HomeViral NewsNIT दुर्गापुर में ‘चिकनी चमेली’ पर डांस कर रहे छात्रों को प्रोफेसर...

NIT दुर्गापुर में ‘चिकनी चमेली’ पर डांस कर रहे छात्रों को प्रोफेसर ने रोका, पूछा- ‘क्या ये मजाक है?’

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT Durgapur) में फ्रेशर्स इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान छात्रों का ‘चिकनी चमेली’ गाने पर डांस करना विवाद का विषय बन गया है। कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छात्रों का एक समूह मंच पर डांस करता दिखाई देता है। इसी दौरान एक प्रोफेसर ने हस्तक्षेप करते हुए छात्रों से सवाल किया कि क्या इस तरह के प्रदर्शन के लिए फैकल्टी एडवाइजर से अनुमति ली गई थी। प्रोफेसर ने डांस के चयन और कार्यक्रम के स्वरूप पर नाराजगी जताते हुए पूछा, “क्या ये मजाक है? क्या ये परिचय है? मनोरंजन है?”

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने प्रोफेसर के हस्तक्षेप का समर्थन किया और कहा कि आधिकारिक शैक्षणिक कार्यक्रम में प्रस्तुति का चयन संस्थान के माहौल और गरिमा को ध्यान में रखकर होना चाहिए। वहीं, दूसरे पक्ष ने प्रोफेसर की प्रतिक्रिया को जरूरत से ज्यादा सख्त बताते हुए सवाल उठाया कि कॉलेज के वयस्क छात्रों को किसी गाने पर डांस करने से क्यों रोका जाना चाहिए।

NIT दुर्गापुर में फ्रेशर्स कार्यक्रम में चल रहा था डांसNIT

मामला NIT दुर्गापुर के एक ऑडिटोरियम में आयोजित फ्रेशर्स इंडक्शन कार्यक्रम का बताया जा रहा है। नए छात्रों के स्वागत और संस्थान से परिचित कराने के लिए आयोजित कार्यक्रम में छात्रों ने मंच पर बॉलीवुड के लोकप्रिय गीत ‘चिकनी चमेली’ पर डांस शुरू किया। साथी छात्र भी प्रस्तुति के दौरान उत्साह बढ़ाते हुए दिखाई दिए।

इसी बीच एक प्रोफेसर ने मंच पर हस्तक्षेप किया और छात्रों से डांस को लेकर सवाल किए। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि उनके हस्तक्षेप के बाद ऑडिटोरियम का माहौल अचानक बदल गया और छात्रों की प्रस्तुति रुक गई।

प्रोफेसर ने छात्रों से पूछा कि क्या उन्होंने इस तरह की प्रस्तुति के लिए अनुमति ली थी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि उनके फैकल्टी एडवाइजर कहां हैं और क्या इस प्रदर्शन को पहले मंजूरी दी गई थी।

जूनियर्स के सामने ऐसा डांस क्यों?’

वायरल वीडियो में प्रोफेसर छात्रों से यह भी पूछती नजर आती हैं कि वे जूनियर्स के सामने इस तरह के गाने पर डांस क्यों कर रहे हैं। उन्होंने फैकल्टी एडवाइजर की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया।

उनकी नाराजगी का केंद्र केवल डांस नहीं, बल्कि कार्यक्रम की प्रकृति और उसमें प्रस्तुत किए जा रहे कंटेंट की उपयुक्तता थी। उनका कहना था कि आधिकारिक इंडक्शन कार्यक्रम और सामान्य मनोरंजन कार्यक्रम के बीच अंतर समझना चाहिए।

प्रोफेसर की टिप्पणी के बाद कुछ छात्रों ने उनसे बात करने की कोशिश भी की, लेकिन वीडियो में वह छात्रों से अनुशासन और कार्यक्रम की मर्यादा को लेकर सवाल करती हुई दिखाई देती हैं। इसके बाद ऑडिटोरियम में मौजूद छात्रों के बीच भी सन्नाटा छा गया।

सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटी राय

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इस घटना को लेकर बहस शुरू हो गई। एक वर्ग ने प्रोफेसर का समर्थन किया। उनका तर्क था कि किसी प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान के आधिकारिक कार्यक्रम में होने वाली हर प्रस्तुति संस्थान की संस्कृति और मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करती है।

कुछ यूजर्स ने कहा कि फ्रेशर्स इंडक्शन कोई सामान्य पार्टी या कॉलेज फेस्ट नहीं है। इसलिए इसमें ऐसे गाने और प्रस्तुतियां चुनी जानी चाहिए, जिन्हें शिक्षक, अभिभावक और नए छात्र सहजता से स्वीकार कर सकें।

