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NC का रुख BJP से अलग नहीं’: फारूक अब्दुल्ला की चुनौती स्वीकार, श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने किया इस्तीफे का ऐलान

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर चल रहा मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। श्रीनगर से पार्टी के लोकसभा सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की चुनौती स्वीकार करते हुए संसद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। मेहदी ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली के अपने पुराने रुख को कमजोर कर दिया है और अब राज्य के दर्जे की बहाली तक अपनी मांग सीमित कर दी है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर NC का मौजूदा रुख भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अलग दिखाई नहीं देता।

मेहदी ने शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला को दो पन्नों का पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान NC ने अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली को अपने घोषणापत्र में शामिल किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद पार्टी की राजनीतिक प्राथमिकताएं बदलती दिखाई दे रही हैं।

फारूक अब्दुल्ला की चुनौती के बाद लिया फैसलाNC

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब फारूक अब्दुल्ला ने मेहदी को पार्टी लाइन से अलग जाकर लगातार बयान देने के बजाय जनता के बीच नया जनादेश लेने की चुनौती दी। अब्दुल्ला ने उनसे कहा था कि यदि वह पार्टी के रुख से सहमत नहीं हैं तो इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें।

मेहदी ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वह लोकसभा से इस्तीफा देंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, वह 3 नवंबर को इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। यह तारीख उनके पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि भी है, जिनकी 3 नवंबर 2000 को एक आईईडी विस्फोट में हत्या कर दी गई थी।

अनुच्छेद 370 पर NC नेतृत्व से सवाल

मेहदी ने अपने पत्र में सबसे बड़ा सवाल 2024 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र को लेकर उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि पार्टी को पहले से पता था कि केंद्र की मौजूदा सरकार अनुच्छेद 370 को बहाल नहीं करेगी, तो फिर NC ने चुनाव के दौरान इसकी बहाली का वादा क्यों किया?

उनका तर्क है कि BJP 2024 में भी केंद्र में सत्ता में थी और इसलिए यह कहना पर्याप्त नहीं है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अनुच्छेद 370 की बहाली संभव नहीं है। मेहदी ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी ने ऐसा वादा केवल चुनावी समर्थन हासिल करने के लिए किया था।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामने अब यह सवाल है कि अगस्त 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों को क्या स्थायी राजनीतिक वास्तविकता मान लिया जाए या उनके खिलाफ राजनीतिक संघर्ष जारी रखा जाए।

हम अनुच्छेद 370 नहीं, राज्य के दर्जे के लिए मांग रहे हैं’

मेहदी ने NC के मौजूदा रुख पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी अब अनुच्छेद 370 की बहाली के बजाय मुख्य रूप से राज्य का दर्जा वापस मांग रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से अपर्याप्त बताया।

उनके अनुसार, राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है, लेकिन इसे अनुच्छेद 370 की बहाली का विकल्प नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक आकांक्षाओं को केवल राज्य के दर्जे तक सीमित कर दिया जाता है, तो इससे अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों को स्वीकार करने का संदेश जा सकता है।

मेहदी ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर की जमीन, संसाधन, संस्कृति, भाषा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता मिलनी चाहिए।

NC से सांसद मेंहदी ने युवाओं और रोजगार का मुद्दा भी उठाया

श्रीनगर सांसद ने अपने पत्र में जम्मू-कश्मीर की युवा आबादी और रोजगार के संकट को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की बड़ी आबादी युवा है और रोजगार तथा अवसरों की कमी उनके भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर रही है।

मेहदी ने जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों की अपेक्षा अन्य पक्षों को अधिक मिल रहा है। साथ ही उन्होंने अवैध कटाई, खनन और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण जैसी गतिविधियों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया।

NC में लंबे समय से चल रहा मतभेद

आगा रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच मतभेद अचानक सामने नहीं आया है। पिछले कई महीनों से मेहदी पार्टी के राजनीतिक रुख, खासकर अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे के सवाल पर अपनी असहमति सार्वजनिक करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी को कारण बताओ नोटिस जारी करने की चुनौती भी दी थी।

उनका कहना रहा है कि जनता से किए गए वादों पर सवाल उठाना पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा है।

दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेहदी श्रीनगर से सांसद हैं और उनका राजनीतिक प्रभाव कश्मीर घाटी में है। उनके इस्तीफे से NC के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

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आगे क्या होगा?

मेहदी के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह लोकसभा सदस्यता के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी अलग होंगे और क्या भविष्य में किसी स्वतंत्र राजनीतिक मंच से चुनाव लड़ेंगे। ताजा घटनाक्रम में उन्होंने संसद और पार्टी दोनों से अलग होने की दिशा में संकेत दिया है।

यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके कदम का कश्मीर की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। यदि वह दोबारा चुनाव लड़ते हैं, तो उनका चुनावी अभियान अनुच्छेद 370, राज्य के दर्जे, रोजगार और स्थानीय अधिकारों के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित हो सकता है।

निष्कर्ष

आगा रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में केवल एक सांसद के पार्टी से अलग होने की घटना नहीं है। यह नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर अनुच्छेद 370, राज्य के दर्जे और 2024 के चुनावी वादों को लेकर गहरे मतभेद का संकेत है।

फारूक अब्दुल्ला की चुनौती स्वीकार करते हुए मेहदी ने साफ कर दिया है कि वह अपने राजनीतिक रुख से पीछे हटने के बजाय इस्तीफे का रास्ता चुनेंगे। उनका आरोप है कि NC का मौजूदा रुख BJP के रुख से पर्याप्त रूप से अलग नहीं है और पार्टी को जनता के सामने अपने पुराने वादों की जवाबदेही देनी चाहिए।

अब निगाहें उनके औपचारिक इस्तीफे और उसके बाद की राजनीतिक रणनीति पर रहेंगी। उनके कदम से जम्मू-कश्मीर में विपक्षी राजनीति, NC के आंतरिक समीकरण और अनुच्छेद 370 की बहस को नया राजनीतिक आयाम मिल सकता है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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