PM Modi ने गुरुवार को कहा कि सार्वजनिक जीवन में कितनी भी शक्ति और जिम्मेदारियां हासिल हों, सेवा का भाव ही आगे बढ़ने का मार्ग रहेगा। उन्होंने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र ‘जन सेवा’ से ‘देश सेवा’ की यात्रा रहा है और शासन तथा राजनीति का अंतिम उद्देश्य राष्ट्र निर्माण होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने ये बातें वडनगर से वाराणसी जा रहे ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागियों से वर्चुअल संवाद के दौरान कहीं।
पीएम मोदी ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन जनता के आशीर्वाद और सेवा के संकल्प से जुड़ा रहा है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री पद तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘सेवा भाव’ को केंद्र में रखकर काम करने से नागरिकों को नीतियों और योजनाओं के केंद्र में रखा जा सकता है।
‘सेवा भाव’ से ‘नागरिक देवो भव’ तक
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब फैसले ‘सेवा भाव’ से लिए जाते हैं तो शासन में ‘नागरिक देवो भव’ की भावना स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है। इसका अर्थ है कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के केंद्र में आम नागरिक की जरूरतों और आकांक्षाओं को रखा जाए।
उन्होंने सरकारी योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि PM-KISAN और PM-Surya Ghar Yojana जैसी योजनाओं की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच में सेवा की भावना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पीएम मोदी के मुताबिक, सरकारी योजनाओं की सफलता केवल उनके निर्माण से नहीं बल्कि उनके last-mile delivery तक पहुंचने से जुड़ी होती है।
‘राजनीति और चुनाव अपनी जगह, राष्ट्र निर्माण सबसे ऊपर’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राजनीति और चुनावी प्रक्रिया को राष्ट्र निर्माण से अलग संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजनीति की अपनी जगह है, चुनाव का अपना स्थान है और शासन व्यवस्था की अपनी भूमिका है, लेकिन देश के विकास के लिए काम करने वालों का लक्ष्य राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत का संकल्प होना चाहिए।
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है। अपने संबोधन में मोदी ने राजनीतिक मतभेदों के बजाय राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
2047 तक विकसित भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को भारत के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वर्ग बताया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की भूमिका को पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल विकसित भारत का लाभार्थी नहीं, बल्कि उसके निर्माण में भागीदार भी है। इसके लिए युवाओं को देश की जमीनी वास्तविकताओं को समझने, अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के लोगों से मिलने तथा उनकी आकांक्षाओं को जानने की जरूरत है।
पीएम मोदी ने यात्रा में शामिल युवाओं से कहा कि भारत को समझने के लिए केवल पुस्तकीय जानकारी पर्याप्त नहीं है। देश की विविधता को करीब से देखना और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के अनुभवों को समझना भी जरूरी है।
वडनगर से वाराणसी तक ‘सेवा संकल्प यात्रा’
‘सेवा संकल्प यात्रा’ की शुरुआत गुजरात के वडनगर से हुई है और इसका गंतव्य उत्तर प्रदेश का वाराणसी है। इसमें विभिन्न राज्यों के युवा हिस्सा ले रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य युवाओं को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना बताया गया है।
प्रधानमंत्री ने यात्रा के अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक जीवन के दौरान उन्होंने स्वयं यात्राएं की हैं और जब कोई व्यक्ति यात्रा करता है, तभी उसे रास्ते की चुनौतियों और कठिनाइयों का वास्तविक अनुभव होता है। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं के समर्पण की सराहना की।
पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
राष्ट्र निर्माण की चर्चा के साथ प्रधानमंत्री ने पेड़ लगाने और जल संरक्षण जैसे विषयों को भी युवाओं की गतिविधियों से जोड़ने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है। युवाओं की भागीदारी से ऐसे अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
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सेवा से राष्ट्र निर्माण तक संदेश
प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि सत्ता और प्रशासन का उद्देश्य सेवा से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने सरकारी योजनाओं की पहुंच, युवाओं की भागीदारी और विकसित भारत के लक्ष्य को इसी ‘सेवा भाव’ से जोड़कर प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में युवा ऊर्जा, अनुभव और देश की जमीनी समझ महत्वपूर्ण होगी। वडनगर से वाराणसी तक चल रही यात्रा को भी इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।

