शेयर बाजार में कम खर्च और आसान तरीके से निवेश करने वालों के बीच ETF Types को लेकर सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं। कोई Gold ETF की बात करता है, कोई Nifty ETF की, तो कोई Bank ETF को बेहतर बताता है। इतने सारे नाम सुनकर नया निवेशक अक्सर उलझ जाता है कि उसके लिए कौन सा सही है।
ETF क्या होता है?
ETF यानी Exchange Traded Fund एक ऐसा फंड है जो किसी इंडेक्स, धातु या बॉन्ड की कीमत को फॉलो करता है। इसे शेयर की तरह NSE और BSE पर बाजार के समय में कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। ETF खरीदने के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट जरूरी होता है। म्यूचुअल फंड की तुलना में लगभग सभी ETF Types का खर्च यानी Expense Ratio आम तौर पर काफी कम होता है।
भारत में ETF Types की पूरी जानकारी
भारत में ETF को मुख्य रूप से इस आधार पर बांटा जाता है कि फंड का पैसा कहां लगाया जाता है। इक्विटी, कमोडिटी, बॉन्ड और विदेशी बाजार, ये चार बड़े वर्ग हैं, जिनके भीतर कई तरह के फंड आते हैं। नीचे हम उन चार ETF Types को विस्तार से देखेंगे जिनमें भारतीय निवेशक सबसे ज्यादा पैसा लगाते हैं।
Gold ETF: डिजिटल रूप में असली सोना
Gold ETF का पैसा 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले असली सोने में लगाया जाता है, जो सुरक्षित तिजोरी में रखा जाता है। इसकी कीमत घरेलू बाजार में सोने के भाव के साथ ऊपर नीचे होती है। इसमें मेकिंग चार्ज, चोरी का डर या शुद्धता की चिंता नहीं रहती। कम रकम से भी सोने में निवेश शुरू किया जा सकता है, इसलिए पोर्टफोलियो में सुरक्षा के लिए यह लोकप्रिय विकल्प है।
Silver ETF: चांदी में आसान निवेश
Silver ETF भारत में 2022 से शुरू हुए और ये 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी में निवेश करते हैं। चांदी की मांग गहनों के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों से भी आती है। इसी वजह से चांदी की कीमत में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार चढ़ाव देखा जाता है। ज्यादा जोखिम उठाने वाले निवेशक ही इसमें बड़ा हिस्सा लगाएं।
Nifty ETF: बाजार की 50 बड़ी कंपनियां एक साथ
Nifty ETF, Nifty 50 इंडेक्स को फॉलो करता है, जिसमें NSE पर लिस्टेड 50 बड़ी कंपनियां शामिल हैं। एक ही यूनिट खरीदकर आप इन सभी कंपनियों में थोड़ा थोड़ा हिस्सा पा लेते हैं। लंबी अवधि के निवेश और SIP के लिए इसे नए निवेशकों का सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। इसी तरह Sensex को फॉलो करने वाले ETF भी बाजार में मौजूद हैं।
Bank ETF: बैंकिंग सेक्टर पर दांव
Bank ETF, Nifty Bank इंडेक्स को फॉलो करता है, जिसमें देश के बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक शामिल होते हैं। यह एक सेक्टोरल ETF है, यानी पूरा पैसा एक ही सेक्टर में लगता है। बैंकिंग सेक्टर अच्छा करे तो रिटर्न शानदार हो सकता है, लेकिन ब्याज दरों या कर्ज से जुड़ी खराब खबरों पर गिरावट भी तेज होती है। इसलिए इसे पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा ही रखें।
दूसरे ETF और टैक्स के नियम
इन चार के अलावा Debt ETF, IT या फार्मा जैसे सेक्टोरल ETF और अमेरिकी बाजार को फॉलो करने वाले इंटरनेशनल ETF भी मौजूद हैं। सभी ETF Types पर टैक्स के नियम अलग अलग हैं। इक्विटी ETF को 12 महीने से पहले बेचने पर 20 प्रतिशत और उसके बाद 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है।

Gold और Silver ETF पर 12 महीने के भीतर बेचने पर स्लैब रेट और उसके बाद 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है, जबकि Debt ETF पर हमेशा स्लैब रेट लागू होता है।
निवेश से जुड़ी और उपयोगी जानकारी
चांदी में निवेश से पहले हमारी गाइड Silver ETF क्या है जरूर पढ़ें। इंडेक्स फंड और ETF का फर्क समझने के लिए नए निवेशकों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर वाली रिपोर्ट देखें। Nifty ETF से पहले Nifty 50 क्या होता है यह समझना भी फायदेमंद रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नए निवेशकों के लिए कौन से ETF Types सबसे अच्छे हैं?
शुरुआत के लिए Nifty 50 ETF और थोड़ी मात्रा में Gold ETF को आम तौर पर संतुलित विकल्प माना जाता है।
2. क्या ETF खरीदने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है?
हां, ETF शेयर बाजार पर खरीदे बेचे जाते हैं, इसलिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट जरूरी है।
3. क्या सभी ETF Types पर एक जैसा टैक्स लगता है?
नहीं, इक्विटी, गोल्ड, सिल्वर और डेट ETF पर टैक्स की दर और होल्डिंग पीरियड के नियम अलग अलग हैं।
4. ETF Types चुनते समय किन बातों पर ध्यान दें?
Expense Ratio, ट्रैकिंग एरर और रोज की ट्रेडिंग वॉल्यूम जरूर देखें। कम वॉल्यूम वाले ETF में खरीदने बेचने में दिक्कत हो सकती है, और यह बात सभी ETF Types पर लागू होती है।
5. भारत में उपलब्ध सभी ETF की सूची कहां देखें?
फंड हाउस, स्कीम और उनकी NAV से जुड़ी आधिकारिक जानकारी AMFI की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
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