HomeLatest Newsदेहरादून के MAA DAAT KALI TEMPLE में PM मोदी करने वाले हैं...

देहरादून के MAA DAAT KALI TEMPLE में PM मोदी करने वाले हैं दर्शन, जानिए क्यों इतना खास है ये मंदिर?

MAA DAAT KALI TEMPLE: देवभूमि उत्तराखंड को पूरी देश-दुनिया में देवताओं की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां सैकड़ों प्राचीन और पौराणिक मंदिर हैं, जिनकी मान्यताएं और चमत्कार लोगों की आस्था का केंद्र हैं। इन्हीं मंदिरों में से एक है देहरादून का DAAT KALI TEMPLE एक ऐसा सिद्धपीठ जहां 220 से भी अधिक वर्षों से अखंड ज्योति और हवन कुंड जल रहे हैं।

यह मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ साथ अपनी मान्यताओं, परंपराओं और चमत्कारी कथाओं के लिए भी जाना जाता है। वर्तमान समय में धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर आधुनिक विकास की कहानियों का भी साक्षी बन रहा है। हाल ही में बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पूर्व माँ डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।

कहां है DAAT KALI TEMPLE?

DAAT KALI TEMPLE DEHRADUN शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर DELHI DEHRADUN EXPRESSWAY पर स्थित है। यह मंदिर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर है। मंदिर के चारों ओर जंगल से घिरा शांत वातावरण है, चारों तरफ हरे-भरे पेड़-पौधे हैं और प्रकृति की अनुपम छटा देखने को मिलती है। हाईवे के ठीक किनारे स्थित होने के कारण जो भी यात्री यहां से गुजरता है, वह दर्शन किए बिना आगे नहीं बढ़ता है।

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में काली माता की काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है, जो अत्यंत भव्य और दिव्य दिखाई देती है। इसी प्रतिमा के ठीक सामने अखंड ज्योति और हवन कुंड जल रहा है, जो दशकों से जल रहा है।

DAAT KALI TEMPLE
DAAT KALI TEMPLE

DAAT KALI TEMPLE का इतिहास और स्थापना की अद्भुत कहानी

DAAT KALI TEMPLE की स्थापना 30 जून, 1804 को हुई थी। यह उसी समय की बात है जब अंग्रेजी हुकूमत के दौरान देहरादून–सहारनपुर राजमार्ग का निर्माण कार्य जारी था। इसी परियोजना के तहत मंदिर के समीप एक सुरंग बनाई जानी थी, लेकिन इसके निर्माण में लगातार एक अनोखी और रहस्यमयी रुकावट सामने आने लगी।

कहा जाता है कि मजदूर दिन भर जितनी खुदाई करते, रात होते-होते उतनी ही सुरंग दोबारा पहाड़ी मलबे से भर जाती थी। यह क्रम लंबे समय तक चलता रहा, जिससे निर्माण कार्य में लगे लोग काफी परेशान हो गई। तभी एक रात महंत के पूर्वजों को स्वप्न में दैवीय संकेत मिला। सपने में निर्देश दिया गया कि जंगल के भीतर स्थित एक मंदिर से एक शिला लाकर सुरंग के पास स्थापित की जाए, तभी यह बाधा समाप्त होगी।

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, सुरंग निर्माण से जुड़े इंजीनियर को भी सपने में मां डाट काली के दर्शन हुए। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर सुरंग बन रही है, वहीं उनकी मूर्ति दबकर रह गई है। यदि उस मूर्ति को बाहर निकालकर सड़क किनारे स्थापित किया जाए, तो निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाएगा। इसके बाद इंजीनियर ने वह मूर्ति महंत सुखबीर गुसाईं को सौंप दी और उनके मार्गदर्शन में मंदिर का निर्माण कराया गया।

इसके बाद सुरंग का काम बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इस अद्भुत घटना के बाद वर्ष 1804 में मां डाट काली की विधिवत स्थापना की गई। उसी समय से यहां अखंड ज्योति और हवन कुंड प्रज्वलित किए गए, जो आज भी 220 से अधिक वर्षों से निरंतर जलते चले आ रहे हैं।

DAAT KALI TEMPLE
DAAT KALI TEMPLE

DAAT KALI TEMPLE के नाम और लोकेशन से जुड़ी मान्यताएं

DAAT KALI TEMPLE के नाम और उसकी पहचान से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी सुनी-सुनाई जाती है। मंदिर के महंत रमन प्रसाद गोस्वामी के अनुसार, भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले इस मंदिर को मां घाटे वाली देवी के नाम से जाना जाता था। लेकिन वर्ष 1804 में जब मंदिर के पास सुरंग का निर्माण हुआ, तो इसके बाद इसका नाम बदलकर डाट काली पड़ गया। “डाट” शब्द का संबंध सुरंग के द्वार से है, और चूंकि यह मंदिर सुरंग के प्रवेश द्वार के पास स्थित है, इसलिए समय के साथ मंदिर को इसी नाम से पुकारा जाने लगा और यही नाम पूरे इलाके में प्रसिद्ध हो गया।

