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हथनीकुंड बैराज पर सेना की नाव पलटी, दो पैरा कमांडो अब भी लापता; 14 घंटे बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी

हरियाणा के यमुनानगर जिले में हथनीकुंड बैराज के पास सेना के प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान बड़ा हादसा हो गया। यमुना नदी में बाढ़ राहत प्रशिक्षण के दौरान सेना की मोटरबोट अचानक पलट गई, जिसके बाद कई जवान तेज बहाव में बह गए। हादसे के बाद कुछ जवानों ने तैरकर अपनी जान बचाई, जबकि दो पैरा कमांडो अब भी लापता बताए जा रहे हैं। उन्हें तलाशने के लिए सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसा मंगलवार को हथनीकुंड बैराज क्षेत्र में हुआ। यहां सेना की 1 पैरा बटालियन (स्पेशल फोर्सेज) से जुड़े जवान प्रशिक्षण अभ्यास के लिए पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अभ्यास के दौरान इस्तेमाल की जा रही मोटरबोट में तकनीकी समस्या आई और वह पानी में असंतुलित होकर डूबने लगी। इसके बाद नाव पर सवार जवानों ने पानी में छलांग लगा दी, लेकिन यमुना के तेज बहाव ने स्थिति को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।

हथनीकुंड में प्रशिक्षण के दौरान अचानक बिगड़े हालात

हथनीकुंड बैराज क्षेत्र में सेना का यह अभ्यास नदी और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव अभियानों की तैयारी से जुड़ा था। अभ्यास के दौरान मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी दौरान नाव में तकनीकी खराबी आने की सूचना है।

नाव के डूबने की स्थिति पैदा होने पर जवानों ने लाइफ जैकेट पहनकर पानी में छलांग लगाई। कुछ जवान तैरकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन तेज बहाव के कारण अन्य जवान बह गए। ताजा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, तीन जवानों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दो कमांडो की तलाश जारी है।

यह हादसा ऐसे स्थान पर हुआ जहां यमुना का बहाव बैराज और नहरों की जल निकासी व्यवस्था के कारण कई जगह तेज हो सकता है। ऐसे में नदी में बचाव अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

14 घंटे बाद भी तलाश जारी

हादसे के बाद लापता जवानों को खोजने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया। सेना के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस और आपदा राहत दल भी तलाश में जुटे हैं। नदी के बहाव की दिशा में downstream इलाकों तक सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की SDRF टीमें भी अभियान में शामिल हैं। इसके अलावा सेना की अपनी बचाव टीमें और अन्य विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को भी जवानों की तलाश के लिए लगाया गया था।

अंधेरा होने के बाद भी खोज अभियान को जारी रखने की कोशिश की गई। हालांकि तेज बहाव, पानी की गहराई और नदी में दृश्यता कम होने के कारण बचाव दल के सामने कई मुश्किलें हैं।

सिंचाई विभाग से भी मांगी गई मदद

हथनीकुंड बैराज यमुना नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण जल संरचना है, जहां से पानी को अलग-अलग नहरों की ओर मोड़ा जाता है। हादसे के बाद बचाव अभियान को आसान बनाने के लिए सिंचाई विभाग से भी सहयोग लिया गया।

अधिकारियों ने नदी और नहरों के बहाव से जुड़ी जानकारी हासिल की, ताकि लापता जवानों की संभावित दिशा का पता लगाया जा सके। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए भी विभाग से आवश्यक सहयोग मांगा गया।

बचाव अभियान में नदी की धारा का सही आकलन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेज बहाव में पानी में उतरकर तलाशी लेना खुद बचावकर्मियों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।

तीन जवानों ने बचाई जान

हादसे के बाद सेना के कुछ जवानों ने अपनी सूझबूझ और प्रशिक्षण का परिचय देते हुए तैरकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता हासिल की। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीन जवान करीब 600 मीटर तक तैरकर बाहर निकले।

इन जवानों के सुरक्षित बाहर आने से राहत मिली, लेकिन दो कमांडो के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। सेना और प्रशासन की प्राथमिकता अब उन्हें जल्द से जल्द तलाशना है।

लापता जवानों की पहचान से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सेना की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार भी किया जा रहा है।

सेना के प्रशिक्षण की सुरक्षा पर भी सवाल

यह घटना एक नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान हुई, इसलिए हादसे के कारणों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि मोटरबोट में तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना हुई है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि नाव की तकनीकी जांच कब की गई थी और प्रशिक्षण से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

हालांकि, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार करना जरूरी है। सेना के विशेष बलों के प्रशिक्षण में नदी, समुद्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अभियान चलाने की क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा या युद्ध जैसी परिस्थितियों में जवानों की तैयारी मजबूत करते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी मौजूद रहता है।

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परिवारों की बढ़ी चिंता

दो जवानों के लापता होने की खबर के बाद उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। सेना और प्रशासन की टीमें लगातार तलाश में लगी हैं और अभियान की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।

स्थानीय प्रशासन ने भी बचाव दलों के साथ समन्वय बढ़ाया है। नदी के संभावित downstream क्षेत्रों में भी निगरानी की जा रही है ताकि यदि जवान बहकर किसी दूसरे हिस्से में पहुंचे हों तो उन्हें जल्द खोजा जा सके।

निष्कर्ष

यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज में सेना के बाढ़ राहत प्रशिक्षण के दौरान मोटरबोट पलटने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा कर दी है। हादसे में कुछ जवान सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो पैरा कमांडो के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

सेना, SDRF, पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियां लापता जवानों की तलाश में जुटी हैं। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली गई।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता दोनों लापता कमांडो को सुरक्षित तलाशना है। इसके बाद हादसे की परिस्थितियों और मोटरबोट में आई तकनीकी खराबी की विस्तृत जांच की जाएगी। यह घटना एक बार फिर बताती है कि नदी आधारित सैन्य प्रशिक्षण में तकनीकी सुरक्षा, मौसम और जलप्रवाह की निगरानी तथा आपातकालीन बचाव व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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