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उन्नाव में भारी बारिश से गंगा एक्सप्रेसवे के रैंप में धंसी सड़क, पानी रोकने के लिए बिछाया गया कारपेट

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने गंगा एक्सप्रेसवे की एक एंट्री रैंप की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए। मंगलवार सुबह दही चौकी के पास किलोमीटर 423 पर एक्सप्रेसवे के एक रैंप का हिस्सा अचानक धंस गया। बारिश के तेज पानी को क्षतिग्रस्त हिस्से में जाने से रोकने और बहाव को मोड़ने के लिए रखरखाव कर्मचारियों ने शुरुआती तौर पर वहां कारपेट बिछाकर अस्थायी उपाय किया। बाद में ठेकेदार और रखरखाव टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की और करीब ढाई घंटे में यातायात सामान्य कर दिया।

अधिकारियों के मुताबिक, यह नुकसान गंगा एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे पर नहीं, बल्कि उस एंट्री रैंप पर हुआ जो वाहनों को एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क से जोड़ता है और दही चौकी के पास स्थित फूड प्लाजा की ओर जाता है। लगातार बारिश के कारण सड़क की सतह के नीचे मौजूद मिट्टी बह गई, जिससे नीचे खाली जगह यानी वॉयड बन गया और सड़क का एक हिस्सा धंस गया।

तेज बारिश के बाद बनी सड़क में कैविटीउन्नाव

मिली जानकारी के अनुसार, उन्नाव में लगातार बारिश के बीच मंगलवार सुबह सड़क के नीचे की मिट्टी बहने से रैंप का एक हिस्सा प्रभावित हुआ। बारिश का पानी सड़क के नीचे पहुंचने के बाद मिट्टी को अपने साथ बहाकर ले गया। इससे सड़क की सतह के नीचे खाली जगह बनी और ऊपरी हिस्सा कमजोर होकर धंस गया।

यह स्थिति मानसून के दौरान एक्सप्रेसवे और हाईवे परियोजनाओं के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है। खासतौर पर मिट्टी से बने एम्बैंकमेंट वाले हिस्सों में यदि जलनिकासी प्रभावी नहीं हो, तो पानी के दबाव से मिट्टी के कटाव और सड़क की स्थिरता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

कारपेट से पानी का बहाव मोड़ने का अस्थायी उपाय

सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से से बारिश का पानी लगातार बह रहा था। ऐसे में कर्मचारियों ने पहले उस स्थान पर कारपेट बिछाया। इसका उद्देश्य सड़क की स्थायी मरम्मत करना नहीं, बल्कि तेज बहाव को प्रभावित हिस्से से दूर मोड़ना और पानी के कारण होने वाले अतिरिक्त कटाव को रोकना था।

कारपेट का इस्तेमाल सामने आने के बाद इस घटना ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में भी ध्यान आकर्षित किया। हालांकि अधिकारियों ने इसे तत्काल आपातकालीन व्यवस्था बताया, लेकिन ऐसी तस्वीरें बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े करती हैं।

बाद में अस्थायी उपाय के स्थान पर प्रभावित हिस्से में कंक्रीट और बोल्डर डालकर सड़क को बहाल किया गया। अधिकारियों के अनुसार करीब ढाई घंटे में मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया और प्रभावित रैंप पर यातायात सामान्य हो गया।

उन्नाव दही चौकी टोल प्लाजा पर भी जलभराव

भारी बारिश का असर केवल सड़क के रैंप तक सीमित नहीं रहा। दही चौकी के पास स्थित गंगा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर भी जलभराव की स्थिति सामने आई। टोल क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पानी जमा होने के कारण संचालन प्रभावित हुआ।

टोल प्लाजा का संचालन करने वाले निजी कर्मचारियों के मुताबिक, आसपास हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन लाइनें मौजूद हैं। इसलिए बिजली के बुनियादी ढांचे और कंक्रीट संरचनाओं के बीच आवश्यक सुरक्षा दूरी बनाए रखने के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए गए।

UPEIDA अधिकारियों को मंगलवार सुबह इन समस्याओं की जानकारी दी गई, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

