महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसी बीच मुंबई और पुणे के बीच चलने वाली रेल सेवाओं को बड़ा झटका लगा है। करजत-लोनावला के भोर घाट (Bhor Ghat) सेक्शन में कई स्थानों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने के कारण मध्य रेलवे को इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
घटना के बाद कई एक्सप्रेस और इंटरसिटी ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट और आंशिक रूप से संचालित किया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुंबई रूट पर देर रात हुआ भूस्खलन
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण करजत-लोनावला घाट सेक्शन में ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल के बीच देर रात भूस्खलन हुआ। पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर रेलवे ट्रैक पर आ गए, जिससे अप और मिडिल लाइन प्रभावित हो गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने तुरंत इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी।
मुंबई पुणे रूट तीनों रेल लाइनों पर पड़ा असर
भोर घाट सेक्शन मुंबई-पुणे रेल मार्ग का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। यहां अप लाइन, डाउन लाइन और मिडिल लाइन—तीनों पर ट्रेनों का संचालन होता है। भूस्खलन के कारण इन लाइनों पर परिचालन प्रभावित हुआ और रेलवे को कई ट्रेनों का मार्ग बदलना पड़ा।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाते, तब तक सामान्य रेल संचालन बहाल नहीं किया जाएगा।
मुंबई रूट पर 16 ट्रेनें रद्द, कई का मार्ग बदला
भूस्खलन के बाद मध्य रेलवे ने मुंबई और पुणे के बीच चलने वाली कम से कम 16 ट्रेनों को रद्द कर दिया। वहीं नौ से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया।
रद्द होने वाली प्रमुख ट्रेनों में डेक्कन क्वीन, डेक्कन एक्सप्रेस, इंद्रायणी एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, प्रगति एक्सप्रेस और सिंहगढ़ एक्सप्रेस जैसी लोकप्रिय सेवाएं शामिल हैं। कई अन्य ट्रेनों को आंशिक रूप से चलाया गया या उनके प्रस्थान समय में बदलाव किया गया।
यात्रियों को भारी परेशानी
मुंबई-पुणे रेल मार्ग देश के सबसे व्यस्त इंटरसिटी रेल कॉरिडोर में से एक है। प्रतिदिन हजारों यात्री नौकरी, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
ट्रेनें रद्द होने और देरी से चलने के कारण रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। कई लोगों को अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी, जबकि कुछ यात्रियों ने वैकल्पिक मार्गों का सहारा लिया।रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें।
रेलवे की राहत और बहाली की कार्रवाई
भूस्खलन की सूचना मिलते ही रेलवे के इंजीनियरिंग, ट्रैक मेंटेनेंस और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंच गए। जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों की मदद से ट्रैक पर गिरे मलबे और चट्टानों को हटाने का कार्य शुरू किया गया।
रेलवे अधिकारी लगातार ट्रैक की स्थिरता का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे किसी प्रकार का खतरा न हो। ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही रेल सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा।
मुंबई सड़क मार्ग भी प्रभावित
केवल रेलवे ही नहीं, बल्कि भारी बारिश का असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। भूस्खलन और जलभराव के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे तथा पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर भी कई स्थानों पर यातायात रोकना पड़ा।
प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम सामान्य होने तक सावधानी बरतने की अपील की है।
IMD का रेड अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना रहेगा।
प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।
मुंबई में मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
करजत-लोनावला का भोर घाट पश्चिमी घाट का पहाड़ी इलाका है, जहां मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा होती है। लगातार बारिश से पहाड़ियों की मिट्टी ढीली हो जाती है और बड़े-बड़े पत्थर तथा मलबा रेलवे ट्रैक और सड़कों पर गिरने लगता है।
यही कारण है कि हर वर्ष मानसून के दौरान इस सेक्शन में विशेष निगरानी रखी जाती है। इसके बावजूद अत्यधिक वर्षा के समय अचानक भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आ जाती हैं।
रेलवे ने जारी की एडवाइजरी
मध्य रेलवे ने यात्रियों के लिए हेल्पलाइन और सूचना सेवाएं सक्रिय कर दी हैं। यात्रियों से कहा गया है कि वे रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते रहें।रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और केवल ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही परिचालन सामान्य किया जाएगा।
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अब आगे क्या?
फिलहाल रेलवे ट्रैक से मलबा हटाने और सुरक्षा निरीक्षण का कार्य जारी है। मौसम की स्थिति में सुधार होने के बाद रेल सेवाएं चरणबद्ध तरीके से बहाल की जाएंगी। रेलवे प्रशासन समय-समय पर ट्रेनों की नई सूची और यात्रा संबंधी अपडेट जारी कर रहा है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
निष्कर्ष
मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर करजत-लोनावला घाट सेक्शन में हुए भूस्खलन ने एक बार फिर मानसून के दौरान पश्चिमी घाट की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। लगातार बारिश के कारण रेल और सड़क—दोनों यातायात प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे और प्रशासन राहत एवं बहाली के कार्य में जुटे हैं, जबकि मौसम विभाग ने अगले कुछ समय तक सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचे और समय रहते चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी बनाना आवश्यक है।

