JANE STREET and SEBI: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट ग्रुप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे भारतीय शेयर बाजार में कथित हेरफेर के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। सेबी के आदेश के तहत जेन स्ट्रीट ने ₹4,843.5 करोड़ यानी लगभग $567 मिलियन की राशि भारत में एक एस्क्रो खाते में जमा कर दी है। यह राशि उस लाभ की है जिसे सेबी ने गैर-कानूनी और अनुचित ट्रेडिंग रणनीतियों से अर्जित माना है। फर्म और उसकी सहायक कंपनियों को भारतीय शेयर बाजार में किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

JANE STREET and SEBI: हेरफेर का मामला उजागर
सेबी की जांच में सामने आया कि जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच जेन स्ट्रीट ने हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और एल्गोरिदमिक रणनीतियों का उपयोग कर बैंक निफ्टी और निफ्टी ऑप्शंस जैसे इंडेक्स डेरिवेटिव्स में “इंट्रा-डे इंडेक्स मैनिपुलेशन” और “एक्सटेंडेड मार्किंग द क्लोज” जैसी तकनीकों से भारी हेरफेर की। इस दौरान फर्म ने ₹36,671 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया, जिसमें से ₹43,289 करोड़ केवल इंडेक्स ऑप्शंस से जुड़े हैं और बैंक निफ्टी ऑप्शंस में इसका हिस्सा ₹17,319 करोड़ रहा।
सेबी ने 3 जुलाई 2025 को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए जेन स्ट्रीट ग्रुप की चार सहायक कंपनियों—जेएसआई इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेएसआई2 इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेन स्ट्रीट सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड और जेन स्ट्रीट एशिया ट्रेडिंग लिमिटेड—को किसी भी प्रकार के भारतीय प्रतिभूति लेनदेन से प्रतिबंधित कर दिया है। इनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और कोई भी लेनदेन सेबी की अनुमति के बिना संभव नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला?
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि अप्रैल 2024 की उन मीडिया रिपोर्ट्स से जुड़ी है जिनमें जेन स्ट्रीट पर भारतीय बाजार में गैर-कानूनी ट्रेडिंग के आरोप लगे थे। इन रिपोर्ट्स के आधार पर सेबी ने जांच शुरू की और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने 6 फरवरी 2025 को चेतावनी पत्र जारी किया, जिसे दरकिनार कर फर्म ने मई 2025 तक आक्रामक ट्रेडिंग जारी रखी। सेबी ने ऐसे 18 ट्रेडिंग दिनों की पहचान की जब फर्म ने विशेष रूप से बैंक निफ्टी में हेरफेर किया।(JANE STREET and SEBI)
17 जनवरी 2024 को एक ही दिन में ₹4,370 करोड़ की खरीदारी और ऑप्शंस को शॉर्ट कर ₹673 करोड़ का मुनाफा कमाया गया, जो सेबी की जांच में महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया। सेबी के 105 पन्नों के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जेन स्ट्रीट की गतिविधियों ने बाजार की पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाया और आम निवेशकों को भारी हानि उठानी पड़ी। सेबी की FY25 रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी डेरिवेटिव्स में 91% रिटेल निवेशकों को नुकसान हुआ है और FY24 में ₹74,812 करोड़ के नुकसान की तुलना में FY25 में यह आंकड़ा ₹1,05,603 करोड़ तक पहुंच गया है।

जेन स्ट्रीट ने सेबी के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उसने भारतीय बाजार में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया और “अच्छे विश्वास” के तहत ₹4,843.5 करोड़ की राशि एस्क्रो में जमा की है। फर्म ने संकेत दिया है कि वह सेबी के आदेश को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में चुनौती दे सकती है और फिलहाल भारतीय ऑप्शंस में ट्रेडिंग का कोई इरादा नहीं रखती, हालांकि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है। रिटेल निवेशकों को हुए नुकसान को लेकर सेबी ने स्पष्ट किया है कि जब्त की गई राशि से मुआवजा नहीं दिया जाएगा क्योंकि भारत में अभी रेस्टिट्यूशन की कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं है।

सेबी की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और अब इसका दायरा सेंसेक्स ऑप्शंस तक बढ़ाए जाने की संभावना है। इसके अलावा, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी जेन स्ट्रीट के खिलाफ अलग से जांच शुरू कर सकता है। सेबी ने सभी स्टॉक एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वे जेन स्ट्रीट से जुड़ी भविष्य की किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी बनाए रखें ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके और बाजार की पारदर्शिता बहाल रखी जा सके।(JANE STREET and SEBI)

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