UTTARAKHAND WEATHER ALERT: देहरादून में मौसम विज्ञान केंद्र ने उत्तराखंड के लिए 7 दिनों का जनपद-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। एक तरफ जहां प्रदेश के मैदानी इलाकों में उच्च तापमान और हीट वेव की स्थिति बन रही है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में आंधी, बिजली और तेज बारिश का खतरा है।
मैदान में गर्मी, पहाड़ों में चलेगी आंधी-बिजली
25 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा और नैनीताल जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने का अनुमान है।
26 अप्रैल को चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और 30-40 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने का अनुमान है।
28 अप्रैल को कुमायूं क्षेत्र के पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि, तेज से अति तेज बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। शेष पर्वतीय क्षेत्रों में भी तेज से अति तेज बारिश और झोंकेदार हवाओं की संभावना है। मैदानी इलाकों में भी कहीं-कहीं गर्जन के साथ बिजली और झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
29 अप्रैल को UTTARAKHAND WEATHER ALERT के अनुसार उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बिजली, ओलावृष्टि, तेज से अति तेज बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।

UTTARAKHAND WEATHER ALERT: 7 दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान
25 अप्रैल को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गर्जन के साथ 4400 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। शेष पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मैदानी जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
26 और 27 अप्रैल को पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा और 4400 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। मैदानी जनपदों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
28 और 29 अप्रैल28 अप्रैल को बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जनपदों में अनेक स्थानों पर और शेष पर्वतीय जनपदों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और 4400 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। मैदानी इलाकों में भी हल्की बारिश हो सकती है।
29 अप्रैल को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और 4000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। शेष जनपदों में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
30 अप्रैल को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। शेष जनपदों में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
1 मई को UTTARAKHAND WEATHER ALERT के अनुसार पर्वतीय जनपदों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना है। मैदानी जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश हो सकती है।
मैदानी इलाकों में हीट वेव का खतरा
25 और 26 अप्रैल को उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में उच्च अधिकतम तापमान के कारण हीट रैश, हीट क्रैम्प्स, हीट थकावट या हीट स्ट्रोक जैसी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। सामान्य से अधिक तापमान और शुष्क मौसम के कारण पौड़ी, देहरादून और टिहरी जिलों में जंगल में आग लगने की परिस्थितियां अनुकूल बताई गई हैं। उच्च तापमान के संपर्क में आने से निर्जलीकरण का खतरा भी है।
28 और 29 अप्रैल को कहीं-कहीं बिजली गिरने से जान-माल को नुकसान, ओलावृष्टि से बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान तथा खुले स्थानों पर ओलावृष्टि से लोगों और मवेशियों के घायल होने की आशंका है। बहुत तेज बारिश के कारण पहाड़ और खड़ी पहाड़ियों में तेजी से अपवाह पैदा हो सकता है।

मौसम विभाग की अहम सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि-
- 25 और 26 अप्रैल को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर के अंदर रहें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, हल्के रंग के ढीले और छिद्रयुक्त सूती कपड़े पहनें।
- धूप में बाहर जाते समय सुरक्षात्मक चश्मा और छाता या टोपी का प्रयोग करें।
- किसानों को सलाह दी गई है कि फसलों को बचाने के लिए नियमित रूप से सिंचाई करें।
- 28 और 29 अप्रैल के लिए विभाग ने कहा है कि गर्जन और बिजली के दौरान घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
- पेड़ के नीचे शरण न लें और वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर पार्क करें।
- भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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