RISHIKUL HARIDWAR RESEARCH INSTITUTE: आज सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान सीएम धामी ने हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार योजनाओं की समीक्षा की।
राज्य सरकार की मंशा इस संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की है। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए कि संस्थान के पुनरुद्धार का काम तुरंत शुरू किया जाए और KUMBH MELA 2027 से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
RISHIKUL HARIDWAR RESEARCH INSTITUTE का होगा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से ऋषियों की भूमि और ज्ञान-विज्ञान का केंद्र रहा है। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिए कि RISHIKUL HARIDWAR RESEARCH INSTITUTE परियोजना की प्रगति की निगरानी के लिए हर 15 दिन में समीक्षा बैठक की जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संस्थान के विकास में राज्य की सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई दे और सभी 13 जिलों की लोक कलाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक रिसर्च का संगम
RISHIKUL HARIDWAR संस्थान को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि प्राचीन भारतीय विज्ञान को आधुनिक शोध के साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत:
- वैदिक गणित, खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान पर विशेष शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन, तर्कशास्त्र और जीवन मूल्यों पर आधारित अध्ययन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण, ई-लर्निंग, आधुनिक लैब और समृद्ध लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पांच हिस्सों में विकसित होगा पूरा परिसर
RISHIKUL HARIDWAR परियोजना को पांच प्रमुख केंद्रों के रूप में तैयार किया जाएगा:
- श्रुति केंद्र – वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान के संरक्षण और अध्ययन के लिए
- दर्शन केंद्र – भारतीय दर्शन और चेतना के गहन अध्ययन के लिए
- आयु केंद्र – आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों के लिए
- विज्ञान केंद्र – पारंपरिक भारतीय विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के लिए
- कला केंद्र – भारतीय कला और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रदर्शन के लिए
पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि RISHIKUL HARIDWAR द्वारा प्राचीन भारत के जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर युवाओं तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, विनय शंकर पांडेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि हरिद्वार के जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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