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दिल्ली में प्रदूषण का गंभीर दौर: हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर GRAP-III लागू

राजधानी की हवा हुई जहरीली, सांस लेना हुआ मुश्किल

देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप धारण करना शुरू कर दिया है। लगातार गिरती हवा की गुणवत्ता ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के गंभीर श्रेणी की ओर बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-III को लागू कर दिया है।

शुक्रवार को दिल्ली का औसत AQI शाम 4 बजे 382 दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 369 था। यह स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि, राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

GRAP-III लागू होने के बाद क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए?दिल्ली

निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक

GRAP-III के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम धूल पैदा करने वाली निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना है। दिल्ली-एनसीआर में बड़े स्तर पर धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

इन प्रतिबंधों का उद्देश्य हवा में मौजूद धूल के कणों और प्रदूषण के स्तर को कम करना है। हालांकि, आवश्यक और निर्धारित श्रेणी की परियोजनाओं को नियमों के अनुसार छूट मिल सकती है।

पुराने वाहनों पर सख्ती

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहनों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। GRAP-III के तहत दिल्ली और एनसीआर के पांच अधिक वाहन घनत्व वाले जिलों में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर शामिल हैं।

इस कदम का उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले हानिकारक धुएं को कम करना है। नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और अन्य स्वच्छ परिवहन साधनों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

स्कूलों और सरकारी कार्यालयों पर भी असर

हाइब्रिड मोड में चल सकती हैं कक्षाएं

बढ़ते प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए GRAP-III के तहत कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में हाइब्रिड मोड से पढ़ाई का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसके अंतर्गत ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई की व्यवस्था की जा सकती है।

कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह

प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने तथा शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने पर भी विचार किया जा सकता है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली के कई इलाके गंभीर प्रदूषण की चपेट में

राजधानी के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाबी बाग और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में AQI 455 तक पहुंच गया। जहांगीरपुरी में 449, रोहिणी में 449, आरके पुरम में 443 और मुंडका में 438 दर्ज किया गया।

इसके अलावा नजफगढ़, विवेक विहार, बवाना, अलीपुर, द्वारका, ओखला और आईटीओ जैसे क्षेत्रों में भी AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदूषण अब केवल कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी राजधानी इसकी चपेट में आती दिखाई दे रही है।

आखिर क्यों बढ़ रहा है दिल्ली में प्रदूषण?

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, कचरा जलाना और आसपास के राज्यों में पराली जलाना प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट, धीमी हवाएं और वातावरण में नमी के कारण प्रदूषक तत्व हवा में लंबे समय तक जमा रहते हैं। इससे प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के अनुमान के अनुसार, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का दिल्ली के प्रदूषण में योगदान लगभग 13 से 20 प्रतिशत के बीच रहा है। हालांकि, प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाना जिम्मेदार नहीं है। स्थानीय स्तर पर होने वाला उत्सर्जन भी बड़ी भूमिका निभाता है।

स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

खराब हवा का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रदूषित वातावरण में सांस लेने से खांसी, गले में जलन, आंखों में परेशानी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है।

बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉक्टरों की सलाह है कि प्रदूषण अधिक होने पर सुबह और शाम की खुली हवा में व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें और बाहर निकलने का समय सीमित रखें।

नागरिकों से सहयोग की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, छोटी दूरी के लिए पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें और अनावश्यक यात्राओं से बचें। इसके साथ ही कूड़ा, लकड़ी और कोयला खुले में जलाने से परहेज करें।

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निष्कर्ष:

केवल प्रतिबंध नहीं, स्थायी समाधान जरूरी

दिल्ली में GRAP-III लागू होना इस बात का संकेत है कि राजधानी में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हालांकि, आपातकालीन प्रतिबंध कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब सरकार, प्रशासन, उद्योगों और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित हो।

वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल और पराली जलाने के विकल्पों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। स्वच्छ हवा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार और सामूहिक जिम्मेदारी भी है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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