दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हुए बेहद गंभीर घटनाक्रम के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार दुनिया भर में चर्चा में हैं। विमान के कॉकपिट में कथित तौर पर सह-पायलट के हमले के बावजूद मच्छार ने जिस तरह धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने सराहना की है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन मच्छार से वीडियो कॉल पर बातचीत की। इस दौरान मच्छार ने बताया कि संकट के उस बेहद दर्दनाक क्षण में वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।
मच्छार ने प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान बताया कि जब वह दर्द में होते हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और उस समय भी उन्होंने यही किया। उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने खुद को उठने और स्थिति संभालने के लिए मजबूर किया।
‘दर्द में हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’- स्मित 
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन मच्छार भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में हनुमान चालीसा उन्हें मानसिक मजबूती देती है। उनके मुताबिक, विमान के कॉकपिट में संकट के दौरान भी वह लगातार इसका पाठ कर रहे थे।
मच्छार ने प्रधानमंत्री से कहा कि उनके शरीर पर कई चोटें थीं, लेकिन उन्होंने खुद से कहा कि उन्हें उठना होगा और कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया, जिससे केबिन क्रू और यात्रियों को अंदर पहुंचने और स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली।
प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी बात सुनी और उनके साहस की सराहना की। मोदी ने कहा कि पूरा देश उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना कर रहा है।
विमान में आखिर हुआ क्या था?
यह घटना 30 सितंबर को फ्लायदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और उसमें 170 से अधिक लोग सवार थे।
रिपोर्टों के अनुसार, उड़ान के दौरान कॉकपिट में कैप्टन मच्छार और उनके ओमानी सह-पायलट के बीच गंभीर झड़प हुई। सह-पायलट पर मच्छार पर चाकू से हमला करने और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश करने का आरोप है। इस दौरान मच्छार गंभीर रूप से घायल हुए।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विमान की ऊंचाई तेजी से कम होने लगी। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और कुछ समय के दौरान तेजी से नीचे आया। ऐसे हालात में पायलट के सामने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विमान को नियंत्रण में रखने की दोहरी चुनौती थी।
घायल होने के बावजूद स्मित ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
कैप्टन मच्छार की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
दरवाजा खुलने के बाद केबिन क्रू और यात्रियों को स्थिति में हस्तक्षेप करने का मौका मिला। रिपोर्टों के अनुसार, विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी बाद में विमान को सुरक्षित रूप से उतारने में मदद की। विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई।
इस घटनाक्रम के कारण एक संभावित बड़ी विमान दुर्घटना टल गई। हालांकि घटना के पीछे सह-पायलट की कथित मंशा और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है।
पीएम मोदी ने बताया ‘हीरो’
घटना सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। मोदी ने कहा था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस और दृढ़ता दिखाई।
बाद में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि कैप्टन मच्छार ने धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा मच्छार की प्रशंसा का भी उल्लेख किया।
मोदी ने मच्छार के परिवार से भी बातचीत की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?
कैप्टन स्मित मच्छार भारतीय विमानन क्षेत्र के अनुभवी पायलट हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास 13 साल से अधिक का व्यावसायिक उड़ान अनुभव है और उन्होंने लगभग 9,750 घंटे उड़ान भरी है। वह मुख्य रूप से बोइंग 737 विमान उड़ाते रहे हैं।
फ्लायदुबई से जुड़ने से पहले मच्छार ने करीब 11 वर्षों तक स्पाइसजेट में काम किया था। उन्होंने 2022 में फ्लायदुबई में डायरेक्ट एंट्री कैप्टन के तौर पर काम शुरू किया। उनके अनुभव में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की भूमिका भी शामिल रही है।
‘मैं सिर्फ अपना कर्तव्य निभा रहा था’– स्मित
प्रधानमंत्री की ओर से मिली प्रशंसा के बाद मच्छार ने विनम्र प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ एक पायलट के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे थे और उनका ध्यान उन लोगों की सुरक्षा पर था, जिनकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।
यही वजह है कि उनकी कहानी केवल बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि अत्यधिक दबाव की स्थिति में पेशेवर जिम्मेदारी और मानसिक दृढ़ता की मिसाल के तौर पर भी सामने आई है।
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हनुमान चालीसा का जिक्र क्यों बना चर्चा का विषय?
मच्छार द्वारा हनुमान चालीसा का उल्लेख उनकी व्यक्तिगत आस्था और संकट के समय मानसिक सहारे से जुड़ा बयान है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि दर्द के समय वह इसका पाठ करते हैं और उस घटना के दौरान भी उन्होंने ऐसा किया।
इसके साथ ही, विमान सुरक्षा से जुड़े मूल घटनाक्रम की जांच अलग से जारी है। इसलिए मच्छार की धार्मिक आस्था के उल्लेख और विमान में हुई सुरक्षा घटना को अलग-अलग संदर्भों में देखना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल कैप्टन स्मित मच्छार अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उनके साहस की भारत और विदेशों में प्रशंसा हो रही है। एक पायलट के रूप में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्थिति संभालने की उनकी कोशिश ने उन्हें इस घटना का प्रमुख चेहरा बना दिया है।

