Supreme Court of India ने मेरठ Central Market मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। Meerut के इस हाई-प्रोफाइल केस में न सिर्फ अवैध निर्माण पर कार्रवाई तेज हुई है, बल्कि यहां के Commissioner को भी कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा है। Supreme Court की इस सख्ती के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
मामला उन 44 buildings का है, जिन्हें अब सील करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ये सभी निर्माण मूल रूप से residential plots पर बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ इन्हें commercial complexes में बदल दिया गया।
इनमें स्कूल, अस्पताल और कई बड़े business establishments भी शामिल हैं। लंबे समय से चल रहे इस illegal construction case ने अब Supreme Court के हस्तक्षेप के बाद नया मोड़ ले लिया है।
सूत्रों व बड़े-बड़े न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ समय पहले प्रशासनिक स्तर पर demolition और sealing को रोकने की कोशिश की गई थी। बताया जा रहा है कि Commissioner स्तर पर ऐसा आदेश जारी हुआ, जो Supreme Court के निर्देशों के खिलाफ था।
जैसे ही यह बात कोर्ट के संज्ञान में आई, जजों ने कड़ा रुख अपनाया और Commissioner को सख्त शब्दों में फटकार लगाई। यह स्पष्ट संदेश था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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इस SC crackdown का सीधा असर अब व्यापारियों पर पड़ रहा है। Central Market में दुकानदार तेजी से अपनी shops खाली कर रहे हैं। कई लोग सालों से चल रहे अपने business को बचाने के लिए protest भी कर रहे हैं। “हमने पूरी जिंदगी यहीं लगा दी, अब सब खत्म हो रहा है,” एक व्यापारी ने भावुक होकर कहा। डर और अनिश्चितता का माहौल साफ देखा जा सकता है।
अब सभी की नजर अगली hearing पर टिकी है, जहां demolition को लेकर और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। अगर Supreme Court ने सख्ती जारी रखी, तो आने वाले दिनों में और buildings गिराए जा सकते हैं।
यह पूरा Meerut Central Market case एक बड़ा सबक भी है—illegal construction और administrative negligence का अंजाम आखिरकार कितना गंभीर हो सकता है। Supreme Court ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे मामला कितना भी पुराना या संवेदनशील क्यों न हो।
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मेरठ कमिश्नर ने क्या कहा था?
सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में दुकानों को और ध्वस्त न किया ये दरअसल, पिछले साल 27 अक्टूबर, 2025 को मेरठ कमिश्नर bbने आदेश पारित किया था क्योकि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से इन दुकानों को बाजार गली का दर्जा दिया जाएगा.
श्री पी गुरुप्रसाद जो की उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष है इन्होने बतया की 27 अक्टूबर को मेरठ आयुक्त द्वारा पारित आदेश के मद्देनजर विध्वंस कार्य नहीं किया जा सकता. 2 अप्रैल को न्यायालय ने कहा था कि वह मेरठ मंडल आयुक्त द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश से अत्यंत विचलित है. अतः तत्कालीन आयुक्त को 6 अप्रैल को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था.
यूपी | मेरठ की प्रमुख सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व अब नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यहां 44 बिल्डिंग गिराई जानी हैं। इन बिल्डिंगों में कई सौ दुकानें हैं।
— Sachin Gupta (@Sachingupta) April 8, 2026
दरअसल, वर्ष 1978 में आवास विकास ने यहां रेजिडेंशियल प्लॉट काटे थे। लोगों ने प्लॉट मर्ज करके बड़े–बड़े कॉमर्शियल… pic.twitter.com/Q1okxPXb1E

