UNESCO HERITAGE DIWALI: भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक ‘दीवाली’ को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर दीवाली को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल कर लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली यूनेस्को की इंटर-गवर्नमेंटल कमेटी की 20वीं बैठक की मेजबानी कर रही है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए आज, 10 दिसंबर को राजधानी दिल्ली समेत देशभर की ऐतिहासिक धरोहरों में एक बार फिर ‘दिवाली’ मनाई जा रही है।

UNESCO HERITAGE DIWALI: लाल किले पर भव्य दीपोत्सव
चूंकि यूनेस्को की यह महत्वपूर्ण बैठक 8 से 13 दिसंबर तक दिल्ली में चल रही है, इसलिए केंद्र सरकार ने आज (10 दिसंबर) विशेष दीपावली समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस उत्सव का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक लाल किला होगा। यहां यूनेस्को के प्रतिनिधिमंडल और 180 देशों से आए विदेशी मेहमानों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। आज शाम लाल किले में विदेशी डेलीगेट्स और देश के वरिष्ठ अधिकारी दीप जलाने की रस्म अदा करेंगे। यहां विशेष रंगोली सजाई गई है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारत की पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया जाएगा।

दिल्ली सरकार मना रही है विशेष उत्सव
यूनेस्को की इस घोषणा को सेलिब्रेट करने के लिए दिल्ली सरकार ने भी पूरी तैयारी की है। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने जानकारी दी कि आज दिल्ली सरकार अलग से दीवाली मना रही है। राजधानी की सभी प्रमुख सरकारी इमारतों को रोशनी से सजाया गया है। मंगलवार रात से ही दिल्ली सचिवालय तिरंगे की रोशनी में नहाया हुआ है। इसके अलावा, दिल्ली हाट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक उपलब्धि का हिस्सा बनें और शहर भर में हो रहे समारोहों में शामिल हों।

रम्माण मेला, दुर्गा पूजा और कुंभ मेला की लिस्ट में शामिल हुई दीवाली
मार्च 2024 में भारत ने दीवाली को इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। दीवाली के शामिल होने के साथ ही भारत की अब कुल 16 धरोहरें यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची का हिस्सा बन गई हैं। इससे पहले रम्माण मेला, दुर्गा पूजा, कुंभ मेला, वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला, और छऊ नृत्य जैसी 15 सांस्कृतिक परंपराएं इस सूची में अपनी जगह बना चुकी हैं। यूनेस्को की यह सूची उन परंपराओं को संरक्षित करती है जिन्हें हम छू नहीं सकते लेकिन अनुभव कर सकते हैं, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें।

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