मंदिर के पास की सुरंग के इतिहास पर नजर डालें तो मंदिर की स्थापना के बाद ही इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और कुछ ही समय में यह तैयार भी हो गई। 1804 से लेकर 1936 तक यह सुरंग कच्ची ही रही। 1936 के बाद इसे पक्का बनाया गया था। वर्तमान समय में ये सुरंग देहरादून-सहारनपुर मार्ग का अहम हिस्सा बन चुकी है और कहा जाता है इसके दोनों ओर दो बहनों के मंदिर स्थित हैं।

DAAT KALI TEMPLE के पास ही उनकी बड़ी बहन मां भद्रकाली का मंदिर भी है। देहरादून से सहारनपुर की ओर जाते समय सुरंग से पहले मां भद्रकाली का मंदिर पड़ता है और सुरंग के बाद मां डाट काली का मंदिर है। सुरंग के दोनों ओर दोनों बहनों के मंदिर हैं। मान्यता है कि जब तक श्रद्धालु दोनों माताओं के दर्शन नहीं कर लेते, यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। इसलिए श्रद्धालु पहले मां डाट काली के दर्शन करते हैं और उसके बाद मां भद्रकाली के दर्शन कर अपने घर लौटते हैं।

WHY DAAT KALI TEMPLE IS FAMOUS?

देहरादून और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं और आस्थाएं प्रचलित हैं, जो सालों से लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई हैं और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इन्हें निभाते आ रहे हैं

  • नया वाहन की पूजा: देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में (temples in Dehradun) जब भी कोई व्यक्ति नया वाहन खरीदता है, तो वह सबसे पहले उसे लेकर मां डाट काली मंदिर पहुंचता है और विधिवत पूजा करवाता है। ऐसी मान्यता है कि मां की चुनरी वाहन में रखने से न सिर्फ वाहन सुरक्षित रहता है, बल्कि उसे चलाने वाले की भी रक्षा होती है। यही कारण है कि मंदिर परिसर के बाहर अक्सर नई गाड़ियों की लंबी कतारें पूजा के लिए लगी हुई दिखाई देती हैं।
  • नया काम शुरू करने पर: इसी तरह, जब कोई व्यक्ति नया व्यवसाय या किसी नए काम की शुरुआत करता है, तो वह यहां आकर मां के चरणों में पूजा-अर्चना करना नहीं भूलता। लोगों का विश्वास है कि मां का आशीर्वाद लेकर शुरू किया गया कार्य सफलता की ओर जरूर बढ़ता है।
  • नवविवाहित जोड़ों का आशीर्वाद: देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में यह भी एक परंपरा ये भी है कि शादी के बाद नवविवाहित जोड़ा मां डाट काली के दरबार में आकर आशीर्वाद लेता है, ताकि उनके वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।
  • नवजात शिशु को कराते हैं दर्शन: इसके अलावा, जब किसी घर में नवजात शिशु का जन्म होता है, तो परिवार के लोग उसे मां के दर्शन कराने मंदिर लेकर आते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की आशा में मंदिर परिसर में चुनरी बांधते हैं और जब उनकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वे दोबारा आकर उस चुनरी को खोलते हैं।
DAAT KALI TEMPLE
DAAT KALI TEMPLE

नवरात्रों में होता है मेले जैसा माहौल

मां डाट काली मंदिर में नवरात्रों के दौरान मेले जैसा माहौल बन जाता है। आमतौर पर रोजाना 500-1000 श्रद्धालुओं की संख्या नवरात्रों में हजारों तक पहुंच जाती है। इस दौरान श्रद्धालु मां के श्रृंगार के लिए तरह-तरह की सामग्री लेकर आते हैं। साथ ही आषाढ़ मास में भी मंदिर का वार्षिक उत्सव मनाया जाता है जिसमें धूमधाम से मेले का आयोजन होता है।

READ MORE:

HOW TO REACH DAAT KALI TEMPLE?

मां डाट काली मंदिर रोजाना सुबह करीब 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। यहां दर्शन (Daat Kali Mandir timing and darshan ) करने का सबसे अच्छा समय सुबह या फिर शाम की आरती का समय माना जाता है।

मंदिर तक पहुंचने की बात करें तो यहां इन तरीकों से पहुंचा जा सकता है-

  • हवाई मार्ग से: DAAT KALI TEMPLE के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट में है, जो यहां से लगभग 38.5 किलोमीटर की दूर है। दिल्ली और देश के कई शहरों से एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट्स उपलब्ध हैं, यहां से सड़क मार्ग से मंदिर तक पहुंचना आसान है।
  •  रेल मार्ग से: मंदिर से करीब 12.5 किलोमीटर दूर देहरादून रेलवे स्टेशन है। स्टेशन पर उतरते ही टैक्सी, बस या ऑटो की मदद से आराम से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग से: दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी से सड़क मार्ग के जरिए देहरादून जुड़ा हुआ है। इन शहरों से बस या टैक्सी लेकर सीधे मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

HARIDWAR VAISAKHI SNAN 2026 देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

DevbhoomiNews Desk
DevbhoomiNews Desk
Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
RELATED ARTICLES

Most Popular