कारोबार में किसी भी डील को पक्का करने से पहले Proforma Invoice, Quotation और Purchase Order जैसे तीन दस्तावेज सबसे ज्यादा काम आते हैं। लेकिन कई नए कारोबारी इन तीनों को एक ही चीज समझ लेते हैं।
यही उलझन आगे चलकर गलत पेमेंट, कीमत पर बहस और GST रिकॉर्ड में गड़बड़ी की वजह बनती है। इस गाइड में हम आसान भाषा में समझेंगे कि कौन सा दस्तावेज कब, कौन और क्यों बनाता है।
Quotation क्या होता है?
Quotation यानी कोटेशन वह दस्तावेज है जो विक्रेता किसी ग्राहक के पूछने पर भेजता है। इसमें सामान या सेवा की कीमत, मात्रा, टैक्स, डिलीवरी समय और ऑफर कितने दिन तक मान्य है, यह लिखा होता है। कोटेशन सिर्फ एक प्रस्ताव होता है। ग्राहक इसे मानने के लिए बाध्य नहीं होता और वह कई सप्लायर से कोटेशन मंगाकर सबसे सही ऑफर चुन सकता है।
Proforma Invoice का असली मतलब
Proforma Invoice एक तरह का अग्रिम बिल है, जिसे विक्रेता डील लगभग तय होने के बाद लेकिन माल भेजने से पहले जारी करता है। इसमें वही सब जानकारी होती है जो असली बिल में होती है, जैसे सामान का विवरण, कीमत, GST, पेमेंट की शर्तें और डिलीवरी की तारीख। फर्क बस इतना है कि यह कानूनी टैक्स इनवॉइस नहीं होता।
इसके आधार पर न तो GST रिटर्न में बिक्री दिखाई जाती है और न ही खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकता है। एडवांस पेमेंट मांगने, बैंक से लोन या लेटर ऑफ क्रेडिट लेने और एक्सपोर्ट के समय कस्टम्स व इंपोर्ट लाइसेंस की प्रक्रिया में Proforma Invoice का खूब इस्तेमाल होता है।
Purchase Order कौन और कब भेजता है?
Purchase Order यानी PO खरीदार की तरफ से भेजा जाने वाला आधिकारिक ऑर्डर है। कोटेशन पसंद आने के बाद खरीदार PO जारी करता है, जिसमें PO नंबर, सामान, मात्रा, तय कीमत, डिलीवरी की जगह और पेमेंट की शर्तें लिखी होती हैं। जब सप्लायर PO को स्वीकार कर लेता है, तो यह दोनों पक्षों के बीच एक बाध्यकारी समझौता बन जाता है। किसी विवाद की हालत में यही सबसे मजबूत सबूत होता है।
तीनों दस्तावेजों में मुख्य अंतर
सबसे बड़ा फर्क यह है कि दस्तावेज कौन बनाता है। कोटेशन और प्रोफॉर्मा बिल विक्रेता बनाता है, जबकि पर्चेज ऑर्डर हमेशा खरीदार बनाता है। दूसरा फर्क मकसद का है। कोटेशन कीमत बताता है, PO ऑर्डर पक्का करता है और Proforma Invoice पेमेंट या माल भेजने से पहले पूरी डील की तस्वीर साफ करता है।
तीसरा फर्क कानूनी असर का है। कोटेशन सिर्फ ऑफर है, स्वीकार किया गया PO एक अनुबंध है और प्रोफॉर्मा बिल एक अनुमानित बिल है, जिसकी जगह बाद में असली टैक्स इनवॉइस जारी होता है।
डील में इनका सही क्रम क्या है?
आम तौर पर पहले ग्राहक पूछताछ करता है और विक्रेता कोटेशन भेजता है। ग्राहक को कीमत ठीक लगे तो वह पर्चेज ऑर्डर जारी करता है। इसके बाद विक्रेता एडवांस पेमेंट या पुष्टि के लिए प्रोफॉर्मा बिल भेजता है।
माल डिलीवर होने पर आखिर में फाइनल टैक्स इनवॉइस बनता है, जिस पर GST लागू होता है। कई छोटे कारोबार में कोटेशन और प्रोफॉर्मा बिल का काम एक ही दस्तावेज से निपटा लिया जाता है, लेकिन बड़ी डील या एक्सपोर्ट में तीनों अलग रखना ही सुरक्षित तरीका है।

कारोबार से जुड़ी और उपयोगी जानकारी
खरीद की पूरी प्रक्रिया समझने के लिए हमारी गाइड Purchase Order क्यों है हर बिजनेस के लिए जरूरी पढ़ें। असली टैक्स बिल के बारे में जानने के लिए Invoice क्या है और यह बिजनेस के लिए क्यों जरूरी है भी देखें। उधार पर माल खरीदने का गणित ट्रेड क्रेडिट की आसान गाइड में समझाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या Proforma Invoice पर GST देना होता है?
नहीं, यह असली टैक्स इनवॉइस नहीं है, इसलिए इस पर GST देनदारी नहीं बनती। टैक्स केवल फाइनल इनवॉइस जारी होने पर लगता है।
2. Quotation और Proforma Invoice में कौन पहले आता है?
पहले कोटेशन आता है, जो कीमत का प्रस्ताव होता है। डील लगभग तय होने के बाद विक्रेता प्रोफॉर्मा बिल भेजता है।
3. क्या Purchase Order कानूनी रूप से मान्य है?
हां, सप्लायर की स्वीकृति के बाद PO दोनों पक्षों के बीच बाध्यकारी अनुबंध बन जाता है।
4. क्या Proforma Invoice को बाद में बदला जा सकता है?
हां, कीमत, मात्रा या शर्तें बदलने पर नया प्रोफॉर्मा बिल जारी किया जा सकता है, क्योंकि यह अंतिम बिल नहीं होता।
5. फाइनल टैक्स इनवॉइस के नियम कहां देखें?
टैक्स इनवॉइस और रिटर्न से जुड़े आधिकारिक नियम GST पोर्टल पर देखे जा सकते हैं।
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