देश में इंजीनियरिंग, मेडिकल और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। JEE, NEET और CUET जैसी प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार आयोजित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए मसौदे में परीक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलावों का सुझाव दिया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना और महंगी निजी कोचिंग पर उनकी निर्भरता को घटाना है।
हालांकि, फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्ट स्तर पर है। यानी इसे अंतिम नीति या लागू नियम नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव पर विशेषज्ञों की राय और आगे की प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से बदलाव कब से लागू किए जाएंगे।
NEET और CUET भी JEE Main की तर्ज पर?
मसौदे में सुझाव दिया गया है कि JEE Main को छोड़कर जिन प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन फिलहाल साल में एक बार होता है, उन्हें कम से कम दो बार आयोजित किया जाए। रिपोर्टों के मुताबिक NEET और CUET को भी JEE Main की तरह दो अवसर देने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था का मकसद छात्रों को एक ही परीक्षा पर निर्भर रहने की स्थिति से बाहर निकालना है। यदि किसी छात्र का पहला प्रयास उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता है, तो उसे दूसरे प्रयास में अपनी तैयारी के आधार पर प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, दोनों परीक्षाओं के बीच कितने अंतराल का प्रावधान होगा, दोनों प्रयासों में से स्कोर कैसे तय किया जाएगा और प्रवेश प्रक्रिया किस स्कोर के आधार पर होगी, इन सवालों पर अंतिम नियम आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कोचिंग पर निर्भरता कम करने की कोशिश
शिक्षा मंत्रालय ने यह मसौदा छात्रों की कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया है। इसके लिए केवल परीक्षा की संख्या बढ़ाने के बजाय स्कूली शिक्षा को भी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
मसौदे में स्कूली शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरतों के अनुरूप पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का सुझाव भी शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों को बुनियादी अवधारणाओं और प्रश्न हल करने की क्षमता विकसित करने के लिए केवल बाहरी कोचिंग पर निर्भर न रहना पड़े।
प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर की होगी समीक्षा
प्रस्ताव में प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर की नए सिरे से समीक्षा करने की बात भी कही गई है। छात्रों और अभिभावकों की ओर से अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ प्रश्न स्कूली पाठ्यक्रम या छात्रों के सामान्य शैक्षणिक स्तर से काफी कठिन होते हैं।
मसौदे में इस बात पर विचार करने का सुझाव है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय केवल NCERT पाठ्यक्रम को आधार न बनाया जाए, बल्कि देश के अलग-अलग शिक्षा बोर्डों के पाठ्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाए। इससे अलग-अलग राज्यों के बोर्ड से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में समान अवसर देने की कोशिश की जा सकती है।
छात्रों को क्या फायदा हो सकता है?
साल में दो बार परीक्षा कराने का सबसे सीधा असर छात्रों को मिलने वाले अतिरिक्त अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अभी जिस परीक्षा का आयोजन साल में एक बार होता है, उसमें खराब प्रदर्शन होने पर छात्र को अगले साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
दो प्रयास मिलने पर छात्र अपनी तैयारी और प्रदर्शन में सुधार का मौका पा सकते हैं। इससे एक परीक्षा को लेकर बनने वाला दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि, दो बार परीक्षा कराने से छात्रों को अतिरिक्त तैयारी, आवेदन और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े काम भी करने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, स्कूल स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को बेहतर बनाने का प्रस्ताव लागू होता है तो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी तैयारी के संसाधनों का अंतर कुछ हद तक कम करने की कोशिश की जा सकती है।
सरकार पहले भी परीक्षा व्यवस्था में बदलाव पर दे चुकी है जोर
परीक्षा प्रणाली में बदलाव की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। NEET UG 2026 के मामले में भी परीक्षा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च स्तर पर समीक्षा की गई थी। शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दिया था।
NEET UG को NTA देशभर में मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित करता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह मेडिकल संस्थानों में UG मेडिकल शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है।
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ड्राफ्ट के बाद क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साल में दो बार JEE, NEET और CUET कराने का प्रस्ताव अभी अंतिम फैसला नहीं है। मसौदे में शामिल सुझावों पर विशेषज्ञों की राय और प्रशासनिक स्तर पर विचार के बाद अंतिम व्यवस्था तय की जाएगी।
यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो परीक्षा कैलेंडर, आवेदन प्रक्रिया, दोनों प्रयासों के स्कोर, पाठ्यक्रम, परीक्षा केंद्रों और काउंसलिंग व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए छात्रों को फिलहाल मौजूदा आधिकारिक परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार ही तैयारी जारी रखने और NTA तथा शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

