PM मोदी के मुंबई दौरे और एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से कुछ घंटे पहले राजधानी जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन माने जाने वाले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई। मुंबई पुलिस ने निता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) परिसर से दो लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, इनमें से एक व्यक्ति कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बता रहा था, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति के पास एक बंदूक मिली।
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और दोनों से पूछताछ शुरू की गई। शुरुआती जांच में एक व्यक्ति के पास मौजूद कथित PMO पहचान-पत्र के फर्जी होने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
NMACC में संदिग्ध गतिविधियों से शुरू हुआ मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम मुंबई के NMACC में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में शामिल होने वाले थे। कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल पर सुरक्षा जांच और निगरानी बढ़ाई गई थी। इसी दौरान सुरक्षा कर्मियों को दो व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
पुलिस ने दोनों को रोककर उनकी पहचान और कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। पूछताछ के दौरान एक व्यक्ति ने कथित तौर पर दावा किया कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा अधिकारी है। हालांकि, उसके पहचान-पत्र की जांच किए जाने पर वह कथित तौर पर फर्जी पाया गया।इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया और दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी।
दूसरे व्यक्ति के पास मिली पिस्टल
जांच के दौरान पुलिस को दूसरे व्यक्ति के पास से एक पिस्टल मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, यह व्यक्ति खुद को पहले व्यक्ति का बॉडीगार्ड बता रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बरामद हथियार के संबंध में लाइसेंस होने की बात भी सामने आई है, हालांकि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियार लेकर वह व्यक्ति हाई-सिक्योरिटी वाले आयोजन स्थल तक कैसे पहुंचा।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री के किसी भी कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर लागू होती है। ऐसे में हथियार और कथित फर्जी सरकारी पहचान-पत्र के साथ किसी व्यक्ति का आयोजन स्थल तक पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर मामला माना जाता है।
24 वर्षीय युवक पर शक, फर्जी PMO पहचान-पत्र की जांच
कुछ रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए मुख्य संदिग्ध की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में की गई है। पुलिस के मुताबिक, उसने खुद को PMO अधिकारी के रूप में पेश किया और कथित तौर पर एक ऐसा पहचान-पत्र दिखाया जिसे जांच में फर्जी पाया गया।
हालांकि, जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने फर्जी पहचान-पत्र क्यों बनवाया था, वह आयोजन स्थल तक किस उद्देश्य से पहुंचा था और उसके साथ मौजूद हथियारबंद व्यक्ति की भूमिका क्या थी।
अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं कहा है कि दोनों का प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा था। इसलिए फिलहाल इस घटना को सीधे किसी आतंकी साजिश से जोड़ना जल्दबाजी होगी। पुलिस की जांच का प्रमुख उद्देश्य दोनों व्यक्तियों की वास्तविक मंशा और उनकी गतिविधियों की पूरी कड़ी का पता लगाना है।
क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच संभाल ली है। एजेंसी अब दोनों संदिग्धों से पूछताछ करने के साथ-साथ उनके मोबाइल फोन, पहचान-पत्र, हथियार और आयोजन स्थल तक पहुंचने की परिस्थितियों की जांच कर सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और क्या आयोजन स्थल तक पहुंचने की उनकी कोई पूर्व योजना थी।
इसके अलावा, आयोजन स्थल के CCTV फुटेज और प्रवेश द्वार पर लगे सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दोनों व्यक्ति परिसर में किस रास्ते से पहुंचे और सुरक्षा जांच के दौरान उनके व्यवहार में क्या संदिग्ध था।
PM मोदी की सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता
प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सबसे संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। किसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मौजूदगी से पहले आयोजन स्थल, आसपास के इलाकों और प्रवेश मार्गों पर कई स्तर की जांच की जाती है।
मुंबई की इस घटना ने ऐसे कार्यक्रमों में पहचान-पत्रों की जांच और निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा हथियार ले जाने की अनुमति जैसे मुद्दों को भी सामने ला दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना अभी संभव नहीं है कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक बड़ी चूक हुई थी या नहीं।जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों व्यक्तियों ने सुरक्षा घेरे में प्रवेश करने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ।
पहले भी सामने आ चुके हैं PM से जुड़े सुरक्षा अलर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों के दौरान सुरक्षा से जुड़े अलर्ट पहले भी सामने आते रहे हैं। मई 2026 में बेंगलुरु में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कुछ दूरी पर जेलाटिन की छड़ें मिलने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा था।
वहीं, मुंबई में भी अतीत में प्रधानमंत्री को लेकर धमकी भरे संदेश और कॉल सामने आए हैं, जिनकी पुलिस ने जांच की है। हालांकि, मौजूदा घटना की प्रकृति उनसे अलग है क्योंकि इसमें कथित फर्जी सरकारी पहचान-पत्र और हथियार दोनों का मामला सामने आया है।
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जांच के बाद ही साफ होगी असली कहानी
फिलहाल पुलिस की जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि दोनों व्यक्ति NMACC जैसे हाई-सिक्योरिटी आयोजन स्थल तक क्यों पहुंचे थे। क्या फर्जी PMO पहचान-पत्र का इस्तेमाल केवल प्रवेश हासिल करने के लिए किया गया था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य था? क्या हथियार लेकर पहुंचे व्यक्ति को पहले से पता था कि आयोजन स्थल पर प्रधानमंत्री मौजूद रहने वाले हैं?इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई कार्यक्रम से पहले NMACC में दो संदिग्धों की हिरासत और एक के पास से बंदूक तथा दूसरे के पास कथित फर्जी PMO पहचान-पत्र मिलने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच दोनों व्यक्तियों से पूछताछ कर रही हैं और उनकी गतिविधियों की कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह साबित हो कि दोनों का प्रधानमंत्री को निशाना बनाने का इरादा था।
फिर भी, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल तक कथित फर्जी पहचान-पत्र और हथियार के साथ पहुंचने की घटना अपने आप में गंभीर है। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह केवल सुरक्षा जांच को चकमा देने की कोशिश थी, निजी सुरक्षा से जुड़ा मामला था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी थी।

