Nominee Ownership Rights को लेकर ज्यादातर परिवारों में एक बड़ी गलतफहमी है कि बैंक या बीमा फॉर्म में जिसका नाम नॉमिनी के तौर पर लिखा है, वही उस पैसे का असली मालिक बन जाता है। सच इससे काफी अलग है। यही गलतफहमी बाद में भाई-बहनों, पत्नी और माता-पिता के बीच लंबे झगड़ों की वजह बनती है।
वसीयत और नॉमिनेशन में मूल अंतर क्या है?
वसीयत (Will) एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें कोई व्यक्ति लिखता है कि उसकी मौत के बाद उसकी संपत्ति किसे और कितनी मिलेगी। यह तय करती है कि मालिक कौन बनेगा। नॉमिनेशन सिर्फ एक सुविधा है। इसमें आप बैंक, बीमा कंपनी या फंड हाउस को बताते हैं कि आपकी मौत के बाद पैसा किसके हाथ में सौंपा जाए। आसान शब्दों में कहें तो नॉमिनी एक ट्रस्टी या रखवाले की तरह होता है। उसका काम पैसा लेकर असली हकदारों तक पहुंचाना है, खुद रख लेना नहीं। (Nominee Ownership Rights)
Nominee Ownership Rights पर कानून क्या कहता है?
भारत में अदालतें कई बार साफ कर चुकी हैं कि Nominee Ownership Rights में नॉमिनी बनने से मालिकाना हक नहीं मिलता। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने शक्ति येज़दानी मामले में कहा कि शेयर और डिपॉजिटरी से जुड़े नॉमिनेशन भी उत्तराधिकार कानून से ऊपर नहीं हैं।
इसका सीधा मतलब है कि अगर वसीयत में किसी और का नाम है, तो संपत्ति उसी को मिलेगी। नॉमिनी को पैसा वसीयत में लिखे व्यक्ति को सौंपना होगा। अगर वसीयत नहीं बनी है, तो संपत्ति कानूनी वारिसों में बंटेगी। नॉमिनी भी वारिस हो, तो उसे सिर्फ अपना हिस्सा मिलेगा।
बैंक खाते में 4 नॉमिनी का नया नियम
बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025 के नॉमिनेशन प्रावधान 1 नवंबर 2025 से लागू हो चुके हैं। अब बैंक खाते, लॉकर और सेफ कस्टडी में रखे सामान के लिए चार नॉमिनी तक बनाए जा सकते हैं। एक साथ नॉमिनेशन में आप हर नॉमिनी का प्रतिशत हिस्सा तय कर सकते हैं, जो कुल 100 प्रतिशत होना चाहिए।
क्रमवार नॉमिनेशन में पहला नॉमिनी न रहे तो अगला हकदार बनता है। यह बदलाव क्लेम को आसान और तेज बनाता है, पर Nominee Ownership Rights की मूल स्थिति वही रहती है। वारिसों का कानूनी हक खत्म नहीं होता, बैंक बस पैसा सौंपकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।
बीमा, शेयर और म्यूचुअल फंड में क्या होता है?
Nominee Ownership Rights में बीमा में नियम थोड़ा अलग है। बीमा अधिनियम की धारा 39 के तहत अगर नॉमिनी पति या पत्नी, माता-पिता या बच्चे हैं, तो उन्हें “बेनिफिशियल नॉमिनी” माना जाता है और पूरा क्लेम उन्हीं का होता है।
अगर नॉमिनी इन रिश्तों से बाहर का कोई व्यक्ति है, जैसे भाई या दोस्त, तो वह सिर्फ रखवाला माना जाएगा। तब पैसा कानूनी वारिसों में बांटना पड़ सकता है। शेयर, डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनी को यूनिट्स ट्रांसफर तो हो जाती हैं, पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वारिस उन पर अपना दावा कर सकते हैं।
वसीयत न हो तो संपत्ति किसे मिलती है?
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार पहले दर्जे के वारिसों में पत्नी, बेटे, बेटियां और मां शामिल होती हैं। इन सभी को बराबर हिस्सा मिलता है। मुस्लिम, ईसाई और पारसी परिवारों के लिए अलग पर्सनल लॉ और भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम लागू होते हैं। इसलिए वसीयत न होने पर प्रक्रिया लंबी और उलझी हुई हो सकती है।

परिवार के झगड़े से बचने के आसान तरीके
Nominee Ownership Rights से जुड़े विवाद से बचने का सबसे अच्छा रास्ता है कि नॉमिनेशन और वसीयत दोनों में एक ही व्यक्ति का नाम रखें। इससे बाद में किसी तरह का टकराव नहीं होगा। वसीयत दो गवाहों के सामने साइन करें और चाहें तो सब-रजिस्ट्रार के दफ्तर में रजिस्टर भी करवा लें।
रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है, लेकिन इससे वसीयत को चुनौती देना मुश्किल हो जाता है। शादी, बच्चे का जन्म या किसी की मौत जैसे बड़े बदलाव के बाद अपने सभी खातों का नॉमिनेशन जरूर अपडेट करें। कई लोग सालों पुराना नाम ही छोड़ देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Nominee Ownership Rights में क्या नॉमिनी ही संपत्ति का मालिक होता है?
नहीं। नॉमिनी सिर्फ पैसा या संपत्ति प्राप्त करता है। असली मालिक वसीयत में लिखा व्यक्ति या कानूनी वारिस होते हैं, बीमा के बेनिफिशियल नॉमिनी इसका अपवाद हैं।
2. Nominee Ownership Rights में वसीयत और नॉमिनी में अलग नाम हों तो किसकी चलेगी?
ऐसे मामले में वसीयत को ज्यादा महत्व मिलता है। नॉमिनी को पैसा वसीयत में लिखे व्यक्ति को सौंपना होता है।
3. क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
नहीं, बिना रजिस्ट्रेशन की वसीयत भी मान्य है, बशर्ते उस पर दो गवाहों के साइन हों। फिर भी रजिस्ट्रेशन करवाना ज्यादा सुरक्षित है।
4. बैंक खाते में अब कितने नॉमिनी बना सकते हैं?
1 नवंबर 2025 से लागू नए नियमों के तहत चार नॉमिनी तक बनाए जा सकते हैं। इसकी पूरी जानकारी सरकारी अधिसूचना में दी गई है।
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Nominee Ownership Rights के साथ इन विषयों को भी समझना जरूरी है: Will (वसीयत) कैसे बनाएं? नॉमिनी और वारिस से जुड़ी जरूरी बातें और पॉलिसी में नॉमिनी बनाते वक्त ये गलतियां भारी पड़ सकती हैं।
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