Ramsar Sites यानी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां, और भारत में इनकी संख्या अब 103 तक पहुंच गई है। अक्टूबर 2026 में चंडीगढ़ की सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश की सौज झील को यह दर्जा मिला। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों से लेकर प्रकृति प्रेमियों तक, हर कोई जानना चाहता है कि ये साइट्स क्या होती हैं और इस साल कौन सी नई जगहें जुड़ीं।
Ramsar Sites क्या होती है?
जब किसी झील, दलदल, नदी के बाढ़ क्षेत्र या तटीय इलाके को रामसर कन्वेंशन के तहत “अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि” घोषित किया जाता है, तो उसे रामसर साइट कहते हैं। इसका मकसद ऐसी जगहों का संरक्षण और समझदारी से उपयोग करना है। यह संधि 1971 में ईरान के शहर रामसर में हुई थी। इसी याद में हर साल 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है।
भारत और रामसर कन्वेंशन
भारत 1 फरवरी 1982 को इस संधि का सदस्य बना। देश की पहली दो रामसर साइट्स ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान थीं, जिन्हें 1981 में यह दर्जा मिला था। 2014 में भारत के पास सिर्फ 26 ऐसी साइट्स थीं।
अब यह संख्या लगभग चार गुना होकर 103 हो चुकी है, जो 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फैली हैं। संख्या के हिसाब से भारत एशिया में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
2026 में जुड़ीं नई Ramsar Sites
यह साल भारत के लिए खास रहा, क्योंकि इसमें कुल सात नई आर्द्रभूमियां सूची में जुड़ीं और देश ने 100 का आंकड़ा भी पार किया। फरवरी 2026 में गुजरात के कच्छ की छारी ढंड और उत्तर प्रदेश के एटा जिले का पटना पक्षी विहार जोड़े गए, जिससे संख्या 98 हुई। छारी ढंड बन्नी घास के मैदान और कच्छ के रण के बीच एक मौसमी खारी आर्द्रभूमि है, जहां हर साल हजारों कॉमन क्रेन आते हैं।
अप्रैल में उत्तर प्रदेश की शेखा झील पक्षी विहार 99वीं साइट बनी। जून में बलिया की सुरहा ताल, जिसे जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार भी कहते हैं, भारत की 100वीं रामसर साइट बनी। 3 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील 101वीं साइट बनी। यह कमलांग टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित है और राज्य की पहली रामसर साइट है।
सुखना वेटलैंड और सौज झील की खासियत
चंडीगढ़ की सुखना वेटलैंड शिवालिक की तलहटी में 1958 में बनी एक मानव निर्मित झील है। यह मध्य एशियाई उड़ान मार्ग पर प्रवासी पक्षियों का अहम पड़ाव है और यहां लुप्तप्राय पलास फिश ईगल भी दिखता है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की सौज झील गंगा के मैदानी इलाके की एक उथली बारहमासी झील है। यहां 30,000 से ज्यादा जलपक्षी आते हैं, जिनमें सारस क्रेन भी शामिल है।
इसके साथ मैनपुरी देश का पहला ऐसा जिला बन गया है जहां दो Ramsar Sites हैं। दूसरी साइट समान पक्षी विहार है। राज्यवार स्थिति और कुछ रोचक तथ्य सबसे ज्यादा 20 रामसर साइट्स तमिलनाडु में हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 14 साइट्स के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

इस साल जुड़ी सात में से चार साइट्स अकेले उत्तर प्रदेश की हैं। पश्चिम बंगाल की सुंदरबन वेटलैंड क्षेत्रफल में देश की सबसे बड़ी रामसर साइट है। वहीं हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील सबसे छोटी साइट्स में गिनी जाती है।
ये आर्द्रभूमियां हमारे लिए क्यों जरूरी हैं?
आर्द्रभूमियां बाढ़ के पानी को सोखती हैं, भूजल को रिचार्ज करती हैं और पानी को प्राकृतिक रूप से साफ करती हैं। ये कार्बन भी जमा करती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद मिलती है। मछुआरों, किसानों और स्थानीय समुदायों की रोजी रोटी भी इन्हीं पर टिकी होती है। Ramsar Sites की सूची में शामिल होने से इनके संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान जाता है और इको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत में अभी कुल कितनी Ramsar Sites हैं?
अक्टूबर 2026 तक भारत में कुल 103 रामसर साइट्स हैं।
2. भारत की 100वीं Ramsar Sites कौन सी है?
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की सुरहा ताल, यानी जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार, भारत की 100वीं रामसर साइट है।
3. किस राज्य में सबसे ज्यादा Ramsar Sites हैं?
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 20 साइट्स हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है।
4. 2026 में सबसे नई Ramsar Sites कौन सी हैं?
अक्टूबर 2026 में जुड़ी चंडीगढ़ की सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश की सौज झील सबसे नई साइट्स हैं। पूरी आधिकारिक जानकारी PIB पर देखी जा सकती है।
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