Rule of 72 एक आसान गणित का तरीका है, जिससे बिना कैलकुलेटर के यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपका निवेश कितने साल में दोगुना हो जाएगा। निवेश करते समय सबसे आम सवाल यही होता है कि पैसा कब तक दोगुना होगा। बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या कोई और योजना चुनते समय यह जानना फैसले को काफी आसान बना देता है।
Rule of 72 क्या है और इसका फॉर्मूला
इस नियम का फॉर्मूला बेहद सीधा है। 72 को सालाना रिटर्न की दर से भाग दीजिए, जो जवाब आएगा वही पैसा दोगुना होने में लगने वाले सालों की संख्या होगी। यानी साल = 72 ÷ सालाना ब्याज दर। अगर आपको 8 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिल रहा है, तो 72 ÷ 8 = 9, यानी करीब 9 साल में आपका पैसा दोगुना हो जाएगा। यह नियम चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग पर आधारित है, जिसमें ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। इसका जिक्र 1494 में इतालवी गणितज्ञ लूका पचोली की किताब में भी मिलता है।
अलग अलग निवेश पर कैसे लागू होता है?
मान लीजिए आपने करीब 7 प्रतिशत ब्याज वाली एफडी में पैसा लगाया है। 72 ÷ 7 से पता चलता है कि पैसा दोगुना होने में लगभग 10 साल लगेंगे। अगर किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड से लंबे समय में औसतन 12 प्रतिशत रिटर्न मिले, तो 72 ÷ 12 = 6, यानी करीब 6 साल में रकम दोगुनी हो सकती है। वहीं 4 प्रतिशत ब्याज वाले बचत खाते में यही काम होने में लगभग 18 साल लग जाएंगे। इससे साफ समझ आता है कि रिटर्न में थोड़ा सा फर्क भी लंबे समय में बड़ा अंतर पैदा करता है।
उल्टा भी काम करता है यह नियम
अगर आपको पता है कि पैसा कितने साल में दोगुना करना है, तो 72 को उन सालों से भाग देकर जरूरी रिटर्न निकाल सकते हैं। जैसे 8 साल में दोगुना करने के लिए लगभग 9 प्रतिशत सालाना रिटर्न चाहिए। यह तरीका लक्ष्य तय करने में बहुत काम आता है, जैसे बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट के लिए योजना बनाना।
महंगाई और कर्ज पर भी लागू
यह नियम सिर्फ निवेश बढ़ने के लिए नहीं, पैसे की कीमत घटने को समझने में भी मदद करता है। अगर महंगाई 6 प्रतिशत है, तो करीब 12 साल में आपके पैसे की खरीदने की ताकत आधी रह जाएगी। कर्ज के मामले में यह और भी चौंकाने वाला है। अगर क्रेडिट कार्ड का बकाया करीब 36 प्रतिशत सालाना ब्याज पर बढ़ रहा है, तो बिना भुगतान के यह सिर्फ 2 साल में दोगुना हो सकता है।

इस नियम की सीमाएं भी समझें
यह एक अनुमान है, सटीक गणना नहीं। यह 6 से 10 प्रतिशत के बीच की दरों पर सबसे ज्यादा सही बैठता है, जबकि बहुत ऊंची या बहुत कम दरों पर इसका अंतर बढ़ जाता है। शेयर बाजार से जुड़े निवेश में रिटर्न हर साल एक जैसा नहीं रहता। साथ ही टैक्स, फीस और महंगाई असली बढ़त को कम कर देते हैं, इसलिए बड़े फैसलों के लिए पूरा कैलकुलेशन जरूर करें।
निवेश से जुड़ी ये जानकारियां भी पढ़ें
Rule of 72 समझने के बाद ये गाइड भी आपके निवेश की योजना में मदद करेंगी: एसआईपी कैसे कैलकुलेट होती है, म्यूचुअल फंड में ग्रोथ और डिविडेंड ऑप्शन का अंतर और खर्च से पहले बचत करने की आदत कैसे डालें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Rule of 72 से पैसा दोगुना होने का समय कैसे निकालें?
72 को अपने निवेश की सालाना ब्याज दर से भाग दें। जैसे 9 प्रतिशत रिटर्न पर 72 ÷ 9 = 8 साल।
2. क्या Rule of 72 हर निवेश पर सही बैठता है?
यह कंपाउंडिंग वाले निवेश पर सबसे अच्छा काम करता है। साधारण ब्याज वाली योजनाओं पर इसका अनुमान गलत हो सकता है।
3. क्या Rule of 72 में टैक्स और महंगाई शामिल होते हैं?
नहीं, इसलिए असली बढ़त जानने के लिए टैक्स और महंगाई घटाकर मिलने वाली दर का इस्तेमाल करें।
4. Rule of 72 के बारे में और जानकारी कहां मिलेगी?
अलग अलग ब्याज दरों पर इसके उदाहरण एक विस्तृत लेख में देखे जा सकते हैं।
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म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

