DEHRADUN SEX RACKET: राजधानी देहरादून के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत किशननगर एक्सटेंशन में एक निजी स्कूल के ठीक पीछे संचालित हो रहे देह व्यापार के एक बड़े अड्डे का पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय पार्षद नंदिनी शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों का वीडियो वायरल करने और हिंदू रक्षा दल की शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई।
कैंट थाना पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की संयुक्त टीम ने मंगलवार को मौके पर छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन युवतियों को रेस्क्यू किया गया है। मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।
DEHRADUN SEX RACKET का कैसे हुआ खुलासा?
स्थानीय लोगों को पिछले कुछ समय से स्कूल के पीछे स्थित एक कमरे में अलग-अलग लड़कियों और युवकों का संदिग्ध रूप से आना-जाना (DEHRADUN SEX RACKET) दिखाई दे रहा था। इस पर पार्षद नंदिनी शर्मा ने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
इसके साथ ही स्थानीय निवासियों ने इसकी सूचना हिंदू रक्षा दल को भी दी। हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष ललित शर्मा के अनुसार, उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की पुष्टि की और तत्काल पुलिस के उच्चाधिकारियों को सूचित किया।
सीओ सिटी स्वप्निल मुयाल के नेतृत्व में पुलिस ने जब उस कमरे पर औचक छापा मारा, तो वहां दो व्यक्ति और तीन लड़कियां आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए। मौके पर जमीन पर कंडोम के पैकेट, शराब की बोतलें, पानी की बोतलें और चिप्स के पैकेट बिखरे पड़े थे।

DEHRADUN SEX RACKET के आरोपियों की पहचान
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान आशीष कुमार पांडे और जंग बहादुर के रूप में हुई है। आशीष पांडे राजस्थान के जयपुर स्थित वैशाली नगर का निवासी है, जबकि जंग बहादुर भी जयपुर की जनता कॉलोनी का रहने वाला है। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मुख्य आरोपी आशीष पांडे पहले भी अनैतिक देह व्यापार के मामले में जेल जा चुका है।
युवतियों को अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर देहरादून बुलाते थे
सीओ सिटी स्वप्निल मुयाल ने बताया कि ये आरोपी बाहरी राज्यों से भोली-भाली महिलाओं और युवतियों को अच्छी नौकरी दिलाने या कंपनियों में काम देने का झांसा देकर देहरादून बुलाते थे। जब युवतियां यहां आ जाती थीं, तो वे उनकी आर्थिक मजबूरियों का फायदा उठाते थे।
एक पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने नौकरी का झांसा देकर उसे बुलाया, फिर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और इसका वीडियो भी बना लिया। इसके बाद वह उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करते हुए उससे जबरन देह व्यापार (DEHRADUN SEX RACKET) करवाता था।
वहीं, मेघालय की एक अन्य महिला ने बताया कि उसका बॉयफ्रेंड उसे यहां लेकर आया था और फिर पैसे व शराब का लालच देकर उसे इस गंदे धंधे में धकेल दिया।
स्कूल परिसर का इस्तेमाल ताकि किसी को शक न हो
DEHRADUN SEX RACKET की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि यह एक निजी स्कूल के ठीक पीछे के हिस्से में किराए के कमरे में चलाया जा रहा था। पुलिस और आसपास के लोगों को शक न हो, इसके लिए दिनभर स्कूल में नियमित रूप से कक्षाएं चलती थीं।
हिंदू रक्षा दल के ललित शर्मा ने बताया कि स्कूल में बच्चों के शोर-शराबे और लोगों के सामान्य आने-जाने का फायदा उठाकर इन आरोपियों ने शिक्षा के मंदिर को अपनी अय्याशी का अड्डा बना लिया था, ताकि किसी का ध्यान उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर न जाए।

बिना सत्यापन के रह रहे थे आरोपी
पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि इन लोगों ने करीब छह महीने पहले मकान मालिक से यह कमरा किराए पर लिया था। हालांकि, मकान मालिक ने इन किराएदारों का कोई पुलिस सत्यापन (वेरिफिकेशन) नहीं करवाया था। इन लोगों के वहां रहने की जानकारी न तो स्थानीय पुलिस को थी और न ही नगर निगम के पास इसका कोई रिकॉर्ड था।
DEHRADUN SEX RACKET का मास्टरमाइंड कोई और है?
DEHRADUN SEX RACKET मामले में हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष ललित शर्मा ने एक गंभीर दावा किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जिन दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, वे महज नौकर या मददगार हैं। उनका आरोप है कि इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालक (मास्टरमाइंड) एक मुस्लिम युवक है, जो अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
शर्मा के अनुसार, वही युवक बाहरी राज्यों से हिंदू लड़कियों को काम का झांसा देकर बुलाता था और फिर उनका शोषण कर इस गंदे धंधे में धकेलता था। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मास्टरमाइंड को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और साथ ही उस स्कूल संचालक के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी नाक के नीचे यह सब चल रहा था।
आगे की कार्रवाई
देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के निर्देश पर पुलिस ने मौके से एक स्विफ्ट कार भी बरामद कर सीज कर दी है। दोनों गिरफ्तार आरोपियों (आशीष पांडे और जंग बहादुर) के खिलाफ कैंट कोतवाली में अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट) की धाराओं 3, 4, 5, 6 और 7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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