अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज‘ (पूर्व शीर्षक पंजाब 95) को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के आधार पर ZEE5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया। यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत उठाया गया। फिल्म के हटने के बाद राजनीतिक दलों, फिल्म जगत और नागरिक समाज के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या है ‘ सतलुज ‘ फिल्म का पूरा मामला?
फिल्म ‘सतलुज’ का निर्माण निर्देशक हनी त्रेहान ने किया है। यह फिल्म मूल रूप से ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर किया था।
फिल्म 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए भेजी गई थी, लेकिन बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 संशोधनों को स्वीकार नहीं किए जाने के कारण इसकी रिलीज लंबे समय तक अटक गई। बाद में निर्माताओं ने इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा और इसे बिना कट के OTT प्लेटफॉर्म पर जारी कर दिया।
सरकार ने क्यों हटवाई फिल्म ‘ सतलुज ‘?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिल्म के OTT पर उपलब्ध होने की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने ZEE5 को इसे हटाने का निर्देश दिया। सरकार का कहना है कि फिल्म से जुड़े कुछ पहलुओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना गया।
सूत्रों के मुताबिक, OTT प्लेटफॉर्म भले ही CBFC के प्रत्यक्ष प्रमाणन दायरे में नहीं आते हों, लेकिन उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत निर्धारित दायित्वों का पालन करना होता है। इसी आधार पर फिल्म हटाने का निर्देश दिया गया।
IT Rules 2021 क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में OTT सामग्री का नियमन आईटी नियम, 2021 के तहत किया जाता है। इन नियमों में डिजिटल प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री के प्रति सावधानी बरतने के लिए कहा गया है जो—
-भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करे।
– राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करे।
– सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की आशंका पैदा करे।
– हिंसा या सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे।
यदि सरकार को लगता है कि कोई सामग्री इन मानकों का उल्लंघन कर सकती है, तो वह संबंधित प्लेटफॉर्म को आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।
ZEE5 का फिल्म को लेकर बयान
फिल्म हटाए जाने के बाद ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ‘सतलुज’ को भारत में अगली सूचना तक उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह फिल्म और उसके निर्माताओं के साथ खड़ा है तथा कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं के अनुरूप दर्शकों तक फिल्म को फिर से पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार करेगा।
दिलजीत दोसांझ की ‘ सतलुज ‘ फिल्म पर प्रतिक्रिया
फिल्म के मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि फिल्म को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ दर्शकों तक फिल्म पहुंचने में सफल रही।
हालांकि उन्होंने किसी सरकारी एजेंसी पर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म की यात्रा शुरू से ही चुनौतीपूर्ण रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने इसे इतिहास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया, जबकि अन्य ने सरकार से फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग की।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया कि निर्णय केवल सुरक्षा संबंधी आकलन के आधार पर लिया गया है और इसका उद्देश्य किसी ऐतिहासिक विमर्श को दबाना नहीं है।
सतलुज ‘ फिल्म क्यों रही विवादों में?
‘सतलुज’ अपने निर्माण के समय से ही चर्चा में रही। फिल्म को पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किए जाने की योजना थी, लेकिन प्रमाणन संबंधी विवादों के कारण इसकी रिलीज बार-बार टलती रही।
निर्माताओं का दावा था कि फिल्म में मांगे गए संशोधन अत्यधिक थे, जबकि नियामक पक्ष का कहना था कि कुछ दृश्य और संवाद संवेदनशील थे। इसी विवाद के बीच फिल्म को नए नाम के साथ OTT पर जारी किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
यह मामला एक बार फिर उस बहस को सामने ले आया है जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा होती रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता जैसे मुद्दों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
वहीं फिल्म निर्माताओं और कलाकारों का मानना है कि ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों को देखने और समझने का अवसर दर्शकों को मिलना चाहिए, बशर्ते वे कानून का उल्लंघन न करें।
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अब आगे क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार, सरकार फिल्म की सामग्री की समीक्षा के लिए आगे की प्रक्रिया पर विचार कर रही है। यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद भविष्य में फिल्म की उपलब्धता को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल भारत में फिल्म की स्ट्रीमिंग रोक दी गई है, जबकि इससे जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा जारी है।
निष्कर्ष
दिलजीत दोसांझ अभिनीत ‘सतलुज’ को ZEE5 से हटाए जाने का मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल कंटेंट के नियमन, राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है।
सरकार ने अपने निर्णय को सुरक्षा कारणों और आईटी नियमों के अनुपालन से जोड़ा है, जबकि फिल्म से जुड़े पक्ष और कई राजनीतिक दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला डिजिटल मीडिया नियमन और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ी नीतियों पर व्यापक चर्चा का आधार बन सकता है।

