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फोन में HDR10+ Display क्या होता है? जानिए कैसे बदल देता है वीडियो देखने का अनुभव

HDR10+ Display एक ऐसी स्क्रीन तकनीक है, जो वीडियो के हर सीन के हिसाब से रोशनी, कंट्रास्ट और रंगों को अपने आप एडजस्ट करके तस्वीर को ज्यादा असली और चमकदार बना देती है। आजकल मिड रेंज से लेकर फ्लैगशिप फोन तक, स्पेसिफिकेशन लिस्ट में यह नाम खूब दिखता है। लेकिन ज्यादातर खरीदार नहीं जानते कि इसका असली फायदा क्या है और क्या यह सच में फर्क डालता है। कई बार लोग इसे बस एक मार्केटिंग शब्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

एचडीआर का मतलब क्या है?

एचडीआर यानी हाई डायनेमिक रेंज, जिसका मतलब है एक ही तस्वीर में सबसे गहरे अंधेरे और सबसे तेज रोशनी के बीच ज्यादा बारीकियां दिखाना। सामान्य स्क्रीन पर धूप वाला आसमान अक्सर सफेद धब्बा और छाया वाला हिस्सा काला दिखता है। एचडीआर स्क्रीन पर बादलों की बनावट और अंधेरे कोने की चीजें, दोनों एक साथ साफ नजर आती हैं। इससे वीडियो आंखों से देखे गए असली दृश्य के ज्यादा करीब लगता है।

HDR10+ Display कैसे काम करता है?

हर एचडीआर वीडियो के साथ कुछ अतिरिक्त जानकारी आती है, जिसे मेटाडेटा कहते हैं। यह स्क्रीन को बताता है कि तस्वीर कितनी चमकदार और कितने गहरे रंगों वाली दिखानी है। साधारण एचडीआर10 में यह जानकारी पूरी फिल्म के लिए एक ही बार तय होती है, जिसे स्टैटिक मेटाडेटा कहते हैं।

प्लस वाले वर्जन में यह जानकारी हर सीन या हर फ्रेम के लिए अलग होती है, जिसे डायनेमिक मेटाडेटा कहा जाता है। इसका फायदा यह है कि अंधेरी गुफा वाले सीन में स्क्रीन बारीकियां उभारती है और तेज धूप वाले सीन में चमक बढ़ा देती है। नतीजा हर सीन में संतुलित और जीवंत तस्वीर मिलती है।

किसने बनाई यह तकनीक?

इस फॉर्मेट को सैमसंग ने 2017 में अमेजन के साथ मिलकर पेश किया था। इसकी खासियत है कि यह रॉयल्टी फ्री है, यानी कंपनियों को इसके लिए कोई लाइसेंस फीस नहीं देनी पड़ती। यही वजह है कि यह कई एंड्रॉयड फोन, स्मार्ट टीवी और स्ट्रीमिंग ऐप में तेजी से फैला। यह 10 बिट रंगों को सपोर्ट करता है, यानी स्क्रीन एक अरब से ज्यादा रंग शेड दिखा सकती है।

एचडीआर10 और डॉल्बी विजन से कैसे अलग है?

साधारण एचडीआर10 सबसे बुनियादी फॉर्मेट है, जिसमें पूरे वीडियो के लिए एक ही सेटिंग रहती है। इसलिए कुछ सीन जरूरत से ज्यादा चमकीले या फीके लग सकते हैं। डॉल्बी विजन भी डायनेमिक मेटाडेटा देता है और 12 बिट तक रंग सपोर्ट करता है, लेकिन इसके लिए कंपनियों को लाइसेंस फीस देनी होती है। असल इस्तेमाल में फोन की छोटी स्क्रीन पर इन दोनों प्रीमियम फॉर्मेट का फर्क काफी कम महसूस होता है।

HDR10+ Display
HDR10+ Display

फोन में इसका असली फायदा कब मिलता है?

इसका फायदा तभी मिलता है, जब आप इसी फॉर्मेट में बना कंटेंट देखते हैं। प्राइम वीडियो जैसी कुछ स्ट्रीमिंग सेवाएं और कुछ वीडियो प्लेटफॉर्म ऐसे वीडियो उपलब्ध कराते हैं। कई फोन का कैमरा भी इसी फॉर्मेट में वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है, जिससे आपके अपने वीडियो ज्यादा जीवंत दिखते हैं। सामान्य सोशल मीडिया वीडियो या चैट में इसका कोई खास असर नहीं दिखता।

ध्यान रखें कि सिर्फ यह लेबल होना काफी नहीं है। स्क्रीन की पीक ब्राइटनेस कम हो, तो एचडीआर का असर भी हल्का रह जाता है, इसलिए अच्छी ओएलईडी स्क्रीन और ज्यादा निट्स वाली ब्राइटनेस भी देखें। निष्कर्ष अगर आप फोन पर फिल्में, वेब सीरीज या एचडीआर वीडियो ज्यादा देखते हैं, तो HDR10+ Display वाला फोन एक अच्छा फायदा देता है। लेकिन इसके साथ स्क्रीन की क्वालिटी और ब्राइटनेस को भी उतना ही महत्व दें।

डिस्प्ले से जुड़े ये लेख भी पढ़ें: पीक ब्राइटनेस और निट्स का पूरा गणित, स्मार्टफोन में पीडब्ल्यूएम डिमिंग क्या है और नया टीवी या मॉनिटर खरीदने से पहले क्या देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या फोन में HDR10+ Display सपोर्ट जरूरी है?

अगर आप फोन पर ज्यादा वीडियो और फिल्में देखते हैं, तो यह काफी फायदेमंद है। सिर्फ कॉलिंग, चैट और सोशल मीडिया के लिए यह जरूरी नहीं है।

2. क्या हर वीडियो HDR10+ Display में दिखेगा?

नहीं, केवल वही वीडियो एचडीआर में दिखेंगे जो इस फॉर्मेट में बनाए गए हैं। सामान्य वीडियो पहले जैसे ही दिखेंगे।

3. क्या HDR10+ Display से बैटरी ज्यादा खर्च होती है?

हां, एचडीआर वीडियो चलाते समय स्क्रीन की ब्राइटनेस बढ़ती है, इसलिए बैटरी थोड़ी ज्यादा खर्च हो सकती है।

4. फोन में HDR10+ Display फीचर है या नहीं, कैसे पता करें?

फोन के आधिकारिक स्पेसिफिकेशन में डिस्प्ले वाले हिस्से में HDR10+ Display का जिक्र होता है। कई फोन की डिस्प्ले सेटिंग में भी एचडीआर से जुड़ा विकल्प दिखता है।

5. HDR10+ Display फॉर्मेट की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?

इस फॉर्मेट के मानक, सर्टिफिकेशन और सपोर्ट करने वाले डिवाइस की जानकारी इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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