीय लोगों में दहशत
घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले कुछ परिवारों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है। राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
निर्माण परियोजनाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण से पहले विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन, वर्षा के जोखिम का आकलन और मलबे के वैज्ञानिक प्रबंधन को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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वायनाड हादसे के जांच के आदेश
राज्य सरकार ने हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था और क्या पहले से जारी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
वायनाड में मलबा खिसकने की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के साथ सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन कितना आवश्यक है।
फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों को सुरक्षित निकालना है। लगातार बारिश के बीच बचाव दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, जबकि पूरे देश की नजर इस अभियान और जांच के नतीजों पर बनी हुई है।

