PARLIAMENT MONSOON SESSION 2025: भारत की संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 21 अगस्त 2025 तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा इस सत्र की औपचारिक घोषणा की गई, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकृति प्रदान की है। सत्र में कुल 21 बैठकें निर्धारित की गई हैं, हालांकि 13 और 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के चलते कोई कार्यवाही नहीं होगी। विपक्ष भी इस सत्र में सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

PARLIAMENT MONSOON SESSION 2025 में इन विधेयकों पर हो सकती है चर्चा
इस बार सरकार संसद में आठ नए विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, नेशनल एंटी डोपिंग संशोधन बिल, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) बिल, जन विश्वास (संशोधन) बिल, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) बिल, कराधान विधि (संशोधन) बिल, भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष (संरक्षण) बिल, और खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल शामिल हैं। इसके अलावा मर्चेंट शिपिंग बिल, भारतीय बंदरगाह बिल 2025, तटीय नौवहन बिल 2025 और आयकर बिल 2025 जैसे लंबित विधेयकों को पारित कराने की भी कोशिश की जाएगी।

इस सत्र में मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है। भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति शासन की हर छह महीने में संसद से पुनः अनुमोदन आवश्यक होता है। ऐसे में सरकार इसे समय रहते संसद में मंजूरी दिलाने की योजना पर काम कर रही है। विपक्ष खासकर पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर जवाब मांग सकता है। साथ ही, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए जाने की संभावना है।

सत्र शुरू होने से एक दिन पहले यानी 20 जुलाई को सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें विभिन्न दलों के नेता सत्र के एजेंडे, विधेयकों और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे। यह बैठक आम सहमति बनाने और सत्र को व्यवस्थित रूप से चलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। इस बार लोकसभा सचिवालय ने सांसदों की उपस्थिति को डिजिटल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। अब सांसदों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। इस कदम का उद्देश्य संसद की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी बनाना और सांसदों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

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