DEHRADUN PANACEA HOSPITAL: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित पैनेसिया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। एक बुजुर्ग महिला मरीज की मौत और कई लोगों के घायल होने की इस घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग ने मामले को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जोड़ते हुए उत्तराखंड के मुख्य सचिव और देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को औपचारिक नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
DEHRADUN PANACEA HOSPITAL: अस्पताल में एसी शॉर्ट सर्किट से भड़की थी आग
यह हादसा 20 मई 2026 की सुबह करीब 9:35 बजे देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित पैनेसिया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुआ था। प्रारंभिक जांच के अनुसार आईसीयू में लगे एयर कंडीशनर (AC) यूनिट में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी ब्लास्ट के कारण आग भड़क उठी।
कुछ ही मिनटों में आईसीयू सहित अस्पताल के अन्य हिस्सों में घना और दमघोंटू धुआं फैल गया, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय अस्पताल में कुल 14 मरीज भर्ती थे, जिनमें कई गंभीर मरीज आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ द्वारा राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाए गए मरीज, लेकिन एक महिला की मौत
दमकल विभाग के अनुसार, रेस्क्यू टीमें सूचना मिलने के लगभग 7 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंच गई थीं। बचाव दल ने मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर शहर के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया। हालांकि इस दौरान आईसीयू में भर्ती 66 वर्षीय वीरवती देवी की दम घुटने से मृत्यु हो गई।
वीरवती देवी देहरादून के बलीवाला-कनवाली क्षेत्र की निवासी थीं और उन्हें एक दिन पहले ही DEHRADUN PANACEA HOSPITAL में भर्ती कराया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार उनकी मौत आग से झुलसने के बजाय अत्यधिक धुआं अंदर जाने के कारण हुई। इस अग्निकांड में कुल 16 लोग घायल हुए, जिनमें अस्पताल स्टाफ, मरीज और राहत कार्य में जुटे तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
NHRC ने सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि किसी अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण मरीज की जान जाती है, तो यह एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना जाएगा। आयोग ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था और हादसे के समय आपातकालीन व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी थीं।
अस्पताल प्रबंधन पर एफआईआर, रजिस्ट्रेशन निरस्त
DEHRADUN PANACEA HOSPITAL घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि अस्पताल में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था।
पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही से मौत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और अग्निशमन विभाग की संयुक्त जांच टीम ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करते हुए पूरे परिसर को सील कर दिया है।

राज्यभर में फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश
उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने DEHRADUN PANACEA HOSPITAL घटना का निरीक्षण करने के बाद मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी देहरादून को हादसे की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
साथ ही राज्य सरकार ने भविष्य में DEHRADUN PANACEA HOSPITAL की तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उत्तराखंड के सभी निजी अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी संस्थानों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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