कुछ लोगों ने अपने कॉलेज के अनुभव भी साझा किए और बताया कि कई संस्थानों में शिक्षक ऐसे गीतों या नृत्य प्रस्तुतियों पर आपत्ति जताते रहे हैं, जिन्हें वे शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए अनुपयुक्त मानते हैं।

NIT दुर्गापुर मामले में  ‘मोरल पुलिसिंग’ पर भी उठे सवाल

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रोफेसर की कार्रवाई को ‘मोरल पुलिसिंग’ से जोड़कर देखा। उनका कहना था कि यदि प्रस्तुति वास्तव में कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं थी, तो छात्रों को निजी तौर पर समझाया जा सकता था।

ऐसे लोगों का तर्क था कि मंच पर छात्रों को रोकने और सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने से उनकी प्रस्तुति का आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है। कॉलेज के शुरुआती दिनों में छात्रों के लिए सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शन करना स्वयं में एक महत्वपूर्ण अनुभव होता है, इसलिए शिक्षकों को उन्हें सुधारने के साथ-साथ प्रोत्साहित भी करना चाहिए।

चिकनी चमेली’ को लेकर पहले भी होती रही है चर्चा

‘चिकनी चमेली’ बॉलीवुड का लोकप्रिय गीत है, जिसे 2012 की फिल्म ‘अग्निपथ’ में कैटरीना कैफ पर फिल्माया गया था। गीत अपनी तेज धुन और डांस प्रस्तुति के कारण बेहद लोकप्रिय हुआ था। हालांकि, इसके बोल और प्रस्तुति की शैली को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है।

गायिका श्रेया घोषाल ने 2025 में इस गीत का उदाहरण देते हुए कहा था कि उन्हें कभी-कभी तब असहज महसूस होता है जब बहुत छोटी उम्र की बच्चियां ऐसे गीतों को गाती या उन पर डांस करती हैं, क्योंकि वे गीत के अर्थ को समझे बिना उन्हें दोहराती हैं।

हालांकि, NIT दुर्गापुर के मामले में विवाद का मुख्य सवाल गीत के बोल से ज्यादा उसके आधिकारिक इंडक्शन कार्यक्रम में इस्तेमाल को लेकर है।

कॉलेज परिसरों में मनोरंजन और अनुशासन की बहस

NIT दुर्गापुर का यह मामला कॉलेज परिसरों में लंबे समय से चली आ रही एक बहस को सामने लाता है। एक ओर छात्र चाहते हैं कि कॉलेज जीवन में पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों और मनोरंजन के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता हो। दूसरी ओर संस्थान यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आधिकारिक कार्यक्रम उनकी शैक्षणिक पहचान और निर्धारित आचार-व्यवस्था के अनुरूप हों।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पहले से स्पष्ट दिशानिर्देश होना उपयोगी हो सकता है। यदि किसी कार्यक्रम में गीत, नृत्य या अन्य प्रस्तुति के लिए अनुमति आवश्यक है, तो छात्रों को पहले से इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे मंच पर अचानक टकराव की स्थिति पैदा होने से बचा जा सकता है।

आगे और समाचार पढ़े:

अभी संस्थान (NIT दुर्गापुर) की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं

वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट में NIT दुर्गापुर की ओर से घटना पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों की प्रस्तुति के लिए पहले अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या संस्थान के कार्यक्रम संबंधी कोई विशेष दिशानिर्देश मौजूद थे।

इसी तरह, यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना के बाद छात्रों या संबंधित फैकल्टी के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई की गई है या नहीं।

निष्कर्ष

NIT दुर्गापुर में फ्रेशर्स इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान ‘चिकनी चमेली’ पर छात्रों के डांस को प्रोफेसर द्वारा रोकने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। प्रोफेसर ने छात्रों से प्रस्तुति की अनुमति और फैकल्टी एडवाइजर की मौजूदगी को लेकर सवाल किया और इसे आधिकारिक इंडक्शन कार्यक्रम के लिए अनुपयुक्त बताया।

दूसरी ओर, कई सोशल मीडिया यूजर्स ने छात्रों की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए प्रोफेसर की प्रतिक्रिया को ओवररिएक्शन बताया। कुछ ने इसे अनुशासन का मामला माना, जबकि कुछ ने सार्वजनिक रूप से छात्रों को रोकने के तरीके पर सवाल उठाए।

फिलहाल यह विवाद एक व्यापक सवाल खड़ा करता है—कॉलेज के आधिकारिक कार्यक्रमों में छात्रों की रचनात्मक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए और संस्थागत अनुशासन किस तरह लागू किया जाना चाहिए? इस सवाल का जवाब केवल एक गाने या एक डांस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते कॉलेज कल्चर और पारंपरिक शैक्षणिक मर्यादाओं के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular