नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच कांग्रेस ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने इस दिन को “लोकतंत्र के लिए काला दिवस” बताते हुए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर तक विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही है। इसी बीच दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
चुनाव आयोग के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई
बुधवार को विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच हुए गतिरोध के बाद गुरुवार सुबह नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। Sansad Marg और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सीईसी ज्ञानेश कुमार की मौजूदा Z+ सुरक्षा व्यवस्था को भी और मजबूत किया गया है। उनके आवास, चुनाव आयोग कार्यालय और व्यक्तिगत सुरक्षा में अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है।
दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में अगले कुछ दिनों के लिए अतिरिक्त CAPF कर्मियों को लगाया जा रहा है, क्योंकि विपक्षी प्रदर्शन और शनिवार को प्रस्तावित अन्य विरोध कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
कांग्रेस ने देशव्यापी प्रदर्शन का किया ऐलान
कांग्रेस ने बुधवार को घोषणा की कि 8 अक्टूबर को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उसकी मांगों को लेकर होगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी के कार्यक्रम में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन शामिल हैं। कांग्रेस ने इसे “Black Day for Democracy” के रूप में आयोजित करने की घोषणा की है।
दो दिनों में कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए
यह विरोध प्रदर्शन पिछले दो दिनों में कई चरणों में सामने आया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के करीब 300 सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन के पास लगभग आठ घंटे तक धरना दिया। बाद में पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया था।
बुधवार को विपक्षी सांसदों ने एक बार फिर प्रदर्शन की कोशिश की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से आयोजित लंच बैठक के बाद विपक्षी नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़े। रिपोर्टों के अनुसार, सांसदों से भरी तीन बसों को अशोक रोड के पास रोका गया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस ने 91 INDIA ब्लॉक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने की जानकारी दी।
पुलिस ने BNSS की धारा 163 का दिया हवाला
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए नई दिल्ली इलाके में लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत बिना अनुमति मार्च और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन प्रतिबंधों का पालन जरूरी था।
वहीं विपक्षी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और चुनाव आयोग तक पहुंचने से उन्हें रोका गया। विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर जवाब और हस्तक्षेप की मांग की है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना तथा डुप्लीकेट, मृत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। इस विवाद पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।
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राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की भी योजना बनाई है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 10 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलकर SIR और चुनाव आयोग से जुड़ी अपनी चिंताओं को सामने रख सकता है।
इस बीच विपक्ष ने साफ किया है कि वह आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। कांग्रेस के देशव्यापी प्रदर्शन और दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा के बीच अब नजर इस बात पर है कि गुरुवार को प्रदर्शन किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच संवाद की कोई नई पहल होती है।

