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ड्रग्स के खिलाफ अमित शाह का 3 साल का लक्ष्य, 2029 तक नशा-मुक्त भारत का रोडमैप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए अगले तीन वर्षों का लक्ष्य तय किया है। मंगलवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि देश में ड्रग्स के कारोबार को 31 दिसंबर 2029 तक जड़ से खत्म करने का सामूहिक लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इसके लिए समयबद्ध विजन और राज्यों के बीच समन्वय पर जोर दिया है।

ड्रग्स के खिलाफ अब ‘मीटिंग से मिशन’ की ओर बढ़ने का अमित शाह का दावाअमित शाह

अमित शाह ने कहा कि अब केवल बैठकें करने और ड्रग्स जब्त करने तक सीमित रहने के बजाय पूरे नारकोटिक्स नेटवर्क को खत्म करने पर ध्यान देना होगा। उनके अनुसार अभियान का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की बरामदगी नहीं, बल्कि उन नेटवर्क को dismantle करना है जो ड्रग्स के उत्पादन, तस्करी, वित्तीय लेनदेन और वितरण से जुड़े हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि इस अभियान में केंद्र और राज्यों की एजेंसियों के साथ-साथ अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों के अलावा संबंधित सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

अमित शाह का चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है तीन साल का रोडमैप

सरकार ने नशा-मुक्त भारत के लिए तैयार रोडमैप को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया है। इनमें खुफिया जानकारी और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, मांग में कमी और नुकसान कम करने के उपाय, तथा क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच समन्वय शामिल हैं।

इस रणनीति के तहत ड्रग्स के स्रोत से लेकर उसके अंतिम नेटवर्क तक कार्रवाई करने की योजना है। इसके अलावा वित्तीय जांच के जरिए ड्रग कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह पर नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

100 बड़े ड्रग नेटवर्क और 100 भगोड़ों पर फोकस

सरकार के तीन साल के रोडमैप में कुछ विशेष लक्ष्य भी तय किए गए हैं। इनमें 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करना, 100 नारकोटिक्स मामलों से जुड़े भगोड़ों को भारत वापस लाना और 100 अवैध ड्रग प्रयोगशालाओं को नष्ट करना शामिल है।

यह रणनीति विशेष रूप से उन नेटवर्क पर कार्रवाई पर केंद्रित है जो एक से अधिक राज्यों या देशों में फैले हुए हैं। सरकार के अनुसार, ड्रग तस्करी अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि इसका संबंध सीमा सुरक्षा, वित्तीय अपराध और संगठित अपराध से भी है।

सिंथेटिक ड्रग्स और नए तस्करी नेटवर्क बड़ी चुनौती

सरकार ने सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट और सीमा पार तस्करी को भी प्रमुख चुनौती के रूप में चिन्हित किया है। जून 2026 में जारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के विजन डॉक्यूमेंट में संस्थागत क्षमता मजबूत करने और इन नए खतरों से निपटने के लिए तकनीक तथा खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 2014 से 2026 के बीच देश में करीब 1.18 करोड़ किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹1.84 लाख करोड़ थी। इसी अवधि में ₹89,896 करोड़ मूल्य के करीब 82.07 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जाने की जानकारी भी सरकार ने दी है।

50 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान

ड्रग्स के खिलाफ सरकार की रणनीति में केवल पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ही शामिल नहीं है। जागरूकता और नशा मुक्ति को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

सरकार ने अगले तीन वर्षों में 50 करोड़ लोगों तक जागरूकता अभियान पहुंचाने और करीब एक लाख ‘नशा मुक्त मित्र’ तैयार करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही देश में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 1,751 करने की योजना बताई गई है।

मंगलवार के सम्मेलन में अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए नए टेलीविजन विज्ञापन भी लॉन्च किए। इसके अलावा लखनऊ और देहरादून में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नए जोनल परिसरों की आधारशिला रखी गई और NCB की नई वेबसाइट भी लॉन्च की गई।

सीमा पार से आने वाले ड्रग्स पर भी निगरानी

सरकार की रणनीति में सीमा पार से होने वाली तस्करी रोकना भी अहम है। इससे पहले अमित शाह ने कहा था कि भारत के सामने म्यांमार और अफगानिस्तान से जुड़े ड्रग तस्करी मार्गों की चुनौती है। उन्होंने सीमा निगरानी और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को मजबूत करने की बात कही थी।

सरकार ने ड्रग्स की तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और संपत्तियों पर भी कार्रवाई बढ़ाने की बात कही है। इसका उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे कारोबार के आर्थिक आधार को कमजोर करना है।

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2029 तक लक्ष्य हासिल करने की चुनौती

अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को लंबे समय की राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए केंद्र, राज्यों और विभिन्न एजेंसियों से एक साझा रणनीति के तहत काम करने का आह्वान किया है। तीन साल की समयसीमा के साथ तैयार यह रोडमैप अब कार्रवाई, निगरानी और राज्यों के बीच समन्वय की कसौटी पर होगा।

2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। अब इस लक्ष्य की दिशा में ड्रग नेटवर्क को तोड़ने, तस्करी रोकने, युवाओं में जागरूकता बढ़ाने और नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के प्रयासों को किस तरह लागू किया जाता है, यह इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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