2006 के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, करीब 50 वर्षीय कोली का शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में स्थित एक चाय की दुकान के भीतर मिला। प्रारंभिक जानकारी में मौत को आत्महत्या बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और हाल ही में उसने सप्त सरोवर रोड पर लाल माता मंदिर के पास चाय की दुकान किराये पर ली थी। पुलिस को शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल से अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मौत के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
निठारी हत्याकांड से जुड़ा था नाम
निठारी हत्याकांड का मामला दिसंबर 2006 में सामने आया था, जब उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-31 में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे और आसपास से बच्चों तथा महिलाओं के कंकाल और मानव अवशेष बरामद किए गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
सुरेंद्र कोली उस समय पंढेर के घर में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। पुलिस ने उसे और पंढेर को मामले में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान कोली पर कई बच्चों और महिलाओं के अपहरण, यौन हिंसा और हत्या से जुड़े आरोप लगाए गए।
मामले की सुनवाई के दौरान कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया और कई मामलों में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया में निचली अदालतों के फैसलों को उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
अदालतों में अभियोजन की कहानी पर सवाल
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को निठारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में बरी कर दिया था। अदालत ने अभियोजन की जांच, सबूतों और प्रक्रियात्मक कमियों पर गंभीर सवाल उठाए। फैसले में कहा गया कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। नवंबर 2025 में शीर्ष अदालत ने निठारी मामले से जुड़े कोली के अंतिम लंबित मामले में भी उसे बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का आधार यह था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। यह कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए ठोस और स्वीकार्य साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।
जेल से रिहाई के बाद हरिद्वार में जीवन
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में रहना शुरू किया था। रिपोर्टों के अनुसार, वह पिछले कुछ महीनों से शहर में रह रहा था और आजीविका के लिए चाय की दुकान चला रहा था।
स्थानीय पुलिस ने बताया कि घटना के समय वह दुकान में था। हालांकि, उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों, पारिवारिक स्थिति या मौत के पीछे किसी संभावित कारण को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस ने किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया है।
कुछ रिपोर्टों में पारिवारिक विवाद या अन्य स्थानीय परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौत के कारण के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम और जांच से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम
हरिद्वार पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। जांच टीम घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, आसपास के लोगों के बयान और कोली की हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि मौत से पहले वह किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और क्या किसी व्यक्ति या घटना का इससे संबंध था। अधिकारियों ने कहा है कि जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियों के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे मृत्यु के चिकित्सकीय कारण और घटनाक्रम से जुड़े कुछ तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस की प्रारंभिक जानकारी को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
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निठारी मामले की विरासत और अनुत्तरित सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत ने निठारी हत्याकांड को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। यह मामला लंबे समय तक देश की न्याय व्यवस्था, पुलिस जांच और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की प्रक्रिया पर बहस का केंद्र रहा।
एक ओर, पीड़ित परिवारों ने वर्षों तक न्याय की उम्मीद में कानूनी लड़ाई लड़ी। दूसरी ओर, अदालतों में अभियोजन के साक्ष्यों और जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों को अंततः बरी किया गया।
कोली की मौत इस मामले से जुड़े कई अध्यायों के बाद सामने आई है, लेकिन उसकी मृत्यु की परिस्थितियों पर अंतिम जानकारी अभी जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल हरिद्वार पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

