सौरभ चंद्राकर के भारत लौटने के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। ऐप के सह-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय एजेंसियों ने उन्हें भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब इस मामले के एक अन्य प्रमुख आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा चुका है।
रवि उप्पल की गिरफ्तारी को महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। भारतीय जांच एजेंसियां लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही थीं। अब उप्पल की गिरफ्तारी के बाद मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हुई गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, 46 वर्षीय रवि उप्पल को दुबई में भारतीय जांच एजेंसियों की ओर से जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) मिलकर काम कर रहे हैं।
दोनों एजेंसियां संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के साथ समन्वय कर उप्पल को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भारत लाकर पूछताछ की जा सकती है।
गौरतलब है कि रवि उप्पल इससे पहले भी वर्ष 2023 में संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में लिए गए थे। हालांकि, बाद में भारतीय एजेंसियों को उनके ऑस्ट्रेलिया में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद से उनकी गतिविधियों और ठिकाने पर जांच एजेंसियों की नजर बनी हुई थी।
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी कार्रवाई
रवि उप्पल की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले महादेव ऐप के दूसरे प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया था। चंद्राकर को ओमान की रॉयल पुलिस ने इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया था। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया गया।
सीबीआई की एक विशेष टीम उन्हें ओमान से भारत लेकर आई थी। भारत पहुंचने के बाद चंद्राकर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें आठ दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यह हिरासत 12 नवंबर तक निर्धारित की गई है। अदालत ने जांच एजेंसी को पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने की अनुमति भी दी है।
सीबीआई के अनुसार, चंद्राकर दो मामलों में वांछित हैं, जिनमें आरोपपत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनके खिलाफ एक अलग मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
क्या है महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप का पूरा मामला?
महादेव ऑनलाइन बुक यानी MOB को जांच एजेंसियों ने देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक बताया है। इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत वर्ष 2019-20 के आसपास हुई थी। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में इसके यूजर बेस में तेजी से वृद्धि होने की बात जांच एजेंसियों ने कही है।
आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था। इसके संचालन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। इन पैनलों के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था और उनसे सट्टे की रकम एकत्र की जाती थी।
हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच
सीबीआई की जांच के अनुसार, कथित अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि धनराशि को म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर अलग-अलग लेन-देन में घुमाया जाता था और बाद में हवाला चैनलों के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
जांच में यह आरोप भी लगाया गया है कि कथित तौर पर इस नेटवर्क से प्राप्त धन का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि देने में इस्तेमाल किया जाता था, ताकि सट्टेबाजी का कारोबार बिना किसी बाधा के चलता रहे।
सीबीआई ने महादेव ऐप नेटवर्क को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों की जांच की है। एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के संचालन में विदेशों से भी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
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अब रवि उप्पल से पूछताछ पर टिकी जांच एजेंसियों की नजर
रवि उप्पल की गिरफ्तारी और सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद महादेव ऐप मामले की जांच में तेजी आने की संभावना है। जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों से नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और कथित रूप से शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती हैं।
रवि उप्पल को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है, इस पर भी सबकी नजर रहेगी। माना जा रहा है कि उनकी भारत वापसी से इस कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट के आर्थिक नेटवर्क और संचालन से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

