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Plastic Waste Management Policy: क्या हैं सरकार के नए नियम और हम पर इनका क्या असर है?

Plastic Waste Management Policy भारत सरकार का वह नियम ढांचा है, जो तय करता है कि देश में प्लास्टिक कैसे बनेगा, कैसे इस्तेमाल होगा और इस्तेमाल के बाद उसका कचरा कहां जाएगा। हम रोज दूध की थैली, बिस्कुट का पैकेट या पानी की बोतल इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इनके कचरे की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। मार्च 2026 में सरकार ने इन नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

Plastic Waste Management Policy क्या है?

इसकी नींव प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 से पड़ी, जिसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने लागू किया था। इसका मकसद लैंडफिल, नदियों, समुद्र और सार्वजनिक जगहों पर फैल रहे प्लास्टिक को कम करना है।

इसके लिए कंपनियों को उनके प्लास्टिक के आखिरी निपटान तक जिम्मेदार बनाया गया। 2016 के बाद इन नियमों में कई बार संशोधन हुए। 2021, 2022 और 2024 के बदलावों के बाद अब 2026 का संशोधन इसी कड़ी का अगला कदम है।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन

Plastic Waste Management Policy के तहत 1 जुलाई 2022 से देश में चुनिंदा सिंगल यूज प्लास्टिक आइटम पर पूरी तरह रोक है। इसमें प्लास्टिक की स्ट्रॉ, कप, प्लेट, चम्मच, ईयरबड की डंडी, गुब्बारे की स्टिक और थर्मोकोल की सजावट जैसी चीजें शामिल हैं।

31 दिसंबर 2022 से 120 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक कैरी बैग बनाना, बेचना और इस्तेमाल करना भी प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत जुर्माना और कार्रवाई हो सकती है। नगर निगम और नगर पालिकाएं भी अपने स्तर पर चालान काटती हैं।

EPR यानी कंपनियों की जिम्मेदारी

इस नीति का सबसे अहम हिस्सा Extended Producer Responsibility यानी EPR है। इसके तहत प्लास्टिक पैकेजिंग बनाने वाली कंपनी, आयातक और ब्रांड मालिक, जिन्हें PIBO कहा जाता है, अपने प्लास्टिक को वापस इकट्ठा कराने और रीसायकल कराने के जिम्मेदार हैं।

इन कंपनियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के EPR पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। हर साल के लक्ष्य और उनकी पूर्ति का हिसाब भी यहीं दर्ज होता है। पैकेजिंग को चार कैटेगरी में बांटा गया है। कैटेगरी I में कड़ा प्लास्टिक, कैटेगरी II में लचीला प्लास्टिक, कैटेगरी III में मल्टीलेयर पैकेजिंग और कैटेगरी IV में कम्पोस्टेबल प्लास्टिक आता है।

2026 संशोधन में क्या बदला?

पर्यावरण मंत्रालय ने 31 मार्च 2026 को प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए। इनमें रीसायकल प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर सबसे बड़ा बदलाव हुआ है। अब कैटेगरी I की कड़ी पैकेजिंग में कम से कम 30% रीसायकल प्लास्टिक होना जरूरी है। यह लक्ष्य धीरे-धीरे बढ़कर 2028-29 तक 60% हो जाएगा। लचीली और मल्टीलेयर पैकेजिंग के लिए लक्ष्य कम रखे गए हैं, जो हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ेंगे।

कम्पोस्टेबल प्लास्टिक के लिए CPCB का सर्टिफिकेट अनिवार्य है। जो कंपनियां 2025-26 का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाईं, वे इस कमी को अगले तीन साल तक आगे ले जा सकती हैं। इससे उद्योग को कुछ राहत मिली है। जहां FSSAI जैसे दूसरे नियम रीसायकल प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं, वहां छूट दी गई है। खाने-पीने की चीजों, दवाओं और कीटनाशकों की पैकेजिंग इसके उदाहरण हैं।

एंड ऑफ लाइफ डिस्पोजल और नया ऑडिट सिस्टम

जो प्लास्टिक रीसायकल नहीं हो सकता, उसके लिए एंड ऑफ लाइफ डिस्पोजल को साफ तौर पर परिभाषित किया गया है। इसमें सीमेंट और स्टील उद्योग में को-प्रोसेसिंग, वेस्ट टू एनर्जी, वेस्ट टू ऑयल और सड़क निर्माण शामिल हैं। प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसर की परिभाषा भी बढ़ाई गई है।

अब इसमें रीसायकलर के साथ एंड ऑफ लाइफ निपटान करने वाली इकाइयां भी आती हैं। EPR की जांच के लिए पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025 के तहत रजिस्टर्ड एनवायरनमेंट ऑडिटर को भी मान्यता मिली है। इससे वेरिफिकेशन का काम तेज होने की उम्मीद है।

Plastic Waste Management Policy
Plastic Waste Management Policy

आम लोगों और कारोबारियों पर Plastic Waste Management Policy का असर

आम नागरिक के लिए इसका मतलब है कि बाजार की बोतलों और डिब्बों में धीरे-धीरे रीसायकल प्लास्टिक बढ़ेगा। साथ ही गीला और सूखा कचरा अलग करके देना हर घर की जिम्मेदारी है। छोटे दुकानदारों को पतली पन्नी और बैन आइटम बेचने से बचना चाहिए। कपड़े या जूट के थैले रखना सबसे आसान और सस्ता विकल्प है।

रीसायकलिंग और वेस्ट प्रोसेसिंग से जुड़े कारोबार के लिए यह बड़ा मौका है, क्योंकि रीसायकल प्लास्टिक की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। हालांकि जानकारों का मानना है कि कई नगर निकायों के पास स्टाफ और तकनीक की कमी है। Plastic Waste Management Policy की असली सफलता इसी पर टिकी है कि जमीन पर नियम कितनी सख्ती से लागू होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Plastic Waste Management Policy किस मंत्रालय के तहत आती है?

यह केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आती है। इसकी निगरानी CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करते हैं।

2. Plastic Waste Management Policy के तहत  भारत में कितने माइक्रोन से पतले कैरी बैग पर बैन है?

31 दिसंबर 2022 से 120 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक कैरी बैग पर पूरे देश में रोक है।

3. Plastic Waste Management Policy के तहत  प्लास्टिक कचरा प्रबंधन संशोधन नियम 2026 कब जारी हुए?

पर्यावरण मंत्रालय ने इन्हें 31 मार्च 2026 को अधिसूचित किया था।

4. Plastic Waste Management Policy के तहत कड़ी प्लास्टिक पैकेजिंग में कितना रीसायकल प्लास्टिक जरूरी है?

कैटेगरी I की पैकेजिंग में अभी 30% रीसायकल प्लास्टिक जरूरी है, जो 2028-29 तक बढ़कर 60% हो जाएगा।

5. कंपनियां EPR रजिस्ट्रेशन कहां करती हैं?

कंपनियां CPCB के ऑनलाइन EPR पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करती हैं और वहीं सालाना रिटर्न भी भरती हैं।

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