भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहे। रविवार को मुंबई और नई दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची को साफ-सुथरा और विश्वसनीय बनाने के लिए डुप्लीकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
मुंबई में बड़ी रैली, ठाकरे नेताओं ने संभाली कमान
रविवार को मुंबई में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इस रैली में महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख नेता राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की मांग वाले पोस्टर दिखाई दिए।
राज ठाकरे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए चुनावी प्रक्रिया में जनता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में सत्ता में कौन बैठेगा और विपक्ष में कौन रहेगा, इसका फैसला जनता को करना चाहिए, न कि चुनाव आयोग को।
मुंबई का यह प्रदर्शन इस आंदोलन के विस्तार का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में दिल्ली केंद्रित दिखाई दे रहा विरोध अब महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों तक पहुंच गया है।
दिल्ली में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी रविवार शाम प्रदर्शनकारी जुटने लगे। पुलिस ने पिछले दो दिनों की तरह इस दिन भी कुछ लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को बसों में ले जाया गया और बाद में कुछ लोगों को रिहा कर दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई के पीछे दिल्ली के मध्य क्षेत्र में बड़े जमावड़े पर लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया गया है। कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के आरोप में मामले भी दर्ज किए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस कार्रवाई से उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती। वहीं प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है।
मतदाता सूची संशोधन बना विवाद का केंद्र
पूरे विवाद की जड़ मतदाता सूची के विशेष संशोधन को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों का आरोप है कि संशोधन की प्रक्रिया में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका दावा है कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया, तो इसका चुनावी परिणामों पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी समूहों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों ने इस आरोप को खारिज किया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना है। आयोग के अनुसार, डुप्लीकेट, मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना नियमित चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई पात्र मतदाता गलती से सूची से बाहर रह गया है, तो उसका नाम दर्ज किया जाए।
ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का दबाव
प्रदर्शनकारी सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, कुमार ने इन विरोध प्रदर्शनों या इस्तीफे की मांग पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं को मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि मतदाता सूची को सटीक रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन
इस आंदोलन को विभिन्न विपक्षी दलों और युवा समूहों का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों के गठबंधन ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की योजना बनाई है। इस प्रस्तावित अभियान को ‘सेव डेमोक्रेसी’ यानी लोकतंत्र बचाओ आंदोलन के रूप में पेश किया जा रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। विपक्षी दल मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में हैं।
10 अक्टूबर को भी बड़े प्रदर्शन की तैयारी
विरोध का एक और बड़ा चरण 10 अक्टूबर को देखने को मिल सकता है। Gen Z से जुड़े Cockroach Janta Party (CJP) ने नई दिल्ली में बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।
CJP के प्रमुख अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर मुंबई के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए लोगों को एकजुट होना चाहिए। संगठन ने इसे व्यापक जन आंदोलन बनाने की अपील की है।
अगर आने वाले दिनों में विपक्षी दल और युवा संगठन एक साथ सड़क पर उतरते हैं, तो यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।
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चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ आयोग को मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित रखने की जिम्मेदारी निभानी है, वहीं दूसरी तरफ पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने की स्थिति में उनकी शिकायतों का समाधान करना भी जरूरी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी संस्थाओं पर जनता का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए विवाद को समाप्त करने के लिए पारदर्शिता, स्पष्ट आंकड़े और शिकायतों के त्वरित समाधान की भूमिका अहम हो सकती है।
फिलहाल तीसरे दिन के प्रदर्शन के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुंबई में हजारों लोगों का सड़कों पर उतरना और दिल्ली में लगातार हिरासत की कार्रवाई बताती है कि यह विवाद जल्द खत्म होने वाला नहीं है।
आने वाले दिनों में विपक्ष की प्रस्तावित रैलियां, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या सरकार और चुनाव आयोग प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को दूर करने में सफल होते हैं या यह मुद्दा और व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता है।

