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TDS Refund Process: सैलरी या एफडी पर कटे ज्यादा टैक्स को वापस पाने का सही तरीका

कई बार सैलरी, एफडी या प्रोफेशनल फीस पर जरूरत से ज्यादा टैक्स कट जाता है, ऐसे में सही TDS Refund Process समझना बेहद जरूरी हो जाता है। ज्यादातर लोग इसे इनकम टैक्स रिफंड जैसा ही मान लेते हैं, जबकि इसकी शुरुआत सही मिलान और सही दस्तावेजों से होती है। अगर आप भी ज्यादा कटे हुए TDS को वापस पाना चाहते हैं, तो TDS Refund Process गाइड पूरी जरूर पढ़ें।

ज्यादा TDS क्यों कट जाता है?

कई बार कंपनी या बैंक अनुमानित इनकम के आधार पर TDS काट लेते हैं, जो असल टैक्स स्लैब से ज्यादा हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की कुल सालाना इनकम टैक्सेबल सीमा से कम है, तब भी सैलरी या ब्याज पर टीडीएस कट सकता है। ऐसे मामलों में यह कटौती जरूरत से ज्यादा हो जाती है और उसे वापस पाना जरूरी हो जाता है।

सैलरी और FD पर एक्स्ट्रा कटौती के आम कारण

सैलरी में अगर सही निवेश या छूट की जानकारी समय पर नहीं दी जाती, तो कंपनी ज्यादा TDS काट सकती है। एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर भी बैंक तय सीमा से ज्यादा ब्याज होने पर टीडीएस काट लेते हैं, भले ही व्यक्ति की कुल इनकम टैक्सेबल न हो। फ्रीलांसर और प्रोफेशनल्स के मामलों में भी क्लाइंट अक्सर फीस पर तय दर से TDS काट लेते हैं।

Form 26AS और Form 16/16A से मिलान क्यों जरूरी है?

Form 26AS में यह पूरा रिकॉर्ड रहता है कि साल भर में कितना TDS काटा गया और कहां जमा हुआ। इसे Form 16 या Form 16A से मिलाना जरूरी होता है, ताकि यह पक्का हो सके कि जो टैक्स काटा गया है, वह सही तरीके से सरकार के पास जमा भी हुआ है। किसी भी तरह की गड़बड़ी या मिसमैच सबसे पहले इसी मिलान से पकड़ में आती है।

Form 15G/15H से शुरुआत में ही बचाव कैसे करें?

अगर किसी व्यक्ति की कुल इनकम टैक्सेबल सीमा से कम है, तो वह बैंक में Form 15G या वरिष्ठ नागरिकों के लिए Form 15H जमा करके शुरुआत में ही ज्यादा TDS कटने से बच सकता है। यह फॉर्म हर साल की शुरुआत में जमा करना बेहतर रहता है, ताकि पूरे साल गलत कटौती न हो। यह तरीका बाद में रिफंड के लिए इंतजार करने से कहीं ज्यादा आसान और तेज माना जाता है।

TDS Refund Process: छोटा रिफंड भी क्लेम क्यों करना चाहिए?

कई लोग छोटी रकम का TDS वापस पाने के लिए ITR फाइल करने में आलस करते हैं, लेकिन यह पैसा भी उतना ही जरूरी होता है जितना बड़ा रिफंड। सही तरीके से ITR फाइल करने पर यह रकम बिना किसी परेशानी के वापस मिल सकती है। लगातार ITR फाइल करते रहने से भविष्य में लोन या वीजा जैसी जरूरतों में भी फायदा मिलता है।

TDS Refund Process
TDS Refund Process

TDS मिसमैच होने पर क्या करें?

अगर Form 26AS और Form 16/16A में दिखाई गई रकम आपस में मेल नहीं खाती, तो सबसे पहले टीडीएस काटने वाली कंपनी या बैंक से संपर्क करना चाहिए। कई बार गलत PAN नंबर डालने या रिटर्न फाइल करने में देरी की वजह से यह मिसमैच होता है। सही जानकारी अपडेट होने के बाद कुछ दिनों में यह रिकॉर्ड अपने आप ठीक हो जाता है।

उपरोक्त TDS Refund Process की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: क्या हर बार ज्यादा कटे TDS के लिए ITR भरना जरूरी है?
जवाब: हां, कटे हुए टीडीएस को वापस पाने के लिए ITR फाइल करना जरूरी होता है, भले ही रकम छोटी ही क्यों न हो।

सवाल: Form 15G और 15H में क्या फर्क है?
जवाब: Form 15G सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए होता है, जबकि Form 15H खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया गया है।

सवाल: क्या फ्रीलांसर भी TDS Refund Process क्लेम कर सकते हैं?
जवाब: हां, अगर उनकी कुल इनकम टैक्सेबल सीमा से कम है, तो वे कटे हुए टीडीएस को ITR के जरिए वापस क्लेम कर सकते हैं।

सवाल: TDS Refund Process की पूरी आधिकारिक जानकारी कहां मिल सकती है? 
जवाब: पूरी और आधिकारिक जानकारी यहां देखी जा सकती है।

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