UTTARAKHAND DEVELOPMENT PROJECTS: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में राज्य व्यय-वित्त समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों की विकास प्राथमिकताओं को देखते हुए कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया और उन्हें वित्तीय अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
UTTARAKHAND DEVELOPMENT PROJECTS: अमृत 2.0 और पेयजल योजनाओं पर विशेष फोकस
समिति ने अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) के ट्रांच-2 के तहत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। देहरादून के बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए यह योजना जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन उत्तराखण्ड जल संस्थान द्वारा किया जाएगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस योजना के माध्यम से क्षेत्र के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण और निरंतर पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

सतपुली बैराज और विभागीय भवनों का निर्माण
द्वारीखाल और एकेश्वर विकास खंड के अंतर्गत सतपुली बैराज के निर्माण के पुनरीक्षित (Revised) प्रस्ताव को समिति ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित फायर स्टेशन में टाइप-द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के आवासीय भवनों के निर्माण को भी हरी झंडी दी गई। देहरादून के डांडा लखौंड क्षेत्र में सहस्त्रधारा रोड पर शहरी विकास निदेशालय के नए कार्यालय भवन और नगर निगम रुद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण कार्य को भी अनुमोदित किया गया है।(UTTARAKHAND DEVELOPMENT PROJECTS)
UTTARAKHAND DEVELOPMENT PROJECTS: गुणवत्ता, पारदर्शिता और पारिस्थितिकी संतुलन के निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में उपस्थित सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन व्यावहारिक और मितव्ययी तरीके से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं को समयसीमा के भीतर पूर्ण करने पर बल देते हुए कहा कि निर्माण के दौरान पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाएं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ होनी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इनका लाभ मिल सके।
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