उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल और मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के बीच मंच पर हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी को फटकार लगाने के मामले में मंत्री सुबोध उनियाल ने अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर गायक की तबीयत खराब थी, तो उन्हें कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए नहीं आना चाहिए था। मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और मनोरंजन जगत में बहस तेज हो गई है।
मंच पर प्रस्तुति को लेकर उठा विवाद
यह पूरा मामला उत्तराखंड के नरेंद्रनगर क्षेत्र में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का है। रविवार रात आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दलेर मेहंदी प्रस्तुति देने पहुंचे थे। इसी दौरान मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और गायक की प्रस्तुति को लेकर नाराजगी जाहिर की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
मंत्री ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि दलेर मेहंदी एक बड़े कलाकार हैं और उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। लेकिन प्रस्तुति के दौरान उन्हें लगा कि गायक लाइव गाने के बजाय केवल लिप-सिंक कर रहे हैं। उनियाल के मुताबिक, स्थानीय जनप्रतिनिधि होने और आयोजन समिति से जुड़े होने के कारण लोगों की ओर से भी इस मामले पर सवाल उठाने का दबाव था।
35 लाख रुपये भुगतान का भी किया जिक्र
सुबोध उनियाल ने अपने बयान में कार्यक्रम के खर्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कलाकार को 35 लाख रुपये का पूरा भुगतान पहले से करने के लिए कहा गया था और होटल की व्यवस्था भी पहले ही कर दी गई थी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका दलेर मेहंदी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और न ही उनका उद्देश्य कलाकार को ठेस पहुंचाना था।
उनियाल के अनुसार, जब उन्हें पता चला कि गायक की तबीयत ठीक नहीं थी, तब उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी हस्ती को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में आयोजकों को पहले ही जानकारी देनी चाहिए थी। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कलाकार की प्रतिष्ठा बनाए रखनी है, तो उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप काम भी करना चाहिए।
हालांकि, मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय उन्हें दलेर मेहंदी की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि गायक बोलने और चलने में असहज दिखाई दे रहे थे। उस समय उन्हें कुछ गलत होने का संदेह हुआ, लेकिन किसी चिकित्सकीय जांच के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं था।
कांग्रेस ने मांगी सार्वजनिक माफी
इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस ने मंत्री के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने कहा कि दलेर मेहंदी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और उत्तराखंड की अतिथि-सत्कार की परंपरा के अनुरूप नहीं है।
विपक्ष का कहना है कि किसी कलाकार की प्रस्तुति को लेकर असंतोष हो सकता है, लेकिन उसे सार्वजनिक मंच पर अपमानित करने के बजाय बातचीत के माध्यम से मामला सुलझाया जाना चाहिए था।
कई कलाकार दलेर मेहंदी के समर्थन में आए
विवाद के बीच मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने दलेर मेहंदी का समर्थन किया है। अभिनेता अनुपम खेर, कॉमेडियन वीर दास और गायक शान, पलाश सेन, गुरदास मान तथा अलीशा चिनॉय सहित कई कलाकारों ने उनके प्रति समर्थन जताया।
अनुपम खेर ने कहा कि वह दलेर मेहंदी को लंबे समय से जानते हैं और उनके मुताबिक गायक पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह बोलने को अनुचित बताया और दलेर मेहंदी के प्रति सहानुभूति जताई।
वहीं, दलेर मेहंदी के भाई और गायक मीका सिंह ने भी अपने बड़े भाई का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि दलेर मेहंदी की बड़ी सर्जरी हुई थी। हालांकि, उनकी बीमारी और सर्जरी की प्रकृति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।
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सम्मान और जिम्मेदारी पर छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने कलाकारों के सम्मान, आयोजकों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मंत्री का तर्क है कि कार्यक्रम के लिए भुगतान करने वाले आयोजकों और दर्शकों को अच्छी प्रस्तुति की अपेक्षा रखने का अधिकार है। दूसरी ओर, कलाकारों और उनके समर्थकों का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि क्या प्रस्तुति को लेकर नाराजगी जताने का तरीका उचित था। सुबोध उनियाल ने अपने रुख का बचाव किया है, जबकि कांग्रेस और मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

