भारत में जनजातीय समुदायों के पास जंगल से मिलने वाली अनमोल संपदा तो है, लेकिन सही बाजार और सही कीमत की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक खास पहल शुरू की, जिसका नाम है Van Dhan Yojana। साल 2026 में भी यह योजना लाखों जनजातीय उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने का जरिया बनी हुई है।
वन धन योजना क्या है?
Van Dhan Yojana केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक योजना है, जिसे 14 अप्रैल 2018 को शुरू किया गया था। इसका मकसद वनों में रहने वाले आदिवासी संग्राहकों और कारीगरों को लघु वनोपज यानी माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस पर आधारित उद्यम खड़ा करने में मदद करना है।
इसे ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन यानी TRIFED के जरिए लागू किया जाता है। शहद, तेंदू पत्ता, महुआ, बांस, इमली और जड़ी-बूटियों जैसे उत्पादों को इकट्ठा करने वाले आदिवासी परिवार इस योजना के मुख्य लाभार्थी हैं।
यह योजना कैसे काम करती है?
Van Dhan Yojana के तहत आदिवासी इलाकों में वन धन विकास केंद्र यानी VDVK स्थापित किए जाते हैं। हर केंद्र में करीब दस स्वयं सहायता समूह जुड़े होते हैं, और हर समूह में लगभग तीस आदिवासी सदस्य शामिल होते हैं। इन केंद्रों में कच्चे वनोपज को साफ करने, प्रोसेस करने और पैकेजिंग करने की सुविधा दी जाती है, जिससे उत्पाद की कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
TRIFED के साथ-साथ आईआईटी और आईआईएम जैसे तकनीकी संस्थान भी टेक फॉर ट्राइबल्स कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP योजना के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि आदिवासियों को उनके वनोपज की उचित कीमत मिले।
योजना के फायदे और इस्तेमाल
Van Dhan Yojana से जुड़कर आदिवासी परिवार अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहते, जिससे उनकी आमदनी सीधे बढ़ती है। देशभर में हजारों वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं, और इनमें से बड़ी संख्या में केंद्र पूरी तरह सक्रिय होकर काम कर रहे हैं। इस योजना ने महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है, क्योंकि ज्यादातर वनोपज इकट्ठा करने और प्रोसेस करने का काम आदिवासी महिलाएं ही करती हैं।

ट्राइब्स इंडिया जैसे रिटेल आउटलेट और बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी से वन धन उत्पादों को अब शहरी बाजार तक भी पहुंच मिल रही है। इससे नक्सल प्रभावित और दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों में भी रोजगार और स्थायी आजीविका के मौके पैदा हो रहे हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
Van Dhan Yojana का लाभ लेने के लिए संबंधित परिवार को अपने क्षेत्र के वन धन विकास केंद्र या स्वयं सहायता समूह से जुड़ना जरूरी होता है। राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों और जिला प्रशासन के जरिए ही नए केंद्रों का गठन और पंजीकरण किया जाता है। उत्पादों की गुणवत्ता और ब्रांडिंग बनाए रखना जरूरी है, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा की जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: वन धन योजना कब शुरू हुई थी?
जवाब: इसे 14 अप्रैल 2018 को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने शुरू किया था।
सवाल: Van Dhan Yojana किस एजेंसी के जरिए लागू होती है?
जवाब: इसे ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन यानी TRIFED के जरिए लागू किया जाता है।
सवाल: वन धन विकास केंद्र में कितने सदस्य शामिल होते हैं?
जवाब: आमतौर पर हर केंद्र में दस स्वयं सहायता समूह होते हैं, जिनमें करीब तीन सौ आदिवासी सदस्य शामिल होते हैं।
सवाल: इस योजना में किन उत्पादों को शामिल किया जाता है?
जवाब: शहद, महुआ, तेंदू पत्ता, बांस, इमली और विभिन्न जड़ी-बूटियों जैसे लघु वनोपज इसमें शामिल किए जाते हैं।
सवाल: योजना से जुड़ी और जानकारी कहां से मिल सकती है?
जवाब: योजना का पूरा विवरण और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
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