नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में खरीदारी और खान-पान का अनुभव और बेहतर होने वाला है। नोएडा प्राधिकरण शहर के अलग-अलग सेक्टरों में 247 नए स्ट्रीट मार्केट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इन बाजारों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर खरीदारी, स्ट्रीट फूड और छोटे कारोबार को बढ़ावा देना है। योजना को इंदौर की लोकप्रिय ‘56 दुकान’ की तर्ज पर विकसित किए जाने की तैयारी है, जहां सीमित क्षेत्र में खान-पान और छोटे व्यापार की बड़ी श्रृंखला लोगों को आकर्षित करती है।
नोएडा में पहले से ही सेक्टर-18, अट्टा मार्केट, ब्रह्मपुत्र मार्केट, जगत फार्म और विभिन्न सेक्टरों के स्थानीय बाजार लोगों की जरूरतें पूरी करते हैं। हालांकि तेजी से बढ़ते शहर में नई आवासीय सोसायटियों और आबादी के विस्तार के साथ छोटे और सुविधाजनक बाजारों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में प्राधिकरण की यह योजना रोजमर्रा की खरीदारी के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करने से राहत दे सकती है।
इंदौर की ‘56 दुकान’ से प्रेरणा
इंदौर की ‘छप्पन दुकान’ देश के चर्चित स्ट्रीट फूड और शॉपिंग हब में शामिल है। करीब 200 मीटर के क्षेत्र में 56 दुकानें होने के कारण इसे ‘56 Dukan’ के नाम से जाना जाता है। समय के साथ यह केवल स्थानीय बाजार नहीं रहा, बल्कि इंदौर की पहचान और पर्यटन का हिस्सा बन गया।
इंदौर के इस बाजार को 2020 में स्मार्ट फूड स्ट्रीट के रूप में पुनर्विकसित किया गया था। यहां पैदल चलने वालों के लिए बेहतर व्यवस्था और वाहन-मुक्त क्षेत्र जैसी सुविधाओं ने बाजार को नया स्वरूप दिया। इसी मॉडल से प्रेरणा लेकर नोएडा में भी छोटे बाजारों को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है।
नोएडा में प्रस्तावित बाजारों का उद्देश्य भी केवल दुकानें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे स्थानीय व्यावसायिक केंद्र तैयार करना है जहां लोग आसपास ही खान-पान, दैनिक जरूरतों और छोटी खरीदारी की सुविधाएं हासिल कर सकें।
नोएडा में 247 बाजारों से क्या बदलेगा?
नोएडा में बड़ी संख्या में स्ट्रीट मार्केट विकसित होने से सबसे बड़ा फायदा स्थानीय निवासियों को होने की उम्मीद है। शहर के कई सेक्टरों में बड़ी आवासीय सोसायटियां विकसित हो चुकी हैं। इनमें रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए कई बार मुख्य बाजारों या बड़े कॉमर्शियल क्षेत्रों तक जाना पड़ता है।
यदि सेक्टर स्तर पर व्यवस्थित बाजार उपलब्ध होंगे तो किराना, खाने-पीने की दुकानें, छोटे रिटेल आउटलेट और अन्य आवश्यक सेवाएं घर के नजदीक मिल सकेंगी।
इससे स्थानीय दुकानदारों और छोटे उद्यमियों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। शहर में रोजगार के छोटे लेकिन बड़ी संख्या में अवसर बनने की संभावना है। प्राधिकरण की व्यापक योजना सफल रहती है तो स्ट्रीट मार्केट स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकते हैं।
बाजारों में हो सकती हैं आधुनिक सुविधाएं
प्रस्तावित स्ट्रीट मार्केट को पारंपरिक बेतरतीब बाजारों से अलग व्यवस्थित स्वरूप देने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे बाजारों में पैदल चलने के लिए पर्याप्त जगह, दुकान लगाने के निर्धारित स्थान, साफ-सफाई, रोशनी, कूड़ा प्रबंधन और पार्किंग जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण होंगी।
स्ट्रीट फूड को बढ़ावा देने के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। इंदौर की ‘56 दुकान’ को साफ-सुथरे स्ट्रीट फूड हब के तौर पर पहचान मिल चुकी है, इसलिए नोएडा के लिए भी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा इस मॉडल का अहम हिस्सा बन सकती है।
इसके अलावा बाजारों की डिजाइन ऐसी रखने की जरूरत होगी जिससे आसपास रहने वाले लोगों को शोर, यातायात और पार्किंग की समस्या का सामना न करना पड़े।
मौजूदा बाजारों पर भी बढ़ेगा दबाव
नोएडा में सेक्टर-18 जैसे बड़े बाजार पहले से ही शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र हैं। वहीं अट्टा मार्केट और अन्य स्थानीय बाजार भी खरीदारी के प्रमुख ठिकाने हैं।
नए बाजार विकसित होने से इन बड़े बाजारों पर छोटे स्तर की खरीदारी के लिए आने वाली भीड़ कुछ हद तक कम हो सकती है। इससे यातायात व्यवस्था में भी सुधार की संभावना है।
हालांकि नए बाजारों की संख्या बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि वे अनधिकृत अतिक्रमण या अव्यवस्थित पार्किंग में न बदलें। बाजारों की नियमित निगरानी और प्रबंधन इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