स्थायी समाधान के लिए रिटेनिंग वॉल की योजना

अधिकारियों के मुताबिक, टोल प्लाजा क्षेत्र में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर भी काम किया जाना है। इसके तहत टोल बूथ प्लाजा के आसपास रिटेनिंग वॉल बनाने का प्रस्ताव है, ताकि भारी बारिश के दौरान पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके और संरचना के आसपास जलभराव कम हो।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं में केवल सड़क की ऊपरी सतह को मजबूत रखना पर्याप्त नहीं होता। उसके नीचे की मिट्टी, एम्बैंकमेंट, जलनिकासी व्यवस्था और आसपास की ढलानों की स्थिरता भी सड़क की दीर्घकालिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होती है।

पहले भी सामने आ चुके हैं बारिश से जुड़े नुकसान

गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के कारण सड़क और मिट्टी के कटाव से जुड़ी घटनाएं इससे पहले भी सामने आ चुकी हैं। अगस्त में भी मानसूनी बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय स्तर पर मिट्टी के कटाव और सड़क किनारे कैविटी बनने की खबरें सामने आई थीं। अधिकारियों ने तब इन्हें स्थानीय समस्याएं बताते हुए कहा था कि संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों ने प्रभावित हिस्सों को ठीक कर दिया है।

18 अगस्त को उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के एक अन्य हिस्से में भारी बारिश के बाद सड़क धंसने और गहरा गड्ढा बनने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। इससे मानसून के दौरान एक्सप्रेसवे के एम्बैंकमेंट और ड्रेनेज सिस्टम की मजबूती को लेकर चर्चा तेज हुई थी।

ऐसे घटनाक्रमों के बीच ताजा रैंप धंसने की घटना से यह सवाल फिर उठता है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के पानी की निकासी और मिट्टी की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

प्रशासन ने स्कूल भी बंद रखे

उन्नाव में लगातार बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने मंगलवार को एहतियात के तौर पर स्कूल बंद रखने का आदेश दिया था। जिले में भारी बारिश के कारण जलभराव और आवागमन से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई।

गंगा एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर भी रखरखाव दल को सक्रिय रखा गया, ताकि बारिश से होने वाले किसी भी नुकसान की तुरंत पहचान और मरम्मत की जा सके।

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यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहमं 

अधिकारियों का कहना है कि ताजा घटना मुख्य एक्सप्रेसवे कैरिजवे पर नहीं हुई थी और मरम्मत के बाद यातायात सामान्य कर दिया गया। इसके बावजूद मानसून के दौरान सड़क की नियमित निगरानी जरूरी है।

एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति सामान्य सड़कों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में सड़क की सतह के नीचे अचानक कैविटी बनना या एम्बैंकमेंट का कमजोर होना दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसलिए केवल तत्काल गड्ढा भरना पर्याप्त नहीं माना जा सकता; प्रभावित हिस्से के नीचे की संरचना और जलनिकासी प्रणाली की भी जांच जरूरी होती है।

निष्कर्ष

उन्नाव के दही चौकी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण गंगा एक्सप्रेसवे की एंट्री रैंप का हिस्सा धंसने की घटना ने मानसून में बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स की मजबूती और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शुरुआती तौर पर पानी के तेज बहाव को मोड़ने के लिए कारपेट बिछाया गया और बाद में कंक्रीट तथा बोल्डर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की गई। करीब ढाई घंटे में रैंप को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया।

फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है और मुख्य एक्सप्रेसवे कैरिजवे प्रभावित नहीं हुआ। लेकिन टोल प्लाजा पर जलभराव और इससे पहले सामने आए मिट्टी के कटाव के मामलों को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान की जरूरत स्पष्ट है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि संबंधित एजेंसियां केवल आपातकालीन मरम्मत तक सीमित रहती हैं या सड़क के नीचे की मिट्टी, एम्बैंकमेंट और जलनिकासी व्यवस्था की व्यापक तकनीकी जांच कर स्थायी सुधार भी करती हैं। मानसून के दौरान लगातार बारिश को देखते हुए एक्सप्रेसवे की नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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