भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों को आर्थिक सहयोग के नए आयाम देने की कोशिशों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की खुलकर सराहना की है। मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान पुतिन ने भारत-रूस व्यापार में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर व्यक्तिगत रूप से विशेष ध्यान देते हैं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, हालांकि व्यापार असंतुलन भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता बनकर सामने आया है।
पुतिन ने जयशंकर से कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाएं। रूसी राष्ट्रपति ने आने वाले समय में मोदी से मुलाकात की उम्मीद भी जताई। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकातें आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन और सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती हैं। इसके बाद वार्षिक भारत-रूस शिखर बैठक की भी संभावना है।
पुतिन ने मोदी की भूमिका को सराहा
क्रेमलिन में जयशंकर से बातचीत के दौरान पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि द्विपक्षीय व्यापार में पिछले वर्ष की गिरावट के बाद फिर सुधार देखने को मिल रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत रुचि और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
रूस की ओर से यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और रूस अपने पारंपरिक रक्षा संबंधों के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में दोनों देश अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
जयशंकर ने पहुंचाया पीएम मोदी का निजी संदेश
जयशंकर ने पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत संदेश भी सौंपा। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं दीं और कहा कि मोदी आने वाले SCO शिखर सम्मेलन में उनसे मिलने की उम्मीद रखते हैं। इसके बाद भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना है।
जयशंकर ने पुतिन से कहा कि भारत-रूस सहयोग का दायरा काफी व्यापक है। इसमें व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और अन्य आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर भी जोर दिया।
पांच साल में करीब चार गुना हुआ व्यापार
भारत और रूस के आर्थिक संबंधों में सबसे बड़ा बदलाव द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में दिखाई देता है। जयशंकर ने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले पांच वर्षों में लगभग चार गुना बढ़ा है। वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 13 अरब डॉलर का व्यापार था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
हालांकि व्यापार बढ़ने के साथ भारत के सामने एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है। दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन काफी बढ़ गया है। जयशंकर ने बताया कि यह असंतुलन करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने इसे भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर रूस का भरोसा
जयशंकर और पुतिन की बातचीत में ऊर्जा और उर्वरक भी प्रमुख मुद्दे रहे। रूस ने भारत को आश्वासन दिया कि वह उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखेगा। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहे प्रभाव के बीच यह आश्वासन भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक आपूर्ति महत्वपूर्ण है। रूस लंबे समय से भारत के लिए ऊर्जा और उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश आर्थिक और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिहाज से अहम है।
आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने की तैयारी
भारत-रूस संबंध अब केवल कच्चे तेल और रक्षा खरीद तक सीमित नहीं रखना चाहता। दोनों पक्ष व्यापार और निवेश के नए क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक साझेदारी और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा जारी है।
जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक भी हुई। इस मंच पर व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों का लक्ष्य आर्थिक संबंधों को और अधिक संतुलित तथा टिकाऊ बनाना है।
2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
भारत और रूस आने वाले वर्षों में व्यापार को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य चर्चा में है। इसके लिए भारत चाहता है कि रूस के साथ व्यापार में भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी बढ़े और नए उत्पादों तथा क्षेत्रों को बाजार मिले।
भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल ऊर्जा आयात पर आधारित व्यापार मॉडल लंबे समय तक संतुलित नहीं रह सकता। दवाइयां, कृषि उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान और अन्य भारतीय उत्पादों के लिए रूसी बाजार में अवसर तलाशना इस रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
SCO और BRICS से पहले अहम मुलाकात
जयशंकर और पुतिन की बैठक का समय भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आने वाले हफ्तों में कई उच्चस्तरीय मुलाकातों की संभावना है। पुतिन ने SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी से मिलने की इच्छा जताई है। इसके बाद सितंबर में नई दिल्ली में BRICS नेताओं का सम्मेलन प्रस्तावित है, जिसमें पुतिन के शामिल होने की उम्मीद है।
इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन, पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान, वैश्विक व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी व्यापक बातचीत की, जिसमें यूक्रेन, ईरान और अफगानिस्तान सहित कई क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
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भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत-रूस संबंध ऐसे समय में आगे बढ़ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों में भी आर्थिक और रणनीतिक विस्तार हो रहा है, जबकि रूस के साथ भारत अपने पुराने संबंधों को नए आर्थिक आधार पर मजबूत कर रहा है।
पुतिन द्वारा मोदी की व्यक्तिगत भूमिका की सराहना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच राजनीतिक संपर्क अब भी संबंधों की महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है। हालांकि, भारत के लिए भविष्य की चुनौती यह होगी कि बढ़ते व्यापार को अधिक संतुलित बनाया जाए और रूस से आयात के मुकाबले भारतीय निर्यात को भी तेजी से बढ़ाया जाए।
निष्कर्ष
मॉस्को में एस. जयशंकर और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने भारत-रूस संबंधों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत-रूस व्यापार बढ़ाने में व्यक्तिगत रुचि की सराहना की, जबकि जयशंकर ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया।
पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार का करीब चार गुना होकर लगभग 60 अरब डॉलर पहुंचना दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की मजबूती दिखाता है। लेकिन 50 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार घाटा भारत के लिए गंभीर चुनौती है। आने वाले समय में व्यापार संतुलन, ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति, नए निर्यात बाजार तथा तकनीकी और औद्योगिक सहयोग पर खास जोर रहने की संभावना है।
SCO और BRICS जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंचों पर मोदी और पुतिन की संभावित मुलाकातों के बीच जयशंकर की मॉस्को यात्रा ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की जमीन भी तैयार कर दी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाली बैठकों में भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को 2030 तक 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की दिशा में किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।

