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Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका की खारिज, कांग्रेस को लगा झटका

Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: कांग्रेस पार्टी को आज उस वक्त बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने यह याचिका अनुच्छेद 329 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप पर संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कह दिया कि इस मामले में राहत चुनाव याचिका के जरिए मिल सकती है, सुप्रीम कोर्ट में नहीं।

Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?

मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं जो छात्र राजनीति से संसद तक का सफर तय कर चुकी हैं और राहुल गांधी के करीबी सहयोगियों में गिनी जाती हैं। 23 जुलाई 1973 को मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में जन्मी मीनाक्षी ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से बायोकेमिस्ट्री में परास्नातक और कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की है।

उन्होंने 1998 में NSUI से राजनीतिक सफर शुरू किया, सोनिया गांधी को दिल्ली में एक भाषण से प्रभावित किया और 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। 2009 में उन्होंने मंदसौर लोकसभा सीट से एक ऐसे BJP दिग्गज को 30,000 से अधिक वोटों से हराया जो 1971 से उस सीट पर काबिज था, हालांकि 2014 और 2019 में वे यह सीट नहीं जीत सकीं। फरवरी 2025 में उन्हें तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी का AICC प्रभारी नियुक्त किया गया।

Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: नामांकन क्यों हुआ रद्द?

पूरे मामले की शुरुआत 9 जून 2026 को हुई। रिटर्निंग ऑफिसर और मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने 9 जून को मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) का नामांकन पत्र रद्द कर दिया। रद्द करने का कारण था- हलफनामे में एक अहम जानकारी छुपाना।

रिटर्निंग ऑफिसर का कहना था कि नटराजन ने फॉर्म 26 में दाखिल अपने शपथपत्र में तेलंगाना की एक अदालत में उनके खिलाफ दर्ज एक निजी आपराधिक शिकायत का उल्लेख नहीं किया, जबकि उन्हें उस मामले में समन मिल चुका था। रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म 26 में एक अदालती शिकायत का ब्योरा छोड़कर अपना शपथपत्र अधूरा प्रस्तुत किया।

एक मध्यप्रदेश विधानसभा अधिकारी के अनुसार, BJP उम्मीदवार महेश केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर को शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में दर्ज मामले का जिक्र नहीं किया। इस शिकायत के आधार पर जांच हुई और उनका नामांकन निरस्त घोषित कर दिया गया।

नामांकन रद्द (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि उनकी नेता के साथ उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। नटराजन ने इस फैसले को “मनमाना और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन” करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने उनकी पैरवी की। सिंघवी ने दलील दी कि नामांकन रद्द करने में “स्पष्ट और प्रत्यक्ष” गलती हुई है, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।

Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान पीठ ने स्वयं सिंघवी से पूछा, “चाहे फैसला कितना भी गलत क्यों न हो, एक बार नामांकन रद्द (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) हो जाने के बाद राहत आमतौर पर दूसरे रास्ते से मिलती है। क्या इस अदालत का कोई ऐसा फैसला है जहां हमने इस स्तर पर हस्तक्षेप किया हो?” पीठ ने कहा कि अगर अदालत कुछ मामलों में अनुच्छेद 32 या 226 के तहत दखल दे और बाकी मामलों को चुनाव याचिका के लिए छोड़ दे, तो वह अनुच्छेद 329 में जो नहीं लिखा वो खुद जोड़ रही होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी व्याख्या को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता जो कुछ मामलों में अदालत को हस्तक्षेप करने दे और कुछ को चुनाव न्यायाधिकरण के पास भेजे। कोर्ट ने याचिका (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) को अनुच्छेद 329 के तहत गैर-पोषणीय मानते हुए खारिज किया और स्पष्ट किया कि उसने मामले की गुणवत्ता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

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क्या है अनुच्छेद 329?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 329 (Meenakshi Natarajan Plea Dimissed) अदालतों को चुनावी मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकता है ताकि चुनाव प्रक्रिया बिना न्यायिक विलंब के आगे बढ़ती रहे। अनुच्छेद 329(b) यह प्रावधान करता है कि संसद के किसी भी सदन या राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के चुनाव को केवल चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है, न कि सामान्य अपील या रिट याचिका के जरिए। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने में असमर्थता जताई।

कोर्ट ने नटराजन को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी। यानी उनका रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन अभी के लिए राज्यसभा का रास्ता जरूर बंद हो गया। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से BJP के तीनों उम्मीदवार गुरुवार को ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके हैं। यानी व्यावहारिक रूप से यह लड़ाई खत्म हो चुकी है।

तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा कि सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने खिलाफ दर्ज मामलों और संपत्तियों की पूरी जानकारी देनी होती है और नटराजन को उस मामले की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इसे छुपाया। राव ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है और इसका पालन करना अनिवार्य है।

Meenakshi Natarajan Plea Dimissed: निष्कर्ष

यह पूरा मामला एक अहम सवाल उठाता है, क्या उम्मीदवार हलफनामे में किसी भी जानकारी को छुपा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अदालत चुनावी प्रक्रिया के बीच में दखल नहीं देगी। कांग्रेस के लिए यह मध्यप्रदेश में एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी पराजय है। मीनाक्षी नटराजन के पास अब हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है, लेकिन इस राज्यसभा चुनाव में उनकी दावेदारी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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