UTTARAKHAND STF: देहरादून स्थित एसटीएफ मुख्यालय में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नीलेश आनंद भरणे ने प्रेस वार्ता कर पिछले एक साल का लेखा-जोखा मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक एसटीएफ ने संगठित अपराध, हथियार तस्करी और इनामी बदमाशों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। आईजी ने स्पष्ट किया कि एसटीएफ का उद्देश्य राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा है, जिसमें विभाग को बड़ी सफलताएं मिली हैं।
25 साल से फरार 2 लाख का इनामी हत्यारा गिरफ्तार
आईजी नीलेश आनंद भरणे ने जानकारी दी कि एसटीएफ की टीमों ने साल भर में बेहतरीन खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए 18 इनामी और लंबे समय से फरार अपराधियों को देश के विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और बड़ी कामयाबी चमोली जिले के एक पुराने हत्याकांड में मिली। एसटीएफ ने 25 सालों से फरार चल रहे कुख्यात अपराधी सुरेश शर्मा को धर दबोचा, जिस पर पुलिस ने 2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यह गिरफ्तारी एसटीएफ की लंबी और धैर्यपूर्ण जांच का नतीजा थी। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में 26 अन्य अभियुक्तों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

UTTARAKHAND STF ने किया हथियारों के जखीरे के साथ शूटर और तस्कर गिरफ्तार
अपराधियों के पास से बरामद हथियारों का जखीरा इस बात की गवाही देता है कि एसटीएफ ने कितनी बड़ी घटनाओं को होने से रोका है। आईजी ने बताया कि शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए साल 2025 में कुल 20 पिस्टल, 2 तमंचे, 24 मैगजीन और 63 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। हथियारों की तस्करी और अवैध रखने के आरोप में 9 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक बड़ी कार्रवाई कुख्यात गैंगस्टर विनीत शर्मा उर्फ चीनू पंडित गैंग के खिलाफ की गई। एसटीएफ ने इस गैंग के 2 खतरनाक शूटरों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 3 पिस्टल, 1 तमंचा और 12 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।

नशा, नकली दवा और साइबर क्राइम पर भी कस दिया शिकंजा
UTTARAKHAND STF की कार्रवाई केवल मार-धाड़ वाले अपराधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सफेदपोश और तकनीकी अपराधों पर भी विभाग ने कड़ा प्रहार किया। आईजी ने बताया कि साल भर में नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली दवाइयों के अवैध कारोबार, साइबर क्राइम और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ भी निरंतर और प्रभावी अभियान चलाए गए। एसटीएफ की सक्रियता के चलते राज्य में संगठित अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी मदद मिली है। वर्ष 2025 की ये उपलब्धियां बताती हैं कि उत्तराखंड पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

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