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सही एसेट एलोकेशन से कैसे बचाएं अपना पोर्टफोलियो? जानिए निवेश का पूरा गणित!

Asset Allocation का मतलब है अपने निवेश के पैसे को शेयर, डेट, सोना और कैश जैसी अलग अलग संपत्तियों में एक तय अनुपात में बांटना, ताकि जोखिम कम रहे और लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सके। सीधी भाषा में कहें तो सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखना। बहुत से लोग सिर्फ यह सोचते हैं कि कौन सा शेयर या फंड खरीदें। लेकिन असल सवाल यह है कि कुल पैसे का कितना हिस्सा कहां लगाया जाए?

Asset Allocation में शामिल मुख्य एसेट

क्लास इक्विटी यानी शेयर शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबे समय में महंगाई को मात देने वाला रिटर्न दे सकते हैं। लेकिन इनमें उतार चढ़ाव सबसे ज्यादा होता है। डेट यानी स्थिर आय वाले विकल्प FD, PPF, सरकारी बॉन्ड और डेट फंड इस श्रेणी में आते हैं।

इनमें रिटर्न कम लेकिन ज्यादा स्थिर होता है और ये पोर्टफोलियो को संतुलन देते हैं। सोना गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प अक्सर तब सहारा देते हैं, जब शेयर बाजार गिरता है या महंगाई बढ़ती है।

कैश और अन्य विकल्प

बचत खाता और लिक्विड फंड इमरजेंसी के लिए जरूरी हैं। कुछ निवेशक रियल एस्टेट या REIT को भी अपने पोर्टफोलियो में जगह देते हैं। पोर्टफोलियो में इसका महत्व हर एसेट क्लास एक ही समय पर एक जैसा प्रदर्शन नहीं करती। जब शेयर गिरते हैं, तब कई बार सोना या डेट नुकसान को संभाल लेते हैं।

सही Asset Allocation से बाजार की बड़ी गिरावट में भी पूरा पोर्टफोलियो नहीं डूबता। इससे निवेशक घबराकर गलत समय पर पैसा निकालने से भी बचता है। यह तरीका आपके लक्ष्य को केंद्र में रखता है। घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट, हर लक्ष्य के लिए अलग समय सीमा और अलग मिश्रण तय किया जा सकता है।

बंटवारा तय करने वाले जरूरी पहलू

उम्र, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और आर्थिक लक्ष्य सबसे अहम कारक हैं। एक पुराना और आसान फॉर्मूला है कि 100 में से अपनी उम्र घटाएं, जो संख्या बचे उतना प्रतिशत इक्विटी में रखें। जैसे 30 साल का व्यक्ति करीब 70 प्रतिशत इक्विटी में रख सकता है। यह सिर्फ शुरुआती अंदाजा है, हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता।

एक आसान उदाहरण से Asset Allocation समझें

मान लीजिए आपके पास 1 लाख रुपये हैं और आपने 60 प्रतिशत इक्विटी, 30 प्रतिशत डेट और 10 प्रतिशत सोने में निवेश करने का फैसला किया। यानी 60 हजार शेयर फंड में, 30 हजार डेट में और 10 हजार गोल्ड में। एक साल बाद शेयर बाजार तेजी से चढ़ा और इक्विटी का हिस्सा 70 प्रतिशत हो गया। अब जोखिम आपकी योजना से ज्यादा है।

रीबैलेंसिंग क्यों जरूरी है?

ऊपर वाले उदाहरण में बढ़े हुए इक्विटी हिस्से का कुछ भाग बेचकर डेट और सोने में डालने को रीबैलेंसिंग कहते हैं। इससे पोर्टफोलियो फिर से तय अनुपात में आ जाता है। साल में एक बार या अनुपात 5 प्रतिशत से ज्यादा बिगड़ने पर रीबैलेंसिंग करना एक व्यावहारिक तरीका माना जाता है। बेचने से पहले टैक्स और एग्जिट लोड जरूर देख लें।

Asset Allocation
Asset Allocation

संपत्ति बंटवारे की प्रमुख रणनीतियां

स्ट्रैटेजिक तरीके में लंबे समय के लिए एक तय अनुपात रखा जाता है। टैक्टिकल तरीके में बाजार की स्थिति के हिसाब से थोड़े समय के लिए बदलाव किए जाते हैं। जो निवेशक खुद यह काम नहीं करना चाहते, वे बैलेंस्ड एडवांटेज फंड या मल्टी एसेट एलोकेशन फंड चुन सकते हैं, जिनमें फंड मैनेजर यह संतुलन संभालता है।

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उम्र के हर पड़ाव पर पैसों की सही रणनीति समझने के लिए पढ़ें 20s, 30s और 40s में फाइनेंशियल प्लानिंग। देश में म्यूचुअल फंड निवेश का बढ़ता रुझान जानें SIP और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ताजा रिपोर्ट में। निवेश के एक नए विकल्प और उसके जोखिम समझने के लिए देखें P2P Lending कैसे काम करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Asset Allocation क्या है?

यह निवेश की रकम को इक्विटी, डेट, सोना और कैश जैसी अलग अलग एसेट क्लास में तय अनुपात में बांटने की रणनीति है, ताकि जोखिम और रिटर्न में संतुलन बना रहे।

2. क्या डायवर्सिफिकेशन और Asset Allocationएक ही चीज है?

नहीं। एसेट एलोकेशन यह तय करता है कि किस एसेट क्लास में कितना पैसा जाए, जबकि डायवर्सिफिकेशन एक ही एसेट क्लास के अंदर कई अलग अलग विकल्पों में पैसा फैलाना है।

3. पोर्टफोलियो को कितनी बार Asset Allocation रीबैलेंस करना चाहिए?

आमतौर पर साल में एक बार या जब किसी एसेट का हिस्सा तय अनुपात से काफी बदल जाए, तब रीबैलेंसिंग करना बेहतर माना जाता है।

4. नए निवेशक के लिए सबसे आसान तरीका क्या है?

शुरुआत में इमरजेंसी फंड बनाएं, फिर इक्विटी और डेट का सरल मिश्रण रखें। खुद संभालना मुश्किल लगे तो हाइब्रिड फंड एक आसान विकल्प हो सकता है।

5. Asset Allocation और सुरक्षित निवेश की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?

निवेशकों के लिए जागरूकता सामग्री और नियमों की जानकारी बाजार नियामक SEBI की निवेशक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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उपरोक्त Asset Allocation की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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