छोटे कारोबारियों को मिल सकता है बड़ा फायदा
स्ट्रीट मार्केट का सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक लाभ छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। बड़ी दुकानों और मॉल के मुकाबले छोटे बाजार कम पूंजी में व्यवसाय शुरू करने का अवसर देते हैं।
स्थानीय खाद्य विक्रेता, बेकरी, मिठाई की दुकानें, कपड़े और घरेलू सामान बेचने वाले छोटे कारोबारी ऐसे बाजारों में ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
इसके अलावा युवाओं और महिलाओं के लिए भी छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि प्राधिकरण पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया अपनाता है और छोटे कारोबारियों को उचित शर्तों पर स्थान उपलब्ध कराता है, तो योजना स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा दे सकती है।
नोएडा प्राधिकरण पहले भी शहर के बाजारों में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कदम उठा चुका है। हाल में शहर के विभिन्न शॉपिंग हब में 34 नए फूड और रिटेल कियोस्क लगाने की योजना भी सामने आई थी, जिनके आवंटन के लिए ई-नीलामी प्रस्तावित थी। इससे संकेत मिलता है कि शहर में छोटे व्यावसायिक स्थानों और सुविधाजनक रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर बढ़ रहा है।
स्ट्रीट फूड बनेगा आकर्षण का केंद्र
यदि नोएडा के 247 बाजारों में स्थानीय खान-पान को प्रमुखता दी जाती है तो ये केवल खरीदारी की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि सामाजिक और मनोरंजन के केंद्र भी बन सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में स्ट्रीट फूड की लोकप्रियता पहले से काफी अधिक है। अलग-अलग सेक्टरों में स्थानीय स्वाद, क्षेत्रीय व्यंजन और छोटे फूड आउटलेट विकसित होने से लोगों को नए विकल्प मिलेंगे।ऐसे बाजारों को शाम और सप्ताहांत में विशेष रूप से सक्रिय बनाया जा सकता है। इससे परिवारों और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर घूमने-फिरने और खाने-पीने के नए विकल्प भी तैयार होंगे।
ट्रैफिक और पार्किंग होगी बड़ी चुनौती
हालांकि योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में यातायात और पार्किंग शामिल हो सकती हैं। यदि बाजार आवासीय क्षेत्रों के बीच विकसित किए जाते हैं और वहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, तो आसपास की सड़कों पर जाम की समस्या पैदा हो सकती है।
इसलिए बाजारों की योजना बनाते समय पैदल यात्रियों, दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं करना जरूरी होगा। बाजारों को ‘पैदल अनुकूल’ बनाने के साथ आसपास पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी करनी होगी।
इंदौर की ‘56 दुकान’ के पुनर्विकास में वाहन-मुक्त क्षेत्र की अवधारणा महत्वपूर्ण रही है। नोएडा भी इस तरह के मॉडल से सीख लेकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था तैयार कर सकता है।
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स्वच्छता और सुरक्षा पर भी देना होगा ध्यान
247 बाजारों का संचालन केवल दुकानें आवंटित करने से सफल नहीं होगा। सफाई, कूड़ा निस्तारण, अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार निगरानी की आवश्यकता होगी।
खासकर खाने-पीने की दुकानों में स्वच्छ पानी, साफ खाना पकाने की जगह और कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था जरूरी होगी। यदि इन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया गया तो नोएडा अपने स्ट्रीट मार्केट को एक आधुनिक और स्वच्छ मॉडल के रूप में विकसित कर सकता है।
निष्कर्ष
नोएडा में 247 नए स्ट्रीट मार्केट विकसित करने की योजना शहर के बदलते स्वरूप के अनुरूप एक बड़ा शहरी विकास कदम साबित हो सकती है। इंदौर की ‘56 दुकान’ से प्रेरित यह मॉडल सफल रहा तो लोगों को घर के नजदीक खरीदारी और खान-पान की सुविधाएं मिलेंगी, वहीं छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
हालांकि योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजारों की योजना कितनी व्यवस्थित तरीके से बनाई जाती है। पार्किंग, यातायात, स्वच्छता, अतिक्रमण और सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान पहले से तैयार करना होगा।
अगर इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया, तो नोएडा के 247 प्रस्तावित स्ट्रीट मार्केट आने वाले वर्षों में शहर की नई पहचान बन सकते हैं—जहां खरीदारी के साथ स्थानीय स्वाद, छोटे कारोबार और सामुदायिक जीवन को भी बढ़ावा मिलेगा।

