HomeLatest NewsPower Delivery vs Quick Charge: क्या है दोनों में अंतर और आपके...

Power Delivery vs Quick Charge: क्या है दोनों में अंतर और आपके फोन या लैपटॉप के लिए कौन सा चार्जर है बेस्ट?

Power Delivery और Quick Charge, दोनों ही फोन और लैपटॉप को तेजी से चार्ज करने की तकनीकें हैं, लेकिन इनका काम करने का तरीका और इस्तेमाल अलग है। नया चार्जर खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ वॉट देखते हैं, जबकि फोन किस तकनीक को सपोर्ट करता है, यह जानना उससे भी ज्यादा जरूरी है। गलत चार्जर लेने पर फोन धीरे चार्ज होता है और महंगा चार्जर भी बेकार साबित हो सकता है।

फास्ट चार्जिंग कैसे काम करती है?

चार्जिंग की ताकत वोल्टेज और करंट को गुणा करके वॉट में मापी जाती है। पुराने साधारण चार्जर 5 वोल्ट पर ही काम करते थे, इसलिए फोन धीरे चार्ज होता था। फास्ट चार्जिंग में चार्जर और फोन आपस में बात करके तय करते हैं कि कितना वोल्टेज और करंट सुरक्षित रहेगा। यह बातचीत किस नियम से होगी, इसी को चार्जिंग प्रोटोकॉल कहते हैं।

USB पावर डिलीवरी क्या है?

USB Power Delivery को USB इम्प्लीमेंटर्स फोरम (USB-IF) ने बनाया है, जो USB तकनीक के नियम तय करने वाली संस्था है। यह एक खुला मानक है, यानी कोई भी कंपनी इसे अपना सकती है। पावर डिलीवरी का इस्तेमाल USB-C पोर्ट के जरिए होता है।

इसका PD 3.0 वर्जन 100 वॉट तक और नया PD 3.1 वर्जन 240 वॉट तक की चार्जिंग सपोर्ट करता है, इसलिए यह फोन के साथ लैपटॉप भी चार्ज कर सकता है। इसके PPS यानी प्रोग्रामेबल पावर सप्लाई फीचर से वोल्टेज को बहुत छोटे छोटे हिस्सों में बदला जा सकता है।

इससे बैटरी कम गर्म होती है। सैमसंग के सुपर फास्ट चार्जिंग वाले फोन इसी PPS तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। आईफोन, गूगल पिक्सल, ज्यादातर नए एंड्रॉइड फोन, टैबलेट और लैपटॉप इस तकनीक को सपोर्ट करते हैं।

क्वालकॉम क्विक चार्ज क्या है?

क्विक चार्ज चिप बनाने वाली कंपनी क्वालकॉम की अपनी तकनीक है। यह मुख्य रूप से स्नैपड्रैगन प्रोसेसर वाले एंड्रॉइड फोन में मिलती है। इसके पुराने वर्जन जैसे क्विक चार्ज 3.0 USB-A पोर्ट वाले चार्जर में भी चलते थे और आमतौर पर फोन को 18 वॉट तक की चार्जिंग देते थे।

Quick Charge 4+ से क्वालकॉम ने इसे पावर डिलीवरी के साथ काम करने लायक बना दिया। क्विक चार्ज 5 भी पावर डिलीवरी के PPS पर आधारित है और 100 वॉट से ज्यादा की चार्जिंग का दावा करता है।

दोनों में मुख्य अंतर

सबसे बड़ा फर्क मालिकाना हक का है। Power Delivery सबके लिए खुला मानक है, जबकि क्विक चार्ज एक कंपनी की अपनी तकनीक है। दूसरा फर्क पोर्ट का है। पावर डिलीवरी सिर्फ USB-C पर चलती है, जबकि क्विक चार्ज के पुराने वर्जन USB-A पर भी काम करते हैं। यूरोपीय संघ के कॉमन चार्जर नियम में भी फास्ट चार्जिंग के लिए USB पावर डिलीवरी को जरूरी बनाया गया है।

Power Delivery Quick Charge
Power Delivery Quick Charge

कौन सा चार्जर खरीदें?

अगर आपके पास आईफोन, पिक्सल, सैमसंग या लैपटॉप है, तो USB-C वाला Power Delivery चार्जर सबसे अच्छा विकल्प है। सैमसंग फोन के लिए PPS सपोर्ट वाला चार्जर लें। चार्जर के साथ अच्छी क्वालिटी की USB-C केबल भी जरूरी है, क्योंकि 60 वॉट से ज्यादा चार्जिंग के लिए खास केबल चाहिए होती है। BIS मार्क वाले भरोसेमंद ब्रांड का चार्जर ही खरीदें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या Power Delivery चार्जर हर फोन को चार्ज कर सकता है?

हां, USB-C वाले लगभग हर फोन को यह चार्ज करेगा। अगर फोन इसे सपोर्ट नहीं करता, तो सामान्य स्पीड से चार्जिंग होगी।

2. क्या क्विक चार्ज वाला चार्जर आईफोन के लिए ठीक है?

पुराने क्विक चार्ज चार्जर से आईफोन धीमी गति से चार्ज होगा। आईफोन की फास्ट चार्जिंग के लिए USB-C पावर डिलीवरी चार्जर चाहिए।

3. क्या ज्यादा वॉट वाला Power Delivery चार्जर फोन को नुकसान पहुंचाता है?

नहीं, फोन उतनी ही बिजली लेता है जितनी वह सुरक्षित रूप से ले सकता है। 65 वॉट का चार्जर 25 वॉट वाले फोन को भी सुरक्षित चार्ज करेगा।

4. PPS क्या होता है?

यह Power Delivery का एक फीचर है, जिसमें वोल्टेज को छोटे छोटे हिस्सों में बदला जाता है, ताकि चार्जिंग तेज हो और बैटरी कम गर्म हो।

5. USB मानकों की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?

USB पावर डिलीवरी से जुड़ी आधिकारिक जानकारी USB-IF की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। चार्जर खरीदने से पहले अपने फोन की चार्जिंग स्पेसिफिकेशन जरूर देखें।

आगे और समाचार पढ़े:

फोन गर्म होना कितना सामान्य: फोन चार्ज करते समय गर्म होना नॉर्मल है या खतरे की घंटी? आसान भाषा में समझिए

पावर बैंक की असली क्षमता: आपका Power Bank नकली है या असली? घर बैठे ऐसे चेक करें उसकी रियल कैपेसिटी

नई बैटरी तकनीक: मोबाइल बैटरी की दुनिया में बड़ा बदलाव, जानिए सिलिकॉन कार्बन तकनीक से क्या होता है फायदा

‘जनता सरकार चुनती है, सरकार जनता को नहीं’: CJP ने INDIA गठबंधन की 1 नवंबर की रैली का किया समर्थन

भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार, ₹22 लाख करोड़ तक पहुंचा कारोबार

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पीएम मोदी का सवाल, विपक्ष की रणनीति पर तेज हुई सियासी बहस

WhatsApp Group
Join Now
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular