HomeNational Headlinesदिल्ली के 20 बाजारों पर मंडराया संकट, 12 हजार करोड़ रुपये का...

दिल्ली के 20 बाजारों पर मंडराया संकट, 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार दांव पर; व्यापारियों ने सोनिया गांधी से की राहुल गांधी की रैली टालने की मांग

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले राजनीतिक गतिविधियों और व्यापारिक हितों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। दिल्ली के व्यापारियों ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से INDIA गठबंधन की प्रस्तावित मेगा रैली को स्थगित करने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली इस रैली के कारण राजधानी के करीब 20 प्रमुख बाजारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे प्रतिदिन 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का व्यापार दांव पर लगने की आशंका है।

व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि दिवाली का त्योहार व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय होता है। ऐसे में इतने बड़े राजनीतिक आयोजन से बाजारों तक ग्राहकों और सामान की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा है।

10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान, 15 से 20 हजार वाहनों की आशंका

यातायात व्यवस्था बिगड़ने की जताई आशंका

CTI के मुताबिक, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए लगभग 15 हजार से 20 हजार वाहनों के दिल्ली आने की संभावना जताई गई है।

व्यापारियों का सवाल है कि रामलीला मैदान और उसके आसपास इतनी बड़ी संख्या में बसों और अन्य वाहनों की पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। संगठन का दावा है कि आयोजन स्थल पर 200 बड़ी बसों को खड़ा करने तक की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में वाहनों का दबाव जवाहरलाल नेहरू मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग और नेताजी सुभाष मार्ग सहित आसपास की सड़कों पर बढ़ सकता है। इससे मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजारों में यातायात पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों का कारोबार प्रभावित होने का डर

देशभर में सामान की आपूर्ति करने वाले बाजारों पर संकट

व्यापारियों के अनुसार, रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरिबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट और दरियागंज जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र शामिल हैं।

CTI का दावा है कि इन बाजारों में प्रतिदिन लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां से देश के अलग-अलग राज्यों में सामान की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में यदि सड़कों पर जाम लगता है या वाहनों की आवाजाही रोक दी जाती है, तो इसका असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूसरे शहरों के व्यापार पर भी पड़ सकता है।

रोजाना 5 हजार ट्रक लाते हैं सामान, 3 हजार वाहन करते हैं सप्लाई

दिवाली के सामान की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका

CTI के अनुसार, दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना लगभग 5 हजार ट्रक और टेंपो इन बाजारों तक सामान पहुंचाते हैं। वहीं, करीब 3 हजार वाहन दिल्ली से एनसीआर के शहरों और दूसरे राज्यों तक माल की आपूर्ति करते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि 31 अक्टूबर से ही रैली में शामिल होने वाले वाहनों के दिल्ली पहुंचने का सिलसिला शुरू हो सकता है। इससे सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है।

संगठन ने यह भी दावा किया है कि जाम और संभावित बैरिकेडिंग की आशंका के चलते ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही माल भेजने में हिचकिचा रहे हैं। यदि सामान समय पर बाजारों तक नहीं पहुंचा, तो धनतेरस और दिवाली की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली

व्यापारियों के लिए बेहद अहम है यह समय

इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। त्योहारों से पहले बाजारों में खरीदारी और सामान की आपूर्ति तेजी से बढ़ती है। व्यापारियों के लिए यह समय पूरे साल की कमाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने रोजगार और आजीविका को सुरक्षित रखने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था ठप होती है, तो बाजारों में सामान पहुंचाना और ग्राहकों का आना-जाना मुश्किल हो जाएगा।

सोनिया गांधी के सामने रखे दो विकल्पसोनिया गांधी

10 नवंबर के बाद रैली कराने या जगह बदलने की मांग

व्यापारियों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहला, 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को दिवाली के बाद यानी 10-11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। इससे व्यापारियों को त्योहारों के दौरान अपना कारोबार सामान्य रूप से चलाने का मौका मिलेगा।

दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली की तारीख बदलना संभव नहीं है, तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में आयोजित किया जाए। CTI का दावा है कि बुराड़ी मैदान में लगभग 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था उपलब्ध हो सकती है।

संगठन के मुताबिक, वह पहले भी राहुल गांधी को तीन पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का अनुरोध कर चुका है, लेकिन अब तक उसकी मांग पर सहमति नहीं बनी है।

आगे और समाचार पढ़े:

राजनीतिक आयोजन और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन की अपील

अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें

INDIA गठबंधन की यह रैली कथित वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष के अभियान का हिस्सा है। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया है।

वहीं, दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना हर दल का अधिकार है, लेकिन इसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे आम लोगों, दुकानदारों और कारोबारियों को नुकसान न उठाना पड़े।

अब देखना होगा कि सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व व्यापारियों की इस अपील पर क्या फैसला लेते हैं। दिवाली से ठीक पहले दिल्ली के प्रमुख बाजारों में करोड़ों रुपये के कारोबार और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया है।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular