ITBP CORRUPTION SCAM: आईटीबीपी (Indo-Tibetan Border Police) में बड़ी भ्रष्टाचार की घटनाओं का खुलासा हुआ है, जिसमें अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मिर्थी स्थित आईटीबीपी की 7वीं वाहिनी में यह घोटाला हुआ है, जो 2017 से 2021 तक के विभिन्न मामलों में फैला हुआ है। सीबीआई (Central Bureau of Investigation) ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

ITBP CORRUPTION SCAM: क्या है मामला?
पहला मामला 2017 से 2019 तक के दौरान केरोसिन की खरीद और ढुलाई में घपले से जुड़ा हुआ है। तत्कालीन कमांडेंट महेंद्र प्रताप और उनके अधीनस्थ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने 8000 लीटर केरोसिन का फर्जी तरीके से लेन-देन किया। अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकारी खजाने से लाखों रुपये की धोखाधड़ी की। दूसरा मामला 2020 से 2021 तक के दौरान राशन, केरोसिन और अन्य सामग्रियों के मालभाड़े में हुए घपले का है। आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर इन सामग्रियों के परिवहन में हेराफेरी की और सरकारी धन का गलत तरीके से भुगतान किया। इस मामले में कुल 1.75 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

सीबीआई ने इन आरोपों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें कई अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। तीसरा मामला चीन सीमा पर आईटीबीपी द्वारा बनाए गए मोर्चों के निर्माण और पत्थरों की ढुलाई में हुआ घोटाला है। 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच झड़प के बाद आईटीबीपी ने सीमा पर मोर्चों के निर्माण और मरम्मत का आदेश दिया था। लेकिन अधिकारियों ने फर्जी चालानों के माध्यम से लाखों रुपये की हेराफेरी की और मानकों से अधिक भुगतान कर दिया। इन तीनों मामलों में सीबीआई की जांच जारी है।

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