Baby Rani Maurya Biography 2026: दलित बस्ती से आगरा की पहली महिला महापौर, राज्यपाल & योगी कैबिनेट मंत्री तक

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Baby Rani Maurya Biography
Baby Rani Maurya

आगरा की एक गरीब दलित बस्ती में पली-बढ़ी, एक ऐसी लड़की जिसके पिता Congress के वफादार पार्षद थे — और उसी बेटी ने BJP का झंडा थामकर आगरा की पहली महिला महापौर बनने से लेकर उत्तराखंड की राज्यपाल और उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया।

बेबी रानी मौर्य आज BJP की उन गिनी-चुनी दलित महिला नेताओं में हैं जिन्होंने ग्रासरूट वर्कर से शुरुआत करके संवैधानिक पद तक पहुंचीं। उनका राजनीतिक सफर न सिर्फ BJP की दलित outreach की कहानी है — बल्कि एक महिला के उस जज्बे की कहानी है जो 2007 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी नहीं टूटी।

Table of Contents

Baby Rani Maurya जीवनी

Here is the detailed biography of Baby Rani Maurya in a table format:-

विवरणजानकारी
पूरा नामबेबी रानी मौर्य
जन्म15 अगस्त 1956, आगरा, उत्तर प्रदेश
उम्र (2026)69 वर्ष
जातिजाटव (रविदासिया) — अनुसूचित जाति
शिक्षाMA, B.Ed. — आगरा विश्वविद्यालय (1979-80)
पार्टीभारतीय जनता पार्टी (BJP)
वर्तमान पदकैबिनेट मंत्री — महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, UP सरकार
विधानसभा क्षेत्रआगरा ग्रामीण (SC), 2022
जीत का अंतर76,608 वोट
पतिप्रदीप कुमार मौर्य (PNB Director/Advisory Board)
कुल संपत्ति₹2.9 करोड़ (2022 election affidavit)
Instagram@babyranimaurya

प्रारंभिक जीवन – आगरा की दलित बस्ती से शुरुआत

15 अगस्त 1956 को आगरा में जन्मी बेबी रानी मौर्य का बचपन आगरा की उन गलियों में बीता जहाँ चमड़े का व्यवसाय आजीविका का मुख्य साधन था। उनका परिवार जाटव (रविदासिया) समुदाय से था — वही समुदाय जो दशकों तक Mayawati और BSP का सबसे मजबूत वोट बैंक रहा।

पिता राम सिंह आगरा नगर निगम के पार्षद थे और Congress के वफादार कार्यकर्ता। उन्होंने दो बार चुनाव भी लड़ा। यह एक दिलचस्प विरोधाभास है — Congress के घर में पली बेटी आगे चलकर BJP का सबसे बड़ा दलित चेहरा बनी।

माता का नाम कुसुम देवी है। घर की आर्थिक स्थिति साधारण थी, लेकिन पिता की सामाजिक सक्रियता ने बेबी रानी के मन में सेवा और राजनीति का बीज बोया। वे खुद बताती हैं कि गरीब बस्ती का वो अनुभव — वहाँ की जरूरतें, वहाँ की तकलीफें — आज भी उनकी नीतियों की प्रेरणा है।

Baby Rani Maurya
प्रारंभिक जीवन — आगरा की दलित बस्ती से शुरुआत

शिक्षा और विवाह – BJP से जुड़ाव की कहानी

बेबी रानी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आगरा में ही पूरी की। 1979-80 में आगरा विश्वविद्यालय से M.A. और B.Ed. की डिग्री हासिल की — पढ़ाई में रुचि थी, आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी।

1990 के दशक की शुरुआत में उनका विवाह प्रदीप कुमार मौर्य से हुआ जो Punjab National Bank में उच्च अधिकारी थे। बाद में वे PNB के Director बने और अब Advisory Board के सदस्य हैं। उनके ससुर M.D. Maurya एक IPS अधिकारी थे।

BJP से जुड़ाव का रास्ता यहीं से खुला। पति के परिवार के BJP से पुराने संबंध थे। और एक बार जब बेबी रानी ने पार्टी का दरवाजा खटखटाया — तो वापस नहीं मुड़ीं।

1995 — आगरा की पहली महिला महापौर

यह बेबी रानी मौर्य की राजनीतिक जिंदगी का पहला बड़ा मोड़ था।

1995 में BJP को आगरा नगर निगम के Mayor चुनाव के लिए एक ऐसी candidate की जरूरत थी जो दलित समुदाय से हो, महिला हो और जनता से जुड़ी हो। बेबी रानी सबसे सटीक उम्मीदवार लगीं।

वे BJP ticket पर लड़ीं और बड़े margin से जीतीं। आगरा की पहली महिला महापौर बनीं और 1995 से 2000 तक इस पद पर रहीं।

महापौर रहते हुए उन्होंने:

  • शहर की सफाई व्यवस्था सुधारी
  • महिला कल्याण कार्यक्रम शुरू किए
  • नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया
  • सख्त प्रशासक के रूप में अपनी पहचान बनाई

तत्कालीन BJP Mayor of Agra Naveen Jain ने एक interview में बताया था कि बेबी रानी ने किसी भी नागरिक समस्या पर वरिष्ठ अधिकारियों को भी तलब करने से नहीं हिचकिचाया। अनुशासन और जवाबदेही — यही उनकी कार्यशैली थी।

Baby Maurya Political Career
बेबी रानी मौर्य – आगरा की पहली महिला महापौर

BJP SC Wing में काम – राम नाथ कोविंद के साथ

1997 में बेबी रानी मौर्य को BJP की Scheduled Caste Wing का office bearer बनाया गया।

यह भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। उनकी जिम्मेदारी थी उत्तर प्रदेश में SC communities तक BJP की पहुंच बढ़ाना — उसी Jatav community तक जो Mayawati का मुख्य वोट बैंक थी।

उस समय Ram Nath Kovind इस wing के Chairman थे — वही Ram Nath Kovind जो बाद में 2017 में भारत के 14वें राष्ट्रपति बने। बेबी रानी का उनके साथ काम करना एक महत्वपूर्ण political connection था।

राष्ट्रीय महिला आयोग से बढ़ते कदम

2001 — उत्तर प्रदेश State Social Welfare Board की सदस्य बनीं।

2002 से 2005National Commission for Women (राष्ट्रीय महिला आयोग) की सदस्य रहीं। यहाँ उन्होंने महिला सशक्तिकरण, महिला सुरक्षा और gender equality के मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर काम किया।

यह वो दौर था जब बेबी रानी एक local Mayor से एक national-level figure बन रही थीं। उनकी पहचान अब सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं रही थी।

2007 की हार — जो टूटने नहीं दी उन्हें

2007 में BJP ने उन्हें आगरा की Etmadpur विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।

चुनाव हुआ — और वे BSP के Narayan Singh Suman से narrowly हार गईं।

यह हार कोई छोटी बात नहीं थी। एक ऐसी नेता के लिए जो आगरा की पहली महिला महापौर रही हो, राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रही हो — विधानसभा चुनाव में हार एक बड़ा झटका था।

लेकिन बेबी रानी मौर्य यहाँ रुकी नहीं। 2013 से 2015 तक वे BJP द्वारा सौंपी गई state-level responsibilities निभाती रहीं। चुप रहकर काम करना — यही उनकी strategy थी।

2018 में उन्हें State Commission for Protection of Child Rights का सदस्य बनाया गया — और फिर वो खबर आई जिसने सबको चौंका दिया।

2018 – उत्तराखंड की 7वीं राज्यपाल

21 अगस्त 2018 को राष्ट्रपति Ram Nath Kovind ने — वही Kovind जिनके साथ वे BJP SC Wing में काम कर चुकी थीं — Baby Rani Maurya को उत्तराखंड का 7वां राज्यपाल नियुक्त किया।

26 अगस्त 2018 को देहरादून के Raj Bhavan में उन्होंने शपथ ली।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  • वे उत्तराखंड की दूसरी महिला राज्यपाल बनीं — पहली Margaret Alva थीं जो 2009 में नियुक्त हुई थीं
  • जब उनकी नियुक्ति तय हुई, तब वे अमेरिका में एक official visit पर थीं
  • उन्होंने Krishan Kant Paul का स्थान लिया जिनका कार्यकाल 8 जुलाई को समाप्त हो गया था

राज्यपाल के रूप में उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया।

COVID-19 pandemic (2020-21) के दौरान उन्होंने donation drives चलाए और जरूरतमंद परिवारों तक food और essentials पहुंचाए।

Baby Rani Maurya governor
बेबी रानी मौर्य – उत्तराखंड की 7वीं राज्यपाल

Governor पद से इस्तीफा – क्यों और कैसे?

8 सितंबर 2021 को बेबी रानी मौर्य ने उत्तराखंड के Governor पद से अपने कार्यकाल के दो साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति Kovind ने अगले ही दिन इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

आधिकारिक कारण “व्यक्तिगत” बताया गया। लेकिन राजनीतिक हलकों में बात थी कि वे सक्रिय चुनावी राजनीति में लौटना चाहती हैं।

Congress ने उनके इस्तीफे पर recruitment irregularity का आरोप लगाया — लेकिन इस संबंध में कोई formal charges नहीं थे और records voluntary departure confirm करते हैं।

5 सितंबर 2021 को उन्होंने Home Minister Amit Shah से दिल्ली में मुलाकात की — और उसके कुछ दिनों बाद इस्तीफा आया।

सितंबर 2021 में ही उन्हें:

  1. “The Great Indian Woman Award 2021” मिला
  2. BJP अध्यक्ष J.P. Nadda ने उन्हें BJP राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया

एक ही महीने में — Governor पद छोड़ा, award मिला और party में बड़ा पद। यह सब coincidence नहीं था।

2022 – MLA बनीं, योगी कैबिनेट में मंत्री

2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बेबी रानी मौर्य ने आगरा ग्रामीण (SC) सीट से चुनाव लड़ा।

नतीजा? BSP की Kiran Prabha Keshari को 76,608 वोटों के भारी अंतर से हराया। यह वो सीट थी जहाँ से Jatav community का समर्थन निर्णायक होता है — और बेबी रानी ने यह साबित कर दिया कि BJP में रहते हुए भी वे Jatav community की नेता हैं।

25 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की दूसरी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई।

उन्हें सौंपा गया — महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग।

यह विभाग उनके लिए बिल्कुल सही था। जो महिला खुद एक दलित बस्ती से उठी, जो National Commission for Women में काम कर चुकी थी — उसे महिला और बाल कल्याण का मंत्रालय मिलना meaningful था।

Yogi सरकार के 9 साल — March 2026 की ताजा उपलब्धियां

23 मार्च 2026 को Yogi Adityanath सरकार के 9 साल पूरे होने पर बेबी रानी मौर्य ने आगरा में एक press conference की।

उन्होंने अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं और कुछ fresh announcements कीं:

April 2026 से Anganwadi workers की honorarium बढ़ाई जाएगी। साथ ही उन्हें life insurance और safety insurance schemes से जोड़ा जाएगा।

अन्य प्रमुख बातें:

  • 1.90 लाख से अधिक Anganwadi centers को pre-schools में upgrade किया जा रहा है
  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख बेटियों की शादी हुई
  • उन्होंने कहा: “महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ नारा नहीं, जमीनी हकीकत है। UP की महिलाएं अब नौकरियाँ खोज ही नहीं रहीं, नई opportunities भी बना रही हैं।”

अप्रैल 2026 में उन्हें Womenpreneur Awards में सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।

“BJP की मायावती” – यह उपनाम कहाँ से आया?

India Today ने एक बार headline लिखी थी: “Why Baby Rani Maurya is BJP’s Mayawati” — और Financial Express ने लिखा: “BJP’s bet against Mayawati’s Jatav vote base.”

यह उपनाम इसलिए मिला क्योंकि:

Jatav community उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी SC sub-caste है और दशकों से BSP और Mayawati का सबसे solid वोट बैंक रही है। BJP के लिए UP में Jatav votes मिलना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही।

बेबी रानी मौर्य खुद Jatav हैं। उन्होंने Mayor से Governor तक का सफर तय किया — एक ऐसा journey जो Jatav community में यह संदेश देता है कि BJP में दलितों का सम्मान है।

Agra Rural जैसी SC reserved seat पर 76,000 से ज्यादा वोटों की जीत — यह दिखाती है कि यह strategy कुछ हद तक काम करती है।

हालांकि विश्लेषक यह भी कहते हैं कि Mayawati की Jatav community में जो trust है, वह एक ideology-based trust है — जिसे किसी एक नेता की appointment से replace करना आसान नहीं।

पुरस्कार और सम्मान

पुरस्कारसालविवरण
समाज रत्न1996सामाजिक कार्यों के लिए
उत्तर प्रदेश रत्न1997UP में सेवा के लिए
नारी रत्न1998महिला सशक्तिकरण में योगदान
The Great Indian Woman Award2021महिला सशक्तिकरण और बाल सुरक्षा में contribution
Womenpreneur Awardsअप्रैल 2026महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने में role

बेबी रानी मौर्य FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q: बेबी रानी मौर्य की उम्र कितनी है?

A: बेबी रानी मौर्य का जन्म 15 अगस्त 1956 को हुआ था। 2026 में वे 69 वर्ष की हैं।

Q: बेबी रानी मौर्य किस जाति से हैं?

A: वे जाटव (रविदासिया) समुदाय से हैं, जो अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आता है। यही समुदाय उत्तर प्रदेश में BSP का सबसे बड़ा वोट बैंक माना जाता है।

Q: बेबी रानी मौर्य के पति कौन हैं?

A: उनके पति प्रदीप कुमार मौर्य हैं जो Punjab National Bank में Director रह चुके हैं और अब PNB के Advisory Board के सदस्य हैं।

Q: बेबी रानी मौर्य की कुल संपत्ति कितनी है?

A: 2022 election affidavit के अनुसार उनकी total declared assets ₹2.9 करोड़ हैं — जिसमें ₹1.2 करोड़ moveable assets और ₹1.6 करोड़ immoveable assets शामिल हैं। उनकी कोई criminal case नहीं है।

Q: बेबी रानी मौर्य ने उत्तराखंड के Governor पद से इस्तीफा क्यों दिया?

A: उन्होंने सितंबर 2021 में कार्यकाल से 2 साल पहले इस्तीफा दिया। आधिकारिक कारण व्यक्तिगत बताया गया लेकिन राजनीतिक हलकों में यह माना गया कि वे सक्रिय चुनावी राजनीति में लौटना चाहती थीं — जो 2022 UP elections में MLA जीत से confirm हुआ।

Q: “BJP की मायावती” क्यों कहते हैं बेबी रानी मौर्य को?

A: क्योंकि वे खुद Jatav community से हैं जो Mayawati का मुख्य वोट बैंक है, और BJP उनके जरिए इस community में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करती है। India Today और Financial Express ने यह term use किया था।

Q: 2022 में बेबी रानी मौर्य ने कितने वोटों से जीत हासिल की?

A: 2022 UP Assembly Elections में उन्होंने आगरा ग्रामीण (SC) सीट से BSP की Kiran Prabha Keshari को 76,608 वोटों के भारी अंतर से हराया।

Q: बेबी रानी मौर्य आगरा की पहली महिला महापौर कब बनीं?

A: 1995 में। वे आगरा नगर निगम की पहली महिला महापौर बनीं और 2000 तक इस पद पर रहीं।

Q: बेबी रानी मौर्य वर्तमान में कौन से विभाग संभाल रही हैं?

A: वे योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की Cabinet Minister हैं। April 2026 से Anganwadi workers की honorarium बढ़ाई जाएगी — यह उनके विभाग की ताजा घोषणा है।

Sources & References

Last Updated: April 11, 2026

 

यह लेख अप्रैल 2026 की नवीनतम